- दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को कॉकरोज जनता पार्टी के प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी, SC को बताया
- 10 अक्टूबर को इजाजत देते तो 20 जुलाई से बुरे हालात होते: दिल्ली पुलिस कमिश्नर
- 6 से 8 अक्टूबर तक लगातार प्रदर्शनों ने मध्य दिल्ली में यातायात पूरी तरह जाम कर दिया था
10 अक्टूबर को इजाजत देते तो दिल्ली में 20 जुलाई से बुरे हालात होते... दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी गई? उन्होंने कहा कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा, अभिजीत दीपके और सौरभ दास समेत अन्य सीजेपी नेता अपने समर्थकों को नियंत्रित करने में विफलता और 6 से 8 अक्टूबर के लगातार प्रदर्शनों के कारण मध्य दिल्ली में पैदा हुई गंभीर यातायात समस्या को देखते हुए अनुमति देने से इनकार किया गया था. ऐसी आशंका थी कि अगर 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन की इजाजत दे देते, तो हालात 20 जुलाई से भी खराब हो सकते थे.
पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने कहा कि राष्ट्रपति भवन, संसद, सुप्रीम कोर्ट, विभिन्न दूतावासों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की मौजूदगी के कारण मध्य दिल्ली अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है. यहां सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम करने पड़ते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है. दिल्ली पुलिस की ओर से हलफनामे में कहा गया है, "कोई भी पुलिस प्रशासन राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन की अनुमति नहीं दे सकता. खासतौर से तब, जब किसी ऐसे संगठन ने प्रदर्शन का आह्वान किया हो जिसका इतिहास भीड़ की हिंसा, कई लोगों के घायल होने और 6, 7 तथा 8 अक्टूबर की घटनाओं से जुड़ा हो."
प्रदर्शनों से सेंट्रल दिल्ली में लगा जाम
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि 6 से 8 अक्टूबर तक हुए लगातार प्रदर्शनों के कारण मध्य दिल्ली के इलाके पूरी तरह जाम हो गए थे. कई घंटों तक यातायात बाधित रहा, जिससे छात्रों और आम नागरिकों को परेशानी हुई. कई लोग ट्रैफिक जाम में फंस गए और उनकी ट्रेनें तथा उड़ानें छूट गईं.
पुलिसकर्मियों से बदसलूकी और हिंसा का आरोप
10 अक्टूबर के उस प्रदर्शन का जिक्र करते हुए, जिसकी अनुमति नहीं दी गई थी, पुलिस कमिश्नर ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ आक्रामक थी. उनके अनुसार, कुछ लोग कथित तौर पर ‘फ्रीलांस पत्रकारिता' की आड़ में पुलिसकर्मियों को शारीरिक रूप से परेशान कर रहे थे. कुछ उपद्रवियों ने महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया. इन घटनाओं में एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा किया गया है. उन्होंने कहा कि निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद लोगों ने अवैध रूप से एकत्र होने की कोशिश की. सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के अनुसार, पुलिस ने ऐसे लोगों को प्रदर्शन स्थल से हटाया. दिल्ली पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों ने उन बसों के टायरों को पंचर कर दिया, जिनमें उन्हें ले जाया जा रहा था, और बसों के शीशे भी तोड़ दिए.

प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं, सिर्फ सूचना दी गई थी!
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि कॉकरोज जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को प्रदर्शन आयोजित करने के लिए औपचारिक अनुमति नहीं मांगी थी, बल्कि पुलिस को केवल इसकी सूचना दी थी. उन्होंने बताया कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर एहतियाती कदम उठाए गए थे, क्योंकि अनुमति नहीं मिलने के बावजूद जंतर-मंतर पर लोगों के जुटने और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकट पैदा करने की आशंका थी.
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हिरासत में लिए गए लोगों को कुछ घंटों बाद छोड़ा गया
हलफनामे में कहा गया है कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर प्रदर्शन करने की कोशिश में हिरासत में लिए गए सभी लोगों को कुछ घंटों बाद रिहा कर दिया गया था. उन्हें अस्थायी केंद्रों में रखा गया था, पुलिस लॉकअप में नहीं. पुलिस ने उन्हें गर्म और ताजा भोजन उपलब्ध कराया. इसके साथ ही हिरासत की आवश्यकता समाप्त होने पर जाने की अनुमति दे दी थी. पुलिस कमिश्नर के अनुसार, अवैध प्रदर्शन स्थल से हटाए गए राजनीतिक नेताओं से संबंधित थानाध्यक्षों (SHO) के कक्षों में बैठने का अनुरोध किया गया. उन्हें चाय, कॉफी, भोजन और अन्य जलपान उपलब्ध कराया गया. पुलिस ने उनके पद और गरिमा का पूरा सम्मान किया गया.
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