Water Crisis Singrauli: मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले को देश की “ऊर्जा राजधानी” कहा जाता है, लेकिन इसी जिले के खैराही गांव की तस्वीरें विकास के दावों पर गहरे सवाल खड़ा करती हैं. यहां के ग्रामीण आज भी पीने के साफ पानी के लिए तरस रहे हैं और नदी किनारे खुदे गड्ढों से निकलने वाले पानी पर निर्भर हैं. गर्मी के इस मौसम में हालात और भी भयावह हो गए हैं, जहां इंसान और जानवर एक ही स्रोत से पानी पीने को मजबूर हैं. यह स्थिति न सिर्फ जल संकट की गंभीरता को दर्शाती है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की भी कहानी बयां करती है.
नदी सूखी, गड्ढों से निकल रहा जीवन
खैराही गांव में बहने वाली नदी का जलस्तर लगातार गिर चुका है और कई हिस्सों में पानी पूरी तरह सूख गया है. ऐसे में ग्रामीण नदी के बीच गड्ढे खोदकर उसमें रिसने वाले पानी को इकट्ठा कर रहे हैं. यही पानी अब उनके जीवन का मुख्य आधार बन चुका है. यह पानी न सिर्फ पीने के काम आता है, बल्कि घरेलू उपयोग और अन्य आवश्यकताओं के लिए भी यही एकमात्र विकल्प बचा है.
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Singrauli Water Crisis: सिंगरौली में जल संकट
हर दिन पानी की जंग
गांव के लोगों की दिनचर्या पूरी तरह पानी की तलाश के इर्द-गिर्द घूमती है. सुबह होते ही महिलाएं और बच्चे नदी किनारे पहुंच जाते हैं और गड्ढों से पानी भरकर घर ले जाते हैं. स्थानीय निवासी ललन सिंह बताते हैं कि वे बचपन से इसी नदी के पानी पर निर्भर हैं और आज तक गांव में पानी का कोई स्थायी स्रोत उपलब्ध नहीं हुआ है. गांव में 100 से अधिक परिवार इसी व्यवस्था पर निर्भर हैं.

Singrauli Water Crisis: देश की ऊर्जाधानी में पानी की किल्लत
इंसान और जानवर एक ही पानी पर निर्भर
इस संकट की सबसे चिंताजनक तस्वीर तब सामने आती है, जब एक ही गड्ढे से इंसान और पशु पानी पीते नजर आते हैं. एक तरफ महिलाएं बर्तन भर रही होती हैं, वहीं दूसरी तरफ मवेशी उसी पानी में उतरकर अपनी प्यास बुझाते हैं. ऐसे में पानी की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

Singrauli Water Crisis: पानी की परेशानी
गर्मी बढ़ते ही और गंभीर होता संकट
गर्मी के दिनों में जल संकट और गहरा जाता है. जलस्तर और नीचे चला जाता है, जिससे गड्ढों में पानी भरने में भी अधिक समय लगता है. इससे सबसे ज्यादा समस्या बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ती है. कई बार उन्हें घंटों तक पानी के लिए इंतजार करना पड़ता है.
ग्रामीणों का आरोप, नहीं मिला स्थायी समाधान
गांव के लोगों का कहना है कि वे कई बार इस समस्या को लेकर अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला. ग्रामीणों का आरोप है कि केवल आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ.
सरपंच ने भी मानी समस्या
खैराही गांव के सरपंच मुस्ताक अहमद अंसारी ने भी पानी की समस्या को स्वीकार किया है. उन्होंने बताया कि गांव में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है और इसके समाधान के लिए कई बार विधायक से बजट की मांग की गई है. सर्वे भी किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई योजना धरातल पर लागू नहीं हो सकी है.

Singrauli Water Crisis: पेयजल की समस्या
विकास के दावों पर सवाल
सिंगरौली जिले को जहां देश की ऊर्जा राजधानी कहा जाता है, वहीं इस गांव की स्थिति यह दर्शाती है कि बुनियादी सुविधाएं अब भी लोगों तक नहीं पहुंच पाई हैं. स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता का अभाव प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.
कब मिलेगी राहत?
खैराही गांव के लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद अब प्रशासन और सरकार से है. ग्रामीण चाहते हैं कि उन्हें जल्द से जल्द साफ पानी की सुविधा मिले, ताकि उन्हें गंदे पानी पर निर्भर न रहना पड़े. यह ग्राउंड रिपोर्ट सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन तमाम ग्रामीण इलाकों की सच्चाई को उजागर करती है, जहां अब भी मूलभूत सुविधाएं पहुंचना बाकी हैं.
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