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दिल्ली में अनु ग्रोवर बलीगा देखेंगी पेपर लीक के मामले, हाई कोर्ट ने बनाया फास्ट ट्रैक कोर्ट का जज

दिल्ली हाई कोर्ट ने पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में एक फास्ट ट्रैक अदालत का गठन किया है. तीस हजार कोर्ट की मध्यस्थता केंद्र की प्रभारी जज अनु ग्रोवर बलीगा को इसका जज नियुक्त किया गया है. इसका आदेश गुरुवार को जारी हुआ.

दिल्ली में अनु ग्रोवर बलीगा देखेंगी पेपर लीक के मामले, हाई कोर्ट ने बनाया फास्ट ट्रैक कोर्ट का जज
नई दिल्ली:

पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले करीब एक महीने से प्रदर्शन हो रहा है. इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने पेपर लीक से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन की घोषणा की है. इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस अनु ग्रोवर बलीगा को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए राउज एवेन्यू परिसर में एक विशेष फास्ट ट्रैक अदालत का जज नामित किया है. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने गुरुवार शाम इससे संबंधित आदेश जारी किया. बालिगा इस समय तीस हजार कोर्ट के मध्यस्थता केंद्र की प्रभारी जज हैं. 

बलीगा का नया पद ''विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) (सीबीआई)-25, विशेष रूप से नामित फास्ट ट्रैक कोर्ट'' होगा. यह अदालत सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और उससे जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी. यह अदालत दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर से चलेगी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने यह अधिसूचना ऐसे समय जारी की है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह पेपर लीक के मामलों में शामिल लोगों को जल्द और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने की घोषणा की. विशेष अदालतें बनाने का फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब देश भर में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है. छात्र और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ता भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं. 

कौन हैं अनु ग्रोवर बालिगा 

साल 1969 में पैदा हुईं जस्टिस बलीगा ने 2000 में दिल्ली न्यायिक सेवा (डीजेएस) के लिए चुनी गई थीं. उन्होंने तीस हजारी अदालत में सिविल न्यायाधीश के रूप में अपना करियर शुरू किया. उन्होंने 2010 में दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा (डीजेएचएस) में शामिल हुईं. इसके तहत उन्हें द्वारका में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश बनाया गया था. इस समय वो डीजेएचएस की वरिष्ठ सदस्य हैं. वो 2029 में रिटायर हो जाएंगी. 

इस समय वह तीस हजारी कोर्ट के मध्यस्थता केंद्र की प्रभारी जज हैं. अब विशेष सीबीआई जज के रूप में 2026 के नीट लीक से संबंधित मामलों की सुनवाई करेंगी. वह 2022 में राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष सीबीआई जज के रूप में काम कर चुकी हैं. उनका कार्यकाल चार महीने का था. 

उनका तबादला दिसंबर 2025 में तीस हजारी कोर्ट कर दिया गया था. उन्होंने साकेत के कॉमर्शियल कोर्ट के जिला जज के रूप में काम किया. बलीगा को मामलों को तेजी से निपटाने वाली जज के रूप में जाना जाता है. दिल्ली हाई कोर्ट की बेवसाइट के मुताबिक उन्होंने एक महीने में 18 मामलों का निपटारा कर दिया था. 

जज के रूप में अपने अब तक के करियर में जस्टिस बलीगा ने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं. इनमें सबसे अधिक चर्चा 2018में बलात्कार के एक मामले में दिए उनके फैसले की होती है. उन्होंने पर्याप्त सबूतों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया था. इस फैसले में उन्होंने कहा था कि कई महिलाएं आधुनिक सोच और पारंपरिक सामाजिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं. ऐसी स्थिति में कभी-कभी आपसी सहमति से बने संबंध भी बाद में बलात्कार के आरोपों में बदल जाते हैं.उन्होंने शिकायतकर्ता के प्रति सहानुभूति जताते हुए माना कि आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त कानूनी साक्ष्य मौजूद नहीं थे.

पेपर लीक के खिलाफ मोदी सरकार सख्त

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट की स्थापना 2019 में की गई थी. यह अदालत सांसदों-विधायकों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई के लिए की गई थी. यह अदालत उन  मामलों की सुनवाई करती है, जिसकी जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रही है. अब इसी अदालत परिसर में परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के प्रयोग से जुड़े मामलों की सुनवाई भी होगी. 

गुरुवार देर रात जारी एक वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा है कि परीक्षा की प्रश्नपत्रों के लीक होने पर रोक लगाने के लिए सरकार एक नया विधेयक लाने की तैयारी कर रही है. इसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट और अपराधियों के लिए कठोर दंड के प्रावधान शामिल होंगे. उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल शुक्रवार को इन कड़े उपायों पर चर्चा करेगा और सरकार अगले सप्ताह संसद में विधेयक पारित कराने का प्रयास करेगी.

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