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दिल्ली दंगा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को अंतरिम जमानत दी

दिल्ली पुलिस की ओर से ASG एसवी राजू ने दलील दी कि UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत के कड़े प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही बरकरार रख चुका है. उन्होंने कहा कि केवल ट्रायल में देरी के आधार पर हर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती.

दिल्ली दंगा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को अंतरिम जमानत दी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामले में दो आरोपियों को UAPA मामले में अंतरिम जमानत दी.
  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा बड़ी साजिश मामले के आरोपियों तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को अंतरिम जमानत दे दिया.
  • दोनों आरोपी 2020 से UAPA के तहत जेल में बंद हैं और उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई.
  • कोर्ट ने UAPA की कड़ी जमानत धारा और गवाहों की संख्या को ध्यान में रखते हुए सुनवाई के अंत में अंतरिम जमानत दी.
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को अंतरिम जमानत दे दी. दोनों 2020 से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत जेल में बंद हैं. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने दोनों आरोपियों की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के पिछले साल दिए गए जमानत खारिज करने के फैसले को चुनौती दी थी.

खालिद सैफी को इस बात पर मिली जमानत

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल(ASG) एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत दिए जाने का विरोध नहीं किया. हालांकि, उन्होंने UAPA मामलों में लंबी सुनवाई के आधार पर जमानत देने को लेकर अलग-अलग फैसलों के मुद्दे को बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग की. खालिद सैफी की ओर से वरिष्ठ वकील रिबैका एम जॉन ने कहा कि उनके खिलाफ मुख्य सबूत CAA विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कुछ व्हाट्सऐप ग्रुप चैट हैं. उन्होंने कहा कि सैफी पर गुलफिशां फातिमा, नताशा नरवाल और देवांगना कलिता के सहयोगी होने का आरोप है, जबकि इन सभी को पहले ही जमानत मिल चुकी है. इसलिए समानता के आधार पर सैफी को भी राहत दी जानी चाहिए.

UAPA में जमानत पर हुई जोरदार बहस

वहीं तस्लीम की ओर से वकील महमूद प्राचा ने कहा कि उनके मुवक्किल की भूमिका बहुत मामूली बताई गई है. दिल्ली पुलिस की ओर से ASG एसवी राजू ने दलील दी कि UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत के कड़े प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही बरकरार रख चुका है. उन्होंने कहा कि केवल ट्रायल में देरी के आधार पर हर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती. उन्होंने हाल के सैयद इफ्तिकार अंद्राबी फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसमें आरोपी की भूमिका पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया.

हाफिज सईद और कसाब का दिया उदाहरण

राजू ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी मामले में बड़ी संख्या में गवाह हों, तो सिर्फ देरी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती. उन्होंने कहा, 'मान लीजिए, अगर देरी अभियुक्त की वजह से हुई हो? अजमल कसाब मामले में, गवाहों की संख्या बहुत ज़्यादा थी तो क्या आप सिर्फ़ देरी के आधार पर उसे ज़मानत दे देंगे? अगर हाफ़िज़ सईद को पाकिस्तान से लाया जाता है, तो क्या आप सिर्फ़ देरी के आधार पर उसे ज़मानत दे देंगे? ASG ने यह दलील देते हुए कहा कि अंद्राबी को बिना सोचे-समझे, सिर्फ़ देरी के आधार पर ज़मानत दे दी गई. सुनवाई के अंत में कोर्ट ने सैफी और तस्लीम को जमानत दे दी. 

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