- एपस्टीन फाइल में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं.
- हरदीप पुरी ने बताया कि उनकी मुलाकातें एपस्टीन से इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट के प्रोजेक्ट के दौरान हुई थीं.
- पुरी ने साफ किया कि वे एपस्टीन के आइलैंड पर कभी नहीं गए और एपस्टीन उनके निजी मित्र नहीं थे.
एपस्टीन फाइल को लेकर इन दिनों पूरी दुनिया में बड़ा बवाल मचा है. इस फाइल में यूरोप के बड़े-बड़े नेताओं और कारोबारियों के ऐसे अश्लील करतूत सामने आए, जिसे देखकर लोग हैरत में हैं. भारत में भी इस लिस्ट पर बवाल मचा है. इस बवाल के पीछे एपस्टीन फाइल में केंद्रीय मंत्री और पूर्व राजनायिक हरदीप सिंह पूरी का नाम सामने आने के बाद विपक्षी नेता सवाल उठा रहे हैं. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सवाल उठाए थे. जिसके बाद हरदीप पुरी ने प्रेस कॉफ्रेंस कर एपस्टीन फाइल में नाम आने के पीछे की कहानी बताई.
NDTV को दिए इंटरव्यू में हरदीप पुरी दिए जवाब
गुरुवार को केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने NDTV की मैनेजिंग एडिटर पद्मजा जोशी से बातचीत में एपस्टीन फाइल में नाम आने के बारे में और डिटेल से बात की. उन्होंने बताया कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें उस वक्त हुई थीं, जब वह इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के एक प्रोजेक्ट इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म (ICM) के महासचिव थे, जिसमें दुनिया भर के कई प्रतिष्ठित नेता और प्रधानमंत्री शामिल थे.
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि एपस्टीन उस कमीशन का हिस्सा नहीं था बल्कि आईजीआई के कार्यक्रमों के सिलसिले में ही मौजूद रहता था. पुरी ने कहा कि अगर मैं कोई सरकारी अधिकारी होता तो मैं किसी को मैसेज भेजकर पूछता कि क्या मुझे इस व्यक्ति से मिलना चाहिए या नहीं, लेकिन ऐसा नहीं था.
मैं कभी एपस्टीन के आईलैंड पर नहीं गयाः हरदीप पुरी
हरदीप पुरी ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में जोर देकर कहा कि एपस्टीन उनका कोई व्यक्तिगत मित्र नहीं था. उन्होंने कहा, "मैं न तो कभी उसके आइलैंड पर गया और न ही वह कभी मेरे घर आया." पुरी ने कहा कि एपस्टीन से जब उनकी पहली मुलाकात हुई थी, तब वह उसका इतिहास नहीं जानते थे. पहली मुलाकात के दौरान उन्होंने एपस्टीन के बारे में गूगल सर्च किया था और आपस में चर्चा की थी कि उनसे मिलना चाहिए या नहीं.
8 साल न्यूयॉर्क में रहे पुरी, 3-4 बार एपस्टीन से मुलाकात का जिक्र
उन्होंने जोर देकर कहा कि ये मुलाकात पर्सनल नहीं बल्कि डेलिगेशन के साथ हुई थीं. उन्होंने बताया कि वह प्रतिनिधिमंडल के साथ एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे. इससे पहले बुधवार को प्रेस कॉफ्रेंस में हरदीप पुरी ने कहा -एपस्टीन फाइल के नाम पर 30 लाख ईमेल जारी किए जा चुके हैं. मैं मई 2009 से जब मैंने संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला, आठ साल तक न्यूयॉर्क में रहा. 2017 में मैं मंत्री बना. आठ वर्षों में संभवतः तीन या चार मुलाकातों का जिक्र है.
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