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दिल्ली के ये इलाके जाम मुक्त होंगे, नया रेलवे प्रोजेक्ट बचाएगा हजारों लीटर तेल- क्या आपका इलाका भी है इसमें?

मुकरबा चौक, हैदरपुर बादली, शालीमार बाग, आजादपुर, पीतमपुरा, केशवपुरम, मॉडल टाउन, वजीरपुर और संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर जैसे इलाकों को इससे सबसे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. प्रोजेक्ट पूरा होते ही लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बदल सकती है.

दिल्ली के ये इलाके जाम मुक्त होंगे, नया रेलवे प्रोजेक्ट बचाएगा हजारों लीटर तेल- क्या आपका इलाका भी है इसमें?
PTI
  • दिल्ली में ट्रैफिक जाम से राहत पहुंचाने की बड़ी तैयारी चल रही है.
  • नॉर्थ वेस्ट दिल्ली में बनने जा रहे हैं दो बड़े प्रोजेक्ट. रेलवे से मिली मंजूरी.
  • न केवल दिल्ली के कई इलाकों में खत्म होगा घंटों का जाम, बल्कि हजारों लीटर पेट्रोल की बचत भी होगी.
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दिल्ली वालों के लिए घंटों के ट्रैफिक जाम, धुएं और हॉर्न के शोर से राहत की एक बड़ी खबर आई है. राजधानी के सबसे बदनाम ट्रैफिक कॉरिडोर माने जाने वाले मुकरबा चौक, आउटर रिंग रोड और संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि भारतीय रेलवे ने नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है. इनमें हैदरपुर बादली रेलवे ओवरब्रिज को चौड़ा करना और शालीमार बाग को संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से जोड़ने वाला एलिवेटेड लूप बनाना शामिल है.

अगर ये प्रोजेक्ट समय पर पूरे होते हैं तो लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बदल सकती है.

क्यों जरूरी थे ये प्रोजेक्ट?

दिल्ली में अगर किसी इलाके का नाम ट्रैफिक जाम के लिए सबसे ज्यादा लिया जाता है तो उसमें मुकरबा चौक जरूर शामिल होता है. यहां हर दिन हजारों ट्रक, कंटेनर, बसें और निजी वाहन गुजरते हैं. सुबह और शाम के वक्त हालात ऐसे हो जाते हैं कि कुछ किलोमीटर का रास्ता पार करने में एक घंटे से ज्यादा लग जाता है.

संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर एशिया के सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट हब्स में गिना जाता है. यहां देशभर से आने वाले भारी वाहन पहुंचते हैं. ऐसे में आउटर रिंग रोड और आसपास के इलाकों पर लगातार दबाव बना रहता है.

दिल्ली सरकार का कहना है कि रेलवे ओवरब्रिज चौड़ा होने के बाद ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा बिना रुके निकल सकेगा. वहीं नया एलिवेटेड लूप रेलवे ट्रैक के ऊपर से होकर शालीमार बाग और ट्रांसपोर्ट नगर को सीधे जोड़ेगा.

मुकरबा चौक, हैदरपुर बादली, शालीमार बाग, आजादपुर, पीतमपुरा, केशवपुरम, मॉडल टाउन, वजीरपुर और संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर जैसे इलाकों को इस प्रोजेक्ट से सबसे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. ये पूरा बेल्ट दिल्ली के सबसे व्यस्त ट्रांसपोर्ट और कमर्शियल कॉरिडोर में गिना जाता है जहां हर दिन लाखों वाहन गुजरते हैं.

हैदरपुर बादली रेलवे ओवरब्रिज चौड़ा होने से आउटर रिंग रोड पर ट्रकों और भारी वाहनों का दबाव कम होगा. वहीं शालीमार बाग से संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर तक बनने वाला एलिवेटेड लूप ट्रैफिक को रेलवे क्रॉसिंग और जाम वाले हिस्सों से सीधे निकाल देगा.

केवल सड़क नहीं, दिल्ली की अर्थव्यवस्था का मामला

विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रैफिक जाम केवल लोगों की परेशानी नहीं बल्कि आर्थिक नुकसान भी है. दिल्ली में हर दिन लाखों लीटर ईंधन जाम में फंसकर बर्बाद होता है. इससे प्रदूषण बढ़ता है और कारोबार की लागत भी बढ़ती है.

ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोग लंबे समय से मांग कर रहे थे कि इस इलाके में बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार किए जाएं. क्योंकि ट्रकों की धीमी आवाजाही का असर सीधे सप्लाई चेन और बाजारों तक पड़ता है.

यानी यह प्रोजेक्ट केवल सड़क बनाने की योजना नहीं बल्कि दिल्ली की आर्थिक रफ्तार बढ़ाने की कोशिश भी है.

रेलवे की मंजूरी क्यों अहम है

इन दोनों प्रोजेक्ट्स की सबसे बड़ी चुनौती रेलवे ट्रैक के ऊपर निर्माण को लेकर थी. अब रेलवे ने तकनीकी जांच के बाद इन योजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है.

रेलवे ने साफ कहा है कि निर्माण कार्य सुरक्षा मानकों के तहत होगा ताकि ट्रेन संचालन प्रभावित न हो. इसका मतलब है कि अब सबसे बड़ी प्रशासनिक बाधा काफी हद तक दूर हो चुकी है.

आने वाले समय में क्या बदल जाएगा?

अगर योजना जमीन पर सही तरीके से उतरी तो नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के लाखों लोगों को राहत मिल सकती है. यात्रा का समय घटेगा. भारी वाहनों का दबाव कम होगा. ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण पर भी असर पड़ सकता है. लेकिन असली परीक्षा अब निर्माण की गति और समय सीमा होगी. क्योंकि दिल्ली वाले घोषणाओं से ज्यादा जमीन पर बदलाव देखना चाहते हैं.

फिलहाल इतना तय है कि राजधानी के सबसे थके हुए ट्रैफिक कॉरिडोर में अब बड़े बदलाव की शुरुआत हो चुकी है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि रोजाना घंटों जाम में फंसे रहने वाले हजारों वाहन अगर बिना रुके चल पाए तो हर दिन हजारों लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत हो सकती है. इसका सीधा असर लोगों की जेब, ट्रांसपोर्ट लागत और दिल्ली के प्रदूषण स्तर पर भी पड़ेगा.

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