- MCD के कई जोन में DC प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों को नियुक्त किया गया है, जिनकी जवाबदेही में समस्या है.
- शाहदरा जोन के पूर्व डीसी अभिषेक मिश्रा को घूस लेते सीबीआई ने गिरफ्तार किया था, जिससे निगम की किरकिरी हुई थी.
- प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी अधिकतम तीन साल के लिए नगर निगम में रहते हैं, लेकिन कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है.
दिल्ली के सत्य निकेतन में एक PG की बिल्डिंग गिरने अब अधिकारियों के ऊपर कई सवाल उठ रहे हैं. बिहार कॉडर के IAS अधिकारी और डेपुटेशन पर दिल्ली नगर निगम के दक्षिणी जोन की डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार सस्पेंड कर दिए गए. इससे पहले शाहदरा जोन के DC अभिषेक मिश्रा को 4 लाख रुपए घूस लेते सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. सेना में अधिकारी रहे अभिषेक मिश्रा भी प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली नगर निगम में आए थे. फिर घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने पर निगम की किरकिरी के कारण बने थे.
सवाल ये उठता है कि दिल्ली नगर निगम डेपुटेशन यानि प्रतिनियुक्ति के लिए फेवरेट क्यों बना हुआ है? NDTV ने जब पड़ताल की तो पाया कि दिल्ली नगर निगम के 11 ज़ोन के डीसी यानि डिप्टी कमिश्नर में से 6 ज़ोन में प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों को डिप्टी कमिश्नर बनाया गया है. प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली नगर निगम में लगे डीसी कोई Indian ordinance factories services से लेकर इंडियन डिफेंस एंकाउंटर सर्विस और IPS तक हैं. यही नहीं दिल्ली नगर निगम के ज़ोन में तैनात 6 अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर में से दो प्रतिनियुक्ति पर आए हैं. वर्तमान में IPS से लेकर IOFS और मिलिट्री सर्विसेज तक से निगम में डीसी बने हैं.
NDTV ने जब पड़ताल की तो पाया कि दिल्ली नगर निगम के सेंट्रल जोन के डीसी सचिन गुप्ता हैं, जो पंजाब कॉडर के IPS अधिकारी हैं. रोहिणी जोन के डीसी अंशुल सिरोही IOFS कॉडर यानि इंडियन आर्डिनेंस फैक्ट्रीज सर्विस से हैं, जबकि केशव पुरम जोन के डीसी मोहित बंसल ITS कॉडर यानि इंडियन ट्रेड सर्विसेज से आते हैं. सिविल लाइंस ज़ोन के डीसी शशि प्रताप का ताल्लुक़ इंडियन डिफेंस अकाउंट सर्विस से है. निगम के पश्चिमी ज़ोन के डीसी विनोद अत्री मिलिट्री आफिसर से प्रतिनियुक्ति होकर निगम में तैनात हैं.
नगर निगम में 609 गाड़ियां गायब
वहीं, दक्षिणी जोन के पूर्व डीसी राकेश कुमार सिंह भी बिहार कॉडर से प्रतिनियुक्ति पर नगर निगम में आए थे. दिल्ली नगर निगम के पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल जिनकी शिकायत पर शाहदरा के पूर्व डीसी अभिषेक मिश्रा पकड़े गए थे.. श्याम सुंदर ने एनडीटीवी से बात करके बताया कि जब अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर आता है तो कुछ साल काम करके वापस अपने कॉडर लौट जाता है, ऐसे में जवाबदेही तय करने में मुश्किल आती है. एनडीटीवी ने जब उनसे पूछा कि क्या प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों को नियुक्त करने में मेयर की भी भूमिका रहती है. उन्होंने कहा कि इसमें कोई भूमिका मेयर की नहीं होती है. कई बार अधिकारी नियुक्त होने पर औपचारिक मुलाकात करने आ जाते हैं. उन्होंने कहा कि नगर निगम में 609 गाड़ियां गायब हो गई. लेकिन अब तक किसी कि भी ज़िम्मेदारी नहीं फ़िक्स की गई.
प्रतिनियुक्ति के लिए क्या नियम हैं ?
मूल कॉडर से प्रतिनियुक्त होने वाला अधिकारी अधिकतम 3 साल के लिए डेपुटेशन पर आता है. लेकिन सरकार चाहे तो उसका कार्यकाल बढ़ा सकती है. लेकिन प्रतिनियुक्त पर आने के लिए मूल संस्थान से NOC लेनी होती है, जहां वो प्रतिनियुक्ति पर जाता है वो विभाग अधिकारी को लेने को तैयार होता है तभी किसी अधिकारी की प्रतिनियुक्ति होती है. जाहिर सी बात है कि दिल्ली नगर निगम भी इन अधिकारियों को लेना चाहता था, तभी उन अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति मिली है.
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