- अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील के बाद पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें 111 दिन में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं.
- 17 जून 2026 को भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत US$ 78.48 प्रति बैरल दर्ज की गई.
- मंत्रालय ने स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों की खुदरा कीमतों में संभावित बदलाव पर विचार की बात कही है.
अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध रोकने के 'पीस डील' के ऐलान के बाद अंतराष्ट्रीय एनर्जी मार्किट में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें पिछले 111 दिन में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गयी हैं. गुरुवार को ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमत करीब 2% गिरकर 77 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई. इसकी वजह से भारत जिस रेट पर कच्चा तेल खरीदता है उसमें भी अच्छी गिरावट दर्ज़ हुई है.
पेट्रोलियम मंत्रालय की Petroleum Planning and Analysis Cell की 18 जून, 2026 को जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 17 जून, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत गिरकर US$ 78.48/bbl पर पहुंच गयी. इसकी वजह से जून के पहले 17 दिनों के दौरान कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत भी घटकर US$ 91.02/bbl हो गयी है.
क्या भारत में सस्ते होंगे पेट्रोल, डीजल और LPG?
गुरुवार को ये पूछे जाने पर की अमेरिका-ईरान "पीस डील" के बाद क्या भारत सरकार कच्चे तेल की कीमतों में आयी गिरावट को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी हुई कीमतों से कुछ राहत दे सकती है, जिसपर पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि ये मामले सरकार के संज्ञान में है और अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए खुदरा कीमतों के बारे में फैसला लिया जाएगा.
'LPG पर अंडर-रिकवरी आज भी 700 रुपये प्रति सिलिंडर'
28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से जून के पहले हफ्ते तक कच्चे तेल और नेचुरल गैस की बढ़ी हुई कीमतों के असर से भारतीय तेल कंपनियां को जूझना पड़ा. इसी सोमवार को पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा था, "हर LPG सिलिंडर पर अंडर-रिकवरी आज भी 700 रुपये प्रति सिलिंडर है; हर एक लीटर डीज़ल पर अंडर-रिकवरी 27 रूपया है; जबकि, हर एक लीटर पेट्रोल पर अंडर-रिकवरी 03 रूपया है.
भारत अपनी ज़रूरत का करीब 85% कच्चा तेल, 50% LNG और 60% LPG दुनियाभर के बाज़ारों से आयात करता है, जिसका मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता था. लेकिन ग्लोबल मार्केट्स में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई 28 फरवरी, 2026 को मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद बुरी तरह बाधित हुई. युद्ध के असर से निपटने के लिए भारत सरकार ने तेल कम्पनियों के साथ मिलकर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के आयात स्रोतों को बड़े स्तर पर diversify किया है, और अब दुनिया के नए बाज़ारों से पेट्रोलियम पदार्थों का स्टॉक आयात किया जा रहा है, लेकिन इसकी वजह से आयात का खर्च काफी बढ़ गया.
पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की सप्लाई नॉर्मल
इधर, ईरान और अमेरिका के बीच डील होने के बाद केंद्र सरकार ने आम लोगों को बड़ी खुशखबरी दी है. सरकार ने बताया है कि LPG का बैकलॉग घटकर 3.1 दिन हो गया है. पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की सप्लाई नॉर्मल हो गई है. रिटेल आउटलेट्स पर ऑपरेशंस नॉर्मल चल रहा है. इसका मतलब है कि अब देश की किसी भी एजेंसी पर अब गैस की कमी नहीं है.
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