- गुवाहाटी को प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ने की मंजूरी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दी है
- चिकन नेक कॉरिडोर पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे बड़ी चुनौती वाला क्षेत्र है
- बुलेट ट्रेन के लिए अलग और समर्पित रेल कॉरिडोर बनाना होगा, मौजूदा रेलवे ट्रैक पर संचालन संभव नहीं है
देश के महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन नेटवर्क को पूर्वोत्तर भारत तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि गुवाहाटी को प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ने को मंजूरी मिल गई है. हालांकि उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पहला चरण है और आगे कई तकनीकी व निर्माण संबंधी चुनौतियों का समाधान करना होगा.
'चिकन नेक' कॉरिडोर सबसे बड़ी चुनौती
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी "चिकन नेक" क्षेत्र होगा. यह वही संकरा हिस्सा है जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है. उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर इसकी चौड़ाई करीब 22 किलोमीटर है जबकि कुछ हिस्सों में यह केवल 16 किलोमीटर तक रह जाती है.
अलग ट्रैक पर दौड़ेगी बुलेट ट्रेन
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि बुलेट ट्रेन मौजूदा रेलवे ट्रैक पर नहीं चल सकती. इसके लिए पूरी तरह से अलग और समर्पित रेल कॉरिडोर बनाना होगा. उन्होंने कहा कि पहले से मौजूद राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे लाइन के कारण यह तय करना होगा कि बुलेट ट्रेन लाइन जमीन के ऊपर बनाई जाए या फिर भूमिगत मार्ग अपनाया जाए.
तकनीक और लागत दोनों होंगी बड़ी
सरमा के अनुसार "चिकन नेक" जैसे संवेदनशील इलाके में बुलेट ट्रेन लाइन बिछाने के लिए विशेष तकनीक की जरूरत होगी. उन्होंने कहा कि यदि यहां अंडरग्राउंड या विशेष संरचना विकसित करनी पड़ी तो परियोजना की लागत सामान्य रेल परियोजनाओं की तुलना में दो से तीन गुना तक बढ़ सकती है.
पीएम मोदी के विजन का हिस्सा
मुख्यमंत्री ने बताया कि शुरुआत में इस प्रस्ताव को लेकर कुछ कठिनाइयां थीं. बाद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से चर्चा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध के बाद गुवाहाटी को प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क में शामिल करने की मंजूरी मिली. उन्होंने इसे असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक फैसला बताया. हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि फिलहाल मंजूरी मिलना पहला कदम है. अब परियोजना के लिए विस्तृत सर्वे, तकनीक का चयन, रूट तय करना और निर्माण रणनीति तैयार की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली दौरे के दौरान वह रेल मंत्री से मुलाकात कर परियोजना की तकनीकी जानकारी और प्रस्तावित रूट पर विस्तायह भी पढ़ें |
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