- दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित जिमखाना क्लब को पब्लिक प्रेमिसेस एक्ट के तहत बेदखली का नोटिस दिया
- क्लब पर आरोप है कि वह नई दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जा बनाए हुए है
- केंद्र सरकार ने लीज खत्म होने के बाद भी क्लब के कब्जे को गैरकानूनी बताया और बेदखली की मांग की है
राजधानी दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित जिमखाना क्लब को एक और 'कारण बताओ' नोटिस मिला है. 27 एकड़ में फैले जिमखाना क्लब को यह नोटिस पब्लिक प्रेमिसेस एक्ट-1971 के तहत दिया गया है. नोटिस में क्लब से पूछा गया है कि उसके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न जारी किया जाए. यह नोटिस केंद्र सरकार की उस शिकायत के बाद जारी किया गया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि क्लब नई दिल्ली के 2, सफदरजंग रोड पर स्थित प्रॉपर्टी पर अनधिकृत रूप से कब्जा किए हुए है.
नोटिस में गैरकानूनी कब्जे की बात
लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) के जरिए जारी नोटिस के अनुसार, क्लब की हमेशा के लिए लीज कानूनी रूप से खत्म होने और सरकार द्वारा सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जमीन वापस लेने के बाद भी क्लब का प्रॉपर्टी पर कब्जा बनाए रखना 'पब्लिक प्रेमिसेस एक्ट 1971' की धारा 2(g) के तहत 'अनधिकृत कब्जे' की परिभाषा में आता है.
क्या है सरकार का पक्ष?
सरकार का कहना है कि भारत के राष्ट्रपति द्वारा हमेशा के लिए लीज डीड की धारा 4 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करने के बाद क्लब के पक्ष में लीज खत्म हो गई थी. यह धारा लीज देने वाले को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जरूरत पड़ने पर जमीन वापस लेने की अनुमति देती है. सरकार का कहना है कि एक बार लीज खत्म होने और प्रॉपर्टी वापस ले लिए जाने के बाद, क्लब का कब्जा बनाए रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रह गया और उसका कब्जा गैरकानूनी हो गया.
इसलिए, एस्टेट ऑफिसर ने दिल्ली जिमखाना क्लब से 7 जुलाई 2026 को या उससे पहले यह बताने को कहा है कि 'पब्लिक प्रेमिसेस एक्ट' के प्रावधानों के तहत उसके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न जारी किया जाए.
7 जुलाई को क्लब के अधिकारियों को होना है पेश
नोटिस में क्लब को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह 7 जुलाई 2026 को दोपहर 2:30 बजे एस्टेट ऑफिसर के सामने अपने पदाधिकारियों या विधिवत अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पेश हो. प्रतिनिधि को कार्यवाही से संबंधित सभी जरूरी सवालों के जवाब देने और अपने बचाव में क्लब द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी दस्तावेजी या मौखिक सबूत को पेश करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है. एस्टेट ऑफिसर ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर क्लब तय तारीख और समय पर पेश नहीं होता है या अपना जवाब दाखिल नहीं करता है, तो मामले का फैसला एकतरफा किया जा सकता है. इससे एस्टेट ऑफिसर क्लब का पक्ष सुने बिना ही उसे हटाने की कार्रवाई शुरू कर सकते हैं और उचित आदेश पारित कर सकते हैं.
सरकार का कहना है कि 27.3 एकड़ की यह प्रॉपर्टी राष्ट्रीय राजधानी के रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके में स्थित एक कीमती सरकारी जमीन है. इसकी जरूरत रक्षा बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सुरक्षा, प्रशासन के बुनियादी ढांचे और जनहित की अन्य परियोजनाओं को मजबूत करने के लिए है.
'सरकार को सौंपे प्रॉपर्टी'
सरकार ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि 22 मई 2026 के नोटिस के जरिए लीज खत्म होने के बाद, क्लब को 5 जून 2026 तक जगह का कब्जा शांतिपूर्वक सौंपने का निर्देश दिया गया था. आरोप है कि नोटिस के बावजूद क्लब ने प्रॉपर्टी खाली नहीं की और उस पर कब्जा बनाए रखा. सरकार ने क्लब को हटाने और जगह को वापस भारत सरकार को सौंपने की मांग की है.
क्लब ने मई में मिले बेदखली के नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. एस्टेट ऑफिसर के सामने अपनी शिकायत में केंद्र सरकार ने कहा कि हाई कोर्ट ने कब्जा लेने के खिलाफ रोक लगाने से इनकार कर दिया था और प्रॉपर्टी का कब्जा कानून के मुताबिक लिया जाएगा.
113 साल पुराना यह क्लब देश का सबसे खास क्लब है और इसके सदस्यों में चुनिंदा नौकरशाह, सैन्य अधिकारी, राजधानी के रसूखदार लोग और बुद्धिजीवी शामिल हैं. क्लब में 26 ग्रास टेनिस कोर्ट, चार हार्ड कोर्ट, फ्लेक्स-कुशन कोर्ट, स्क्वैश कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट, बिलियर्ड्स रूम, बास्केटबॉल की सुविधाएं, एक स्विमिंग पूल और एक हेल्थ क्लब है. यहां शानदार रेस्टोरेंट, लाउंज, बार, बैंक्वेट हॉल, लाइब्रेरी, कार्ड रूम, मसाज सर्विस, ब्यूटी पार्लर, बच्चों के लिए जगह और सदस्यों व मेहमानों के लिए 43 ट्रांजिट रूम और कॉटेज भी हैं.
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