- मालवीय नगर में संचालित यह होटल अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के बिना संचालित किया जा रहा था.
- इमारत में प्रवेश और निकास का केवल एक ही द्वार था, खिड़कियां स्थायी रूप से सील थीं, मेन गेट सेंसर वाला था.
- होटल को केवल छह कमरों की अनुमति थी, लेकिन वह 25 कमरे का उपयोग कर रहा था. तहखाने में भी कमरे बनाए गए थे.
Delhi Malviya Nagar Hotel Fire: बीते कुछ दिनों में आग की घटनाएं काफी बढ़ गई है. बुधवार को दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके की एक तंग गली में चल रहे होटल में भीषण आग लग गई. जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई. वहीं गुरुवार सुबह-सुबह बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक निजी हॉस्पिटल के ICU में आग लगने की घटना सामने आई. जिसमें कई लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है. दिल्ली के होटल में लगी आग को लेकर कई गंभीर लापरवाही भी सामने आई है. जिसके बाद होटल के मालिक लवकेश बजाज को पुलिस ने हिरासत में लिया है.
सामने आई जानकारी के अनुसार मालवीय नगर में संचालित यह होटल अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के बिना संचालित किया जा रहा था. जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई. इनमें 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं.
फ्लोरिश स्टे बी एंड बी होटल में लगी आग
मालवीय नगर के हौज रानी स्थित ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी' में सुबह करीब 8:30 बजे आग लगी और देखते ही देखते पूरी इमारत में फैल गई, जिससे लोग स्तब्ध रह गए. कई स्थानीय लोगों सहित बचावकर्मी पांच मंजिला संकरी इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए मौके पर पहुंचे. घटना के समय इमारत में कई लोग सो रहे थे.
तंग सीढ़ियां, कोई खिड़की नहीं... आज सुबह के इस वीडियो ने खोले मालवीय नगर होटल के राज
#WATCH दिल्ली: वीडियो मालवीय नगर इलाके में स्थित 'होटल फ्लोरिश स्टेज़' के अंदर के की है, जहां भीषण आग लगने से 21 लोगों की जान चली गई। pic.twitter.com/ufef7iu9uj
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 4, 2026
होटल में एंट्री और एग्जिट के लिए एक ही गेट था
अधिकारियों ने बताया कि इमारत में प्रवेश और निकास का केवल एक ही द्वार था, खिड़कियां स्थायी रूप से सील थीं और मुख्य द्वार सेंसर से संचालित होता था. इन सभी कारकों से मिलकर इमारत एक तरह से मौत का जाल बन गई थी. अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 58 लोगों को होटल से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां 21 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया. मृतकों में 9 भारतीय शामिल हैं.

होटल में मानकों का नहीं रखा गया था ध्यान
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली सरकार की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट' नीति के तहत होटल को केवल छह कमरों की अनुमति थी, लेकिन वह 25 कमरे का उपयोग कर रहा था. तहखाने में भी कमरे बनाए गए थे. इमारत के भूतल पर एक रेस्तरां था, जबकि तहखाने और ऊपरी मंजिलों का उपयोग होटल के रूप में किया जा रहा था.
आग से बचने के लिए लोगों ने छत से लगाई थी छलांग
एम्स दिल्ली ने हादसे में घायल लोगों को लेकर बताया कि एम्स ट्रॉमा सेंटर में कुल 13 लोगों को लाया गया था. इनमें तीन लोग ऐसे थे जिन्होंने आग से बचने के लिए होटल की ऊंचाई से छलांग लगा दी थी. अस्पताल के अनुसार, ऊंचाई से गिरने वाले तीन घायलों में से दो को फ्री कर दिया गया. दोनों की हालत स्थिर बताई गई है. वहीं, गंभीर सिर की चोट से पीड़ित एक महिला का ऑपरेशन किया गया है और उसकी स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है.

बचाव अभियान में लगे 10 पुलिसकर्मी भी हुए घायल
एम्स ने यह भी बताया कि ट्रॉमा सेंटर में भर्ती 13 घायलों में से 10 दिल्ली पुलिसकर्मी थे, जो बचाव अभियान में शामिल थे. ये पुलिसकर्मी सबसे पहले जलती हुई इमारत में दाखिल हुए थे और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने में जुटे थे. सभी पुलिसकर्मियों की हालत स्थिर है और उन्हें जल्द छुट्टी दी जा सकती है. अस्पताल को तीन अज्ञात शव भी मिले हैं, जिन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भेजा गया है.
सुबह लगी थी आग, 21 की मौत, 47 लोगों को बचाया गया
गौरतलब है कि बुधवार सुबह करीब 8:50 बजे होटल के बेसमेंट में संचालित एक रेस्तरां से आग लगने की आशंका जताई जा रही है. देखते ही देखते आग पूरी बहुमंजिला इमारत में फैल गई. बचाव दलों ने 47 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन 21 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी.
मृतकों में लाइबेरिया, नाइजीरिया और बांग्लादेश के भी नागरिक
अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों में लाइबेरिया, नाइजीरिया, मोजाम्बिक और बांग्लादेश के नागरिक भी शामिल हैं. दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा और आपदा प्रबंधन टीमों ने कई घंटों तक राहत एवं बचाव अभियान चलाया, जो दोपहर के आसपास पूरा हुआ. अब होटल मालिक की हिरासत के बाद जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या होटल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी और क्या लापरवाही के कारण यह हादसा इतना भयावह रूप ले सका.
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