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क्या है QKDN सिस्टम जिससे नाकाम हो जाएंगे साइबर हमले, DRDO बनाएगा 500 किमी तक ‘हैकप्रूफ’ नेटवर्क

DRDO QKDN Cyber Attacks: डीआरडीओ इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करना चाहता है.कोशिश ये है कि यह सिर्फ दो जगहों के बीच न रहे, इसमें पूरा नेटवर्क इससे जुड़ा होगा.स्टार, रिंग और पॉइंट-टू-पॉइंट जैसे सिस्टमों में यह काम करेगा.

क्या है QKDN सिस्टम जिससे नाकाम हो जाएंगे साइबर हमले, DRDO बनाएगा 500 किमी तक ‘हैकप्रूफ’ नेटवर्क
cyber attacks drdo symbolic image
  • DRDO 500 किलोमीटर तक क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क विकसित कर रहा है
  • QKDN तकनीक क्वांटम फिजिक्स पर आधारित है और डेटा सुरक्षा के लिए एन्क्रिप्टेड की का उपयोग करती है
  • यह नेटवर्क स्टार, रिंग और पॉइंट-टू-पॉइंट सिस्टम में काम करेगा और SDN तकनीक से नियंत्रित होगा
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नई दिल्ली:

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी डीआरडीओ सुरक्षित कम्युनिकेशन के लिए बड़ा कदम उठा रहा है. डीआरडीओ  500 किलोमीटर तक का बेहद सुरक्षित नेटवर्क बनाने की तैयारी में है. इसके लिए  डीआरडीओ ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी EOI जारी किया है.इस प्रोजेक्ट के तहत QKDN सिस्टम विकसित किया जाएगा.

क्या है QKDN?

QKDN का मतलब है क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन ओवर नेटवर्क.यह क्वांटम फिजिक्स पर आधारित तकनीक है.इसमें डेटा को सुरक्षित रखने के लिए खास कोड भेजा जाता है. इसे “की” कहा जाता है. यह की डेटा को एन्क्रिप्ट करती है.इस तकनीक की सबसे बड़ी ताकत इसकी सुरक्षा है. अगर कोई बीच में डेटा चुराने की कोशिश करे, तो तुरंत पता चल जाता है. क्वांटम सिस्टम में सिग्नल छूते ही बदल जाता है. इस वजह से इसे लगभग हैक करना मुश्किल माना जाता है.

कैसे काम करेगा यह नेटवर्क?

डीआरडीओ इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करना चाहता है.कोशिश ये है कि यह सिर्फ दो जगहों के बीच न रहे, इसमें पूरा नेटवर्क इससे जुड़ा होगा.स्टार, रिंग और पॉइंट-टू-पॉइंट जैसे सिस्टमों में यह काम करेगा.फिलहाल  इसका लक्ष्य 500 किमी तक सुरक्षित नेटवर्क बनाना है.इसके लिए कई QKD यूनिट्स लगाई जाएंगी.साथ ही SDN तकनीक का इस्तेमाल होगा. SDN का मतलब है सॉफ्टवेयर से नेटवर्क कंट्रोल करना. इससे सिस्टम को जरूरत के हिसाब से बदला जा सकेगा.

स्वदेशी तकनीक पर जोर

इस प्रोजेक्ट में देश में बने उपकरणों का इस्तेमाल होगा.डीआरडीओ चाहता है कि पूरा सिस्टम भारत में ही तैयार हो.इससे सुरक्षा और नियंत्रण दोनों मजबूत होंगे. भारत में इस तकनीक पर पहले भी काम हुआ है.साल 2022 में प्रयागराज और विंध्याचल के बीच टेस्ट हुआ था. यह 100 किमी से ज्यादा दूरी का था.वहीं 2020 में हैदराबाद में भी परीक्षण किया गया था तो 2024 में 100 किमी फाइबर लाइन पर सफल ट्रायल हुआ था.पिछले साल हवा के जरिए भी टेस्ट किया गया. इसमें लेजर की मदद से डेटा भेजा गया.यह तकनीक दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में उपयोगी है

क्यों जरूरी है यह तकनीक?

आज के समय में डेटा बहुत अहम है.साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है.पुराने सुरक्षा सिस्टम अब कमजोर पड़ रहे हैं.खासकर नए क्वांटम कंप्यूटर के कारण यह बहुत ही महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में QKDN जैसी तकनीक जरूरी हो गई है.यह भविष्य का सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम है.इससे सेना की जानकारी सुरक्षित रहेगी. बैंकिंग और डेटा सेंटर भी सुरक्षित होंगे.5G और 6G नेटवर्क में भी इसका उपयोग होगा. सही मायनें में डीआरडीओ का यह प्रोजेक्ट देश की सुरक्षा को नई मजबूती देगा. 

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