- दिल्ली में यमुना नदी के वजीराबाद बैराज पर जलस्तर सामान्य स्तर से काफी नीचे आ गया है.
- यमुना के जलस्तर में कमी के कारण जल उत्पादन में लगभग अस्सी से सौ मिलियन गैलन प्रतिदिन तक की कमी आई है.
- सरकार ने कैनाल से पानी लाकर वजीराबाद तक पहुंचाने और आपातकालीन पंपिंग व्यवस्था से अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराया.
Delhi Water Crisis: दिल्ली में पानी की मांग बढ़ने के बीच यमुना में घटते जलस्तर का असर अब राजधानी की जलापूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है. दिल्ली सरकार के मुताबिक, वजीराबाद बैराज पर यमुना का जलस्तर सामान्य स्तर से काफी नीचे चला गया है, जिससे कच्चे पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है और जल उत्पादन में 80 से 100 MGD (मिलियन गैलन प्रतिदिन) तक की कमी आई है.
जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने शनिवार को बताया कि वजीराबाद में यमुना का जलस्तर सामान्य 674.5 फीट से घटकर करीब 668 फीट रह गया है. वजीराबाद में जलस्तर सामान्य 674.5 फीट से घटकर करीब 668 फीट रह गया है, जिसके कारण कच्चे पानी की कमी हुई है और जल उत्पादन लगभग 80-100 MGD तक प्रभावित हुआ है. दिल्ली में गर्मियों के दौरान पानी की मांग बढ़कर करीब 1,250 MGD तक पहुंच जाती है. ऐसे में जल उत्पादन में आई यह कमी सरकार के लिए चुनौती बन गई है.
फिर भी 900 MGD उत्पादन बनाए रखने का दावा
सरकार का कहना है कि कच्चे पानी की कमी के बावजूद दिल्ली जल बोर्ड करीब 900 MGD पानी का उत्पादन बनाए हुए है. दिल्ली को गर्मियों के दौरान करीब 1,250 MGD पानी की आवश्यकता होती है. वजीराबाद बैराज पर यमुना के जलस्तर में आई बड़ी गिरावट के बावजूद दिल्ली जल बोर्ड जल उत्पादन बनाए रखने और लोगों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए लगातार प्रयास कर रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, यमुना के ऊपरी क्षेत्रों में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण भी स्थिति प्रभावित हुई है.
जल संकट से निपटने के लिए क्या कर रही है सरकार?
दिल्ली सरकार ने बताया कि अतिरिक्त कच्चे पानी की व्यवस्था के लिए कैरियर लाइन कैनाल से पानी को ट्विन मेन्स सिस्टम के जरिए वजीराबाद तक पहुंचाया जा रहा है. इसके अलावा यमुना के सूखे हिस्से में आपातकालीन पंपिंग व्यवस्था भी की गई है. सूखी नदी तलहटी में आपातकालीन पंपिंग व्यवस्था लगाई गई है, जिससे करीब 40 MGD अतिरिक्त कच्चा पानी मिल रहा है. इसके साथ ही कैनाल सिस्टम से करीब 130 MGD अतिरिक्त पानी डायवर्ट किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इन उपायों से वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्रों का संचालन जारी रखने में मदद मिली है.
किन बातों पर हुई समीक्षा?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कच्चे पानी की उपलब्धता, जल शोधन संयंत्रों की उत्पादन क्षमता, जल वितरण व्यवस्था और आपातकालीन उपायों की समीक्षा की गई. सरकार के मुताबिक, अधिकारियों को स्थिति पर रोजाना नजर रखने, जल उपलब्धता को लेकर संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखने और लोगों को कम से कम असुविधा हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
लंबे समय के समाधान पर भी जोर
बैठक में हरियाणा से पाइपलाइन के जरिए पानी लाने की संभावना, वजीराबाद के पास यमुना में ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग, नए जल शोधन संयंत्रों की स्थापना और यमुना खादर क्षेत्र में अतिरिक्त बोरवेल विकसित करने जैसे प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई. इसके अलावा, उपचारित पानी के उपयोग को बढ़ावा देने, रेन वाटर हार्वेस्टिंग ढांचे विकसित करने और जल संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता अभियान चलाने की योजना पर भी चर्चा हुई.
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