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ट्वीट से तख्तापलट और टैरिफ से यू-टर्न तक... 5 फैसले जिन्होंने साबित किया कि ट्रंप का अगला कदम खुद उन्हें भी नहीं पता

युद्ध की धमकियों से लेकर अचानक हुए शांति समझौतों तक, डोनाल्ड ट्रंप के ये 5 बड़े फैसले उनके उस अप्रत्याशित स्वभाव की गवाही देते हैं.

ट्वीट से तख्तापलट और टैरिफ से यू-टर्न तक... 5 फैसले जिन्होंने साबित किया कि ट्रंप का अगला कदम खुद उन्हें भी नहीं पता
  • डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध में बार-बार अपने बयान बदले और दो हफ्ते का सीजफायर स्वीकार किया था
  • वेनेजुएला मामले में ट्रंप ने अचानक हमला किया और बाद में प्रतिबंध हटाने जैसे कदम उठाए
  • ग्रीनलैंड खरीदने का प्रस्ताव देकर ट्रंप ने डेनमार्क के साथ अपनी आधिकारिक यात्रा रद्द कर दी

मिडिल ईस्ट में तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा. करीब 40 दिन की भीषण जंग के बाद अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर तो हुआ, लेकिन तनाव जारी रहा. 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान बेहद अजीबोगरीब रहे. वो कभी कहते हैं कि उन्होंने ईरान की एयरफोर्स और नेवी को खत्म कर दिया है, तो कभी सीजफयर की बात करते हैं. ट्रंप ऐसे नेता हैं जिसकी अगली चाल का अंदाजा न तो उनके कट्टर विरोधियों को है और न ही उनके सबसे करीबी सलाहकारों को. उन्हें अनप्रिडिक्टेबल माना जाता है. उनके बयान और फैसले अक्सर एक ऐसी पहेली होते हैं जिसे सुलझाने में दुनिया के बड़े-बड़े विश्लेषक भी नाकाम रहे हैं. आज हम डोनाल्ड ट्रंप के ऐसे ही कुछ अजीबोगरीब फैसलों के बारे में बता रहे हैं, जिन पर उन्होंने खुद ही यूटर्न ले लिया है.

1. ईरान युद्ध में बार-बार बदली ट्रंप की बयानबाजी

जब से ईरान युद्ध शुरू हुआ है, तभी से ट्रंप के बयान चर्चा में रहे हैं. ट्रंप ने ईरान को 'पत्थर युग' में भेजने और उसकी 'पूरी सभ्यता' खत्म करने की धमकी दी थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद, उन्होंने नाटकीय रूप से अपना रुख बदला और पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते के लिए सीजफायर को राजी हो गए. इसके अलावा उन्होंने ईरान को होर्मुज खोलने की धमकी दी और नाकेबंदी की भी चेतावनी दी, इस धमकी पर भी ट्रंप नहीं टिक पाए. कुछ दिन पहले वो जहां ईरान की सभ्यता खत्म करने की बात कर रहे थे, अब वही ट्रंप शांति दूत बनने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया है कि यह युद्ध खत्म होने के करीब है.

2.वेनेजुएला मामले में था अजीब रुख

वेनेजुएला के मामले में भी ट्रंप की अनप्रिडिक्टेबल कार्यशैली ही दिखी. उन्होंने इसी साल जनवरी में अचानक वेनेजुएला पर हमला कर दिया और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर सीधे न्यूयॉर्क की जेल पहुंचा दिया. इस कार्रवाई से कुछ दिन पहले तक ट्रंप शांति की बात करने का दावा करते हुए नोबेल पुरस्कार मांग रहे थे. इससे भी हैरानी की बात यह है कि ट्रंप ने एक तरफ वेनेजुएला पर हमला किया और दूसरी ओर मादुरो की ही पूर्व सहयोगी डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति स्वीकार कर लिया और अप्रैल 2026 तक आते-आते वेनेजुएला के केंद्रीय बैंक पर से प्रतिबंध हटाने और अमेरिकी तेल कंपनियों के लिए निवेश के रास्ते खोलने जैसे यू-टर्न ले लिए.

3. ग्रीनलैंड खरीदने का विचित्र प्लान

इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक डेनमार्क से ग्रीनलैंड खरीदने का प्रस्ताव देकर दुनिया को हैरान कर दिया था. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और संसाधनों से भरपूर है. जब डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को हास्यास्पद बताया तो ट्रंप ने न केवल अपनी ऑफिशियल डेनमार्क यात्रा रद्द कर दी.

4. टैरिफ पर बार-बार यू-टर्न

डोनाल्ड ट्रंप जब से दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, तब से उनकी टैरिफ पॉलिसी काफी चर्चा में है. वो कभी टैरिफ बढ़ाते हैं तो कभी घटाते हैं. उनका सबसे बड़ा हथियार टैरिफ ही बन चुका है. ट्रंप कभी आधी रात को सोशल मीडिया के जरिए कनाडा और मैक्सिको जैसे सहयोगियों पर 25% से 50% तक के अचानक टैरिफ की घोषणा कर देते हैं, तो कुछ ही घंटों बाद अच्छी बातचीत का हवाला देकर अपना रुख बदल लेते हैं. हाल ही में ट्रंप ने कनाडा पर 50% टैरिफ की धमकी दी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद इसे वापस ले लिया.  इसी तरह उन्होंने एक बार वैश्विक टैरिफ पर अचानक 90 दिनों की रोक लगा दी.

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5. पुतिन और जेलेंस्की के प्रति बदलता नजरिया

डोनाल्ड ट्रंप का रुख रूसी राष्ट्रपति व्लादिमर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को लेकर भी बार-बार बदलता है. एक वक्त उन्होंने पुतिन की सैन्य हमलों को देखते हुए उन्हें 'बिल्कुल पागल' बता दिया था. वहीं रूसी तेल कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए और यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलें देने जैसे फैसले किए. यह देखकर यही लगा कि ट्रंप का जेलेंस्की की तरफ झुकाव है. लेकिन दूसरी तरफ ट्रंप ने जेलेंस्की को युद्ध के लिए जिम्मेदार बताकर उन्हें 'तानाशाह' तक कह दिया. लेकिन जेलेंस्की को ट्रंप  शांति समझौते के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार भी बता चुके हैं.

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अनुभव शाक्य
chief sub editor
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