विज्ञापन

दहेज हत्या आज भी गंभीर समस्या... SC ने रद्द की आरोपी पति की जमानत, अदालतों से सावधानी बरतने की अपील

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज जैसे मामलों में जमानत देते समय अदालतों को बेहद सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि समाज में यह संदेश न जाए कि महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों को हल्के में लिया जा रहा है.

दहेज हत्या आज भी गंभीर समस्या... SC ने रद्द की आरोपी पति की जमानत, अदालतों से सावधानी बरतने की अपील
  • सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या को गंभीर सामाजिक समस्या बताया और आरोपी पति को मिली जमानत रद्द की
  • कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक में दहेज के लिए लड़कियों की हत्या होती है
  • दहेज की मांग शादी से पहले गिफ्ट के रूप में शुरू होकर बाद में दबाव और हिंसा में बदल जाती है
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज से जुड़ी हिंसा पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि दहेज हत्या आज भी समाज के कुछ हिस्सों में खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक जैसे राज्यों में 'गंभीर समस्या' बनी हुई है. कोर्ट ने दहेज हत्या के एक मामले में आरोपी पति को दी गई जमानत रद्द कर दिया. यह टिप्पणी उस समय की गई जब कोर्ट ने मृत महिला के पिता की अपील स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी पति को जमानत दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय विश्नोई की बेंच ने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश में हमने देखा है कि नई-नई शादी हुई लड़कियों को दहेज के लिए उनके ससुराल में बेरहमी से मार दिया जाता है, या तो उन्हें लगातार प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता है या फिर उनकी हत्या कर दी जाती है.

Latest and Breaking News on NDTV

कोर्ट ने आगे कहा कि एक लड़की शादी के बाद प्यार, सम्मान और खुशहाल जीवन की उम्मीद करती है, न कि दहेज के लिए हिंसा का शिकार बनने के लिए. 

कोर्ट ने अफसोस जताया कि शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के बावजूद दहेज की मांग खत्म नहीं हुई है. शादी से पहले “गिफ्ट” के नाम पर शुरुआत होती है, शादी के बाद यह दबाव और मांग में बदल जाता है. वहीं दूल्हे की अच्छी कमाई होने पर लड़की के परिवार पर ज्यादा दहेज देने का दबाव रहता है.

कोर्ट ने महात्मा गांधी का यह कथन भी उद्धृत किया कि, “जो युवक विवाह के लिए दहेज को शर्त बनाता है, वह अपनी शिक्षा, देश और नारी का अपमान करता है.”

कोर्ट ने 2023 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया -

  • 6,156 लोगों की दहेज हत्या में मौत हुई 
  • सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश (2,122) और बिहार (1,143) में
  • 833 हत्या मामलों में दहेज कारण बताया गया
  • दहेज निषेध कानून के तहत 83,327 मामले ट्रायल में
  • 27,154 गिरफ्तारियां (22,316 पुरुष, 4,838 महिलाएं)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने 'गंभीर गलती' करते हुए जमानत दे दी. कोर्ट के अनुसार FIR में स्पष्ट रूप से दहेज की मांग और प्रताड़ना के आरोप हैं. महिला की मौत शादी के 7 साल के भीतर ससुराल में हुई. भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 (पूर्व धारा 113B) को ध्यान में रखना चाहिए था.

Latest and Breaking News on NDTV
यह मामला गाजियाबाद का है, जहां 11 जुलाई 2024 को एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. शादी को 5 साल हुए थे. महिला के पिता ने अगले ही दिन FIR दर्ज कराई. दहेज के लिए लगातार उत्पीड़न, लक्ज़री कार और नकद की मांग के आरोप लगाए गए थे. पुलिस ने पति और उसके माता-पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 और दहेज निषेध अधिनियम 1961 के तहत चार्जशीट दाखिल की.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि FIR में कोई देरी नहीं थी (अगले दिन ही दर्ज हुई). पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला दबाने से मौत की आशंका जताई गई. हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया. कोर्ट ने कहा कि दहेज जैसे मामलों में जमानत देते समय अदालतों को बेहद सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि समाज में यह संदेश न जाए कि महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों को हल्के में लिया जा रहा है. अंत में, कोर्ट ने आरोपी को सरेंडर करने का आदेश देते हुए अपील को मंजूर कर लिया.

ये भी पढ़ें: 'क्या आपके और कोई काम नहीं', सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमकर धोया

ये भी पढ़ें: जमानत चाहिए, थाना साफ करो... बेल की शर्तों पर SC नाराज, CJI बोले- ऐसी शर्तें अमानवीय

लेखक के बारे में
img
आशीष भार्गव
Senior Editor – Legal News
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Dowry Deaths, Supreme Court, Dowry Deaths In UP, Dowry Deaths In Bihar, Dowry Deaths Cases In Supreme Court
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com