Lawrence Bishnoi: खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर और गैंगस्टर अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डाला के बीच संबंधों को लेकर दिल्ली पुलिस की एक चार्जशीट में अहम दावे किए गए हैं. स्पेशल सेल की इस चार्जशीट के अनुसार, अर्श डाला वर्ष 2017 में जेल से बाहर आने के बाद हरदीप सिंह निज्जर के प्रभाव में आया और फिर भारत छोड़कर कनाडा चला गया. जांच एजेंसियों का दावा है कि कनाडा पहुंचने के बाद उसने वहीं से अपना नेटवर्क खड़ा किया और भारत में आपराधिक गतिविधियों को संचालित करना शुरू कर दिया.
अमेरिकी चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई का नाम
इस बीच अमेरिकी न्याय विभाग ने लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ दाखिल चार्जशीट को सार्वजनिक किया है. दस्तावेज में दावा किया गया है कि जून 2023 में कनाडा के सरे शहर में मारे गए हरदीप सिंह निज्जर की हत्या लॉरेंस बिश्नोई के निर्देश पर कराई गई. यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि निज्जर की हत्या के बाद तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों पर गंभीर आरोप लगाए थे. अब अमेरिकी दस्तावेज में पहली बार लॉरेंस बिश्नोई का नाम सामने आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है. हालांकि इन आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है.
KTF और ISI के गठजोड़ की जांच
दिल्ली पुलिस की जांच के अनुसार, बाद में अर्श डाला को प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का कमांडर-इन-चीफ बनाया गया. चार्जशीट में दावा किया गया है कि KTF को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन हासिल था. जांच एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान में बैठे हैंडलर भारत में सक्रिय नेटवर्क तक हथियार, गोला-बारूद, डेटोनेटर और विस्फोटक पहुंचाने का काम करते थे. इसके लिए सीमा क्षेत्रों, सुरंगों और विशेष रूप से ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता था.
ड्रग्स, हथियार और आतंकवाद का नेक्सस
जांच में यह भी सामने आया कि पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए सिर्फ हथियार ही नहीं बल्कि हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थ भी भेजे जाते थे. एजेंसियों का कहना है कि इन ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों, हथियारों की खरीद और गैंगस्टर नेटवर्क को मजबूत करने में किया जाता था. इसी वजह से जांच एजेंसियां इसे ड्रग्स, हथियार और आतंकवाद के संगठित गठजोड़ के रूप में देख रही हैं.
गैंगस्टरों के जरिए नेटवर्क बढ़ाने की रणनीति
चार्जशीट के मुताबिक जब कई पुराने खालिस्तानी आतंकी निष्क्रिय हो गए या जेल पहुंच गए तब संगठनों ने रणनीति बदल दी. स्थानीय गैंगस्टरों, जेलों में बंद अपराधियों और फरार बदमाशों को नेटवर्क से जोड़ा जाने लगा. उन्हें विदेशी हथियार, आधुनिक पिस्तौल, विस्फोटक और पैसे का लालच देकर भर्ती किया जाता था. बदले में उनसे रंगदारी वसूली, टारगेट किलिंग और नए लोगों की भर्ती जैसे काम कराए जाते थे.
देश की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती
दिल्ली पुलिस का दावा है कि अर्श डाला कनाडा में बैठकर पंजाब, दिल्ली और अन्य राज्यों की जेलों में बंद अपराधियों के संपर्क में रहता था. जांच एजेंसियों के अनुसार उसका नेटवर्क युवाओं को अपने साथ जोड़ने, हथियार उपलब्ध कराने और आर्थिक मदद देने का काम करता था. अधिकारियों का कहना है कि उत्तर भारत के कई आपराधिक गिरोह भी इस नेटवर्क के जरिए एक-दूसरे से जुड़े हुए थे. एजेंसियों के मुताबिक आतंकवाद, संगठित अपराध और नशीले पदार्थों का यह गठजोड़ देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है और इसे तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है.
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