वैज्ञानिक इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या मंगलवार को नेपाल और उसके आसपास के क्षेत्र में आया जोरदार भूकंप ही सिक्किम में ल्होनक झील पर बादल फटने और तीस्ता नदी में अचानक आई बाढ़ की असली वजह है? झील पर बादल के फटने से चुंगथांग बांध भी बह गया, जो राज्य की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है. ये 1200 मेगावाट तीस्ता चरण तीन जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है, जिसमें राज्य सरकार प्रमुख रूप से हितधारक है.
उत्तरी सिक्किम में ल्होनक झील पर बादल फटने से तीस्ता नदी में अचानक बाढ़ आने के बाद आठ लोगों की मौत हो गई और 22 सैन्यकर्मी समेत 69 लोग लापता हो गए हैं.
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हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर द्वारा जारी उपग्रह चित्रों से पता चला है कि दक्षिणी ल्होनक झील का क्षेत्रफल, 17 सितंबर की तुलना में 100 हेक्टेयर से अधिक कम हो गया है. ये दर्शाता है कि झील पर बादल के फटने से उत्तरी सिक्किम में तीस्ता नदी बेसिन में अचानक बाढ़ आ गई.
अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और 22 सैन्यकर्मियों समेत 69 लोग लापता हैं.
अधिकारी ने कहा कि हालांकि अभी ये पता लगाना मुश्किल है, लेकिन बादल फटने से ऐसे नतीजे नहीं आते. घटनास्थल पर गए कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप के कारण वहां बाढ़ आई होगी. उन्होंने कहा कि बाढ़ की चेतावनी बांग्लादेश के साथ भी साझा की गई है.
नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) उपग्रह इमेजरी से पता चला कि झील लगभग 162.7 हेक्टेयर में फैली हुई थी. 28 सितंबर को इसका क्षेत्रफल बढ़कर 167.4 हेक्टेयर हो गया और भारी गिरावट के साथ 60.3 हेक्टेयर रह गया.
इसरो ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा, "ये देखा गया है कि झील पर बादल फटा और लगभग 105 हेक्टेयर क्षेत्र का पानी बह गया (28 सितंबर 2023 की छवि बनाम 04 अक्टूबर 2023) जिससे नीचे की ओर अचानक बाढ़ आ गई होगी." अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि वो उपग्रह डेटा का उपयोग करके झील की आगे भी निगरानी जारी रखेगी.
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