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ट्रेन में 'भरोसा' जीतकर बैंक खाता किया साफ, रोहिणी साइबर सेल ने 2 भाइयों को दबोचा, सिम स्वैपिंग से की थी ठगी

एडिशनल सीपी राजीव रंजन ने जानकारी दी कि आरोपी ने भरोसा जीतकर मां-बेटे काफोन मांगा और उसने चुपके से सिम पोर्ट करने का रिक्वेस्ट डाला और यूपीसी (UPC) कोड नोट कर लिया. इसी कोड का इस्तेमाल कर उसने अपने भाई के नाम पर पीड़िता के नंबरों वाले नए सिम कार्ड निकलवा लिए. 

ट्रेन में 'भरोसा' जीतकर बैंक खाता किया साफ, रोहिणी साइबर सेल ने 2 भाइयों को दबोचा, सिम स्वैपिंग से की थी ठगी
  • दिल्ली पुलिस की रोहिणी साइबर सेल ने सिम स्वैपिंग और पोर्टिंग से ठगी करने वाले दो भाइयों को गिरफ्तार किया.
  • शिकायतकर्ता वंदना गुप्ता ने ट्रेन सफर में एक शख्स से मोबाइल लेकर कोड चोरी की वारदात की जानकारी दी.
  • चोरी के कोड से आरोपी ने पीड़िता के नंबर पर नया सिम एक्टिवेट कर क्रेडिट कार्ड के जरिए पैसे ट्रांसफर किए.
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दिल्ली पुलिस की रोहिणी साइबर सेल टीम ने सिम स्वैपिंग और पोर्टिंग के जरिए ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस मामले में दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है, जो सफर के दौरान लोगों का भरोसा जीतकर उनके मोबाइल फोन से कोड चुरा लेते थे और बाद में उनके बैंक खातों से ट्रांजैक्शन कर लेते थे.

एडिशनल सीपी रोहिणी ने जानकारी दी कि यह मामला सेक्टर-6, रोहिणी की रहने वाली वंदना गुप्ता की शिकायत पर दर्ज किया गया. वंदना जनवरी में अपने बेटे के साथ कानपुर से दिल्ली लौट रही थीं. ट्रेन में उनकी मुलाकात सचिन गुप्ता नाम के व्यक्ति से हुई, जिसने बातों-बातों में उनका भरोसा जीत लिया. सफर के दौरान सचिन ने जरूरी कॉल करने के बहाने वंदना और उनके बेटे के मोबाइल फोन मांगे और कुछ देर बाद उन्हें वापस कर दिया. 

एडिशनल सीपी रोहिणी ने बताया कि ​पीड़िता को ठगी का एहसास तब हुआ जब 23 जनवरी को अचानक उनके और उनके बेटे के मोबाइल नंबर बंद Deactivate हो गए. इसके कुछ दिनों बाद, 30 जनवरी 2026 को उनके क्रेडिट कार्ड से धोखे से तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन भी हो गए:- 

  • ​पहला ट्रांजैक्शन: ₹20,550/-
  • ​दूसरा ट्रांजैक्शन: ₹2,627/-
  • ​तीसरा ट्रांजैक्शन: ₹25,687/- 

रोहिणी साइबर थाने में FIR दर्ज कर जांच शुरू की

​जब वंदना को पता चला कि वे साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुकी हैं, तो उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद रोहिणी साइबर थाने में FIR दर्ज कर जांच शुरू की. एडिशनल सीपी ​ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए ​एसीपी ईश्वर सिंह ने इंस्पेक्टर प्रवीण चौहान के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी जांच की. पुलिस ने पैसों के लेन-देन मनीट्रेल की जांच के दौरान पाया कि चोरी किए गए ₹20,000 आरोपी नितिन के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में भेजे गए थे और उसी दिन एटीएम से निकाल लिए गए.  

जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने बुराड़ी के नत्थूपुरा में छापेमारी कर दोनों भाइयों—26 साल सचिन कुमार गुप्ता और 23 साल के नितिन कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया. एडिशनल सीपी ने बताया कि  ​आरोपी सचिन कुमार पहले एक नामी मोबाइल स्टोर में काम कर चुका था, इसलिए उसे सिम पोर्टिंग की बारीकियों का पता था. 

आरोपी ने कैसे कोड चोरी की - 
एडिशनल सीपी राजीव रंजन ने जानकारी दी कि आरोपी ने भरोसा जीतकर मां-बेटे काफोन मांगा और उसने चुपके से सिम पोर्ट करने का रिक्वेस्ट डाला और यूपीसी (UPC) कोड नोट कर लिया. इसी कोड का इस्तेमाल कर उसने अपने भाई के नाम पर पीड़िता के नंबरों वाले नए सिम कार्ड निकलवा लिए. 

​एडिशनल सीपी राजीव रंजन ने आगे बताया कि नया सिम एक्टिवेट होते ही उसने 'CRED' ऐप इंस्टॉल किया, जहाँ पुराने सिम की वजह से उसे ओटीपी (OTP) के जरिए क्रेडिट कार्ड का पूरा एक्सेस मिल गया और उसने पैसे ट्रांसफर कर लिए.  ​दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल एक मोटोरोला मोबाइल फोन और कोटक महिंद्रा बैंक का एटीएम कार्ड बरामद किया है.  दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस फ्रॉड का मास्टरमाइंड सचिन बीएससी  ड्रॉपआउट है और Uber में काम करता था, जबकि उसका भाई नितिन बी.कॉम  ग्रेजुएट है और एक शोरूम में नौकरी करता था.
 

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