इस समय सोशल मीडिया पर अगर किसी शब्द की चर्चा सबसे ज्यादा है, तो वह इथेनॉल है. वही इथेनॉल जिसे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है. इस समय भारत में पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाया जा रहा है, जिसे E20 कहा जाता है. E20 को लेकर विपक्ष भी सरकार पर हमलावर हो गया है.
लोग दावा कर रहे हैं कि E20 पेट्रोल के कारण उनकी गाड़ियां खराब हो रही हैं या माइलेज कम हो रहा है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर तहसीन पूनावाला ने दो दिन पहले ही E20 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने NDTV से बातचीत में भी इस बात को माना है कि E20 से माइलेज थोड़ा कम जरूर होता है लेकिन इससे एक्सीलरेशन भी बढ़ता है.
सोशल मीडिया पर लोग सरकार से E20 को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने भी सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है.
हालांकि, तमाम विवादों के बीच सरकार कहती रही है कि क्रूड ऑयल के इम्पोर्ट को कम करने के लिए ये जरूरी है. मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि इथेनॉल के कारण 4.5 करोड़ बैरल तेल कम आयात करना पड़ा है.
कब से बिक रहा है E20?
फरवरी में सरकार ने संसद में बताया था कि 2022 में नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल-2018 को संशोधित किया था. इसके तहत, 2030 तक E20 पेट्रोल का टारगेट रखा गया था.
सरकार ने बताया था कि जून 2022 तक ही E10 पेट्रोल का टारगेट हासिल कर लिया गया था. इसके बाद दिसंबर 2025 में ही E20 पेट्रोल बन गया था. यानी, समय से 5 साल पहले ही E20 पेट्रोल बना लिया.
अब देशभर में E20 पेट्रोल ही बिक रहा है और इसके बाद से ही बवाल शुरू हो गया. पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे क्रूड ऑयल का इम्पोर्ट कम होगा और अरबों डॉलर बचेंगे. भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करता है.
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क्या E20 से इम्पोर्ट घटा?
E20 चूंकि दिसंबर 2025 से ही आया है, इसलिए हमने तीन साल का जनवरी और फरवरी में हुए क्रूड ऑयल इम्पोर्ट का डेटा खंगाला. ये डेटा पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की वेबसाइट पर मौजूद है. जनवरी-फरवरी का ही डेटा इसलिए लिया गया है, क्योंकि मार्च से ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल का आयात प्रभावित हुआ है.
2024 में जनवरी और फरवरी में 3.97 करोड़ टन कच्चा तेल खरीदा था. 2025 की जनवरी और फरवरी में 4.06 करोड़ टन हो गया. वहीं, इस साल जनवरी-फरवरी में 4.12 करोड़ टन कच्चा तेल आयात किया गया.
E20 का इम्पोर्ट पर कितना असर हुआ? इसे ऐसे समझा जा सकता है कि 2025 की जनवरी-फरवरी में 2024 की तुलना में 2.3% ज्यादा कच्चा तेल आयात किया गया था. जबकि, 2026 की जनवरी-फरवरी में 2025 के मुकाबले कच्चे तेल के आयात में महज 1.3% की ही बढ़ोतरी हुई. आसान भाषा में कहें तो 2026 में 2025 की तुलना में 5 लाख टन से ज्यादा कच्चा तेल कम आयात किया गया है.

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इथेनॉल से कितना पैसा बचाया?
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के लिए सरकार इतना जोर इसलिए दे रही है, ताकि कच्चे तेल के आयात को कम किया जा सके. ईरान युद्ध ने बता दिया है कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम कितनी जरूरी है.
इथेनॉल से क्रूड ऑल के इम्पोर्ट में तो कोई खास कमी नहीं आई है, लेकिन इससे लाखों करोड़ रुपये बचे हैं. PIB ने तीन दिन पहले ही इथेनॉल ब्लेंडिंग पर एक फैक्टशीट जारी की थी. इसमें बताया गया था कि इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई गई है.
इसके अलावा, प्योर पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल वाला पेट्रोल प्रदूषण भी कम करता है. सरकार के मुताबिक, इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण अब तक कार्बन के उत्सर्जन में 930 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है.
इथेनॉल को गन्ने या मक्का से तैयार किया जाता है, जिसे किसानों से खरीदा जाता है. इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हुई है.
टोयोटा किरलोस्कर मोटर्स के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी ने कई राज्यों के किसानों को इसका फायदा हुआ है. उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है, क्योंकि यहां गन्ने की खेती सबसे ज्यादा होती है.
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