मिडिल ईस्ट में हाल ही हुई जंग और रूस-यूक्रेन युद्ध ने भविष्य के वॉरफेयर की कहानी बदल दी है. इन युद्धों में दुनिया ने बड़े स्तर पर ड्रोन अटैक को देखा. पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के वक्त भी ड्रोन्स का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया. ये बताता है कि भविष्य में ड्रोन, स्वार्म अटैक और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की भूमिका बेहद अहम होगी. इसी को देखते हुए भारत भी भविष्य के युद्धों की तैयारी कर रहा है. DRDO एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिससे दुश्मन के हजारों ड्रोन चुटकियों में बेअसर हो जाएंगे. इस प्रोजेक्ट का नाम है 'SHIELD'. आखिर ये प्रोजेक्ट क्या है? आइए बताते हैं.
क्या है DRDO का 'प्रोजेक्ट SHIELD'?
DRDO ने प्रोजेक्ट SHIELD शुरू किया है. इसका मतलब है 'S-Band High-Power Microwave Integrated Evaluation System'. इसके लिए DRDO ने टेंडर जारी किया है. इस प्रोजेक्ट के तहत एक मॉड्यूलर और स्केलेबल सिस्टम को तैयार किया जाएगा, जो गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित सॉलिड-स्टेट पावर एम्प्लीफायर टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा. यह टेक्नोलॉजी पारंपरिक हाई-पावर माइक्रोवेव सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले वैक्यूम ट्यूब मैग्नेट्रॉन और क्लाइस्ट्रॉन की तुलना में ज्यादा कॉम्पैक्ट और बेहतर मानी जाती है.
कैसे काम करेगा सिस्टम?
DRDO इस टेक्नोलॉजी के जरिए 'फार फील्ड' में कम से कम 3 kV/m की पीक इलेक्ट्रिक फील्ड स्ट्रेंथ जेनरेट करेगा. इतना ज्यादा ताकतवर सिस्टम बड़ी मात्रा में वेस्ट हीट पैदा करेगा. यह इतनी ताकतवर वेब जेनरेट करेगा, जिसके संपर्क में आने पर एक साथ सैकड़ों ड्रोन धराशायी हो जाएंगे.
भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीक ही निर्णायक शक्ति होगी। @DRDO_India का SHIELD Programme भारत की रक्षा क्षमता को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वॉरफेयर, हाई-पावर माइक्रोवेव तकनीक और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं के नए आयाम दे रहा है।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) September 7, 2026
यह आत्मनिर्भर भारत की उस संकल्पशक्ति का प्रमाण है, जो आधुनिक… pic.twitter.com/9nfEnikCfF
S-बैंड क्यों है अहम?
S-बैंड स्पेक्ट्रम 2 से 4 गीगाहर्ट्ज के बीच होता है, यह एक बिजी रेडियो स्पेक्ट्रम है, जिसमें होम वाई-फाई, कुछ सैटेलाइट लिंक, एयरपोर्ट रडार और कई कमर्शियल ड्रोन के कंट्रोल लिंक भी संचालित होते हैं. कई सैनाएं इसी स्पेक्ट्रम में काम करती हैं. ऐसे में दुश्मन के ड्रोन या इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से खतरा हो सकता है.
क्या होती है हाई-पावर माइक्रोवेव टेक्नोलॉजी?
हाई-पावर माइक्रोवेव (HPM) टेक्नोलॉजी डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन्स (DEW) की एक श्रेणी है. यह लेजर हथियारों से अलग होती है. जहां लेजर एडवांस लाइट वेब का इस्तेमाल करते हैं, वहीं HPM सिस्टम पावरफुल माइक्रोवेव पल्स जेनरेट करते हैं. ये वेब इतने पावरफुल होते हैं कि इनके संपर्क में आने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल सर्किट रुक जाते हैं.
पहले भी हो चुके हैं परीक्षण
बेंगलुरु स्थित माइक्रोवेव ट्यूब रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर (MTRDC) पहले ही जमीन आधारित S-बैंड हाई-पावर माइक्रोवेव डायरेक्टेड-एनर्जी सिस्टम विकसित, परीक्षण और प्रदर्शित कर चुका है. रिपोर्ट के अनुसार, यह सिस्टम ड्रोन झुंडों का मुकाबला करने में सक्षम है और छोटे क्वाडकॉप्टर ड्रोन के खिलाफ करीब एक किलोमीटर की दूरी तक प्रभावी साबित हुई है. भविष्य में इसकी रेंज बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है.
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