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दिल्ली अग्निकांड: रियल लाइफ हीरो, दूसरों की जान बचाने के लिए जिन्होंने जान की बाजी लगा दी

दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के बीच कुछ स्थानीय लोगों ने अपनी जान दांव पर लगाकर दर्जनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. अगर ये लोग नहीं होते तो मौत का आंकड़ा काफी ज्यादा हो सकता था.

दिल्ली अग्निकांड: रियल लाइफ हीरो, दूसरों की जान बचाने के लिए जिन्होंने जान की बाजी लगा दी
Brave Heroes of Delhi Fire
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राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में 21 लोगों की मौत हो गई. बुधवार सुबह करीब 9 बजे इलाके के एक होटल में आग भड़की थी. मौके पर फायर बिग्रेड के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोग 'देवदूत' बनकर आए और होटल में फंसे लोगों की जान बचाने में अपनी जान की बाजी लगा दी. आग लगने के बाद जहां चीख पुकार मची थी, वहीं कुछ रियल लाइफ हीरो इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश कर गए, जिन्हें जानकर हर कोई सलाम करेगा. इलाके के कुछ युवकों ने होटल में फंसे लोगों को निकाला, कंधे पर डालकर अस्पताल तक पहुंचाया.

जिन स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए होटल में फंसे लोगों की जान बचाई उनमें ज्यादातर मुस्लिम युवा थे. इन लोगों ने आग बुझाने में फायर विभाग की मदद की और निकाले गए कई लोगों को सीपीआर तक दिया.

लोगों को सीपीआर देकर बचाई जान

बचाव प्रयासों की स्थानीय भाजपा विधायक सतीश उपाध्याय ने सराहना की. उन्होंने इन युवकों से मुलाकात की. उन्होंने कहा, 'इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है.' उपाध्याय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'आज के जांबाजों को सला. हौज रानी, मालवीय नगर में लगी भीषण आग के दौरान इन पांच साहसी नागरिकों-अफजल, मोहम्मद शाहरुख, मोहम्मद अनीस, मोहम्मद आमिर और मोहम्मद वसीम ने लोगों की मदद की और यहां तक कि लोगों को सीपीआर भी दिया.' उन्होंने कहा, 'मुझे आप पर बहुत गर्व है. उन्होंने कम से कम 10 लोगों को सीपीआर दिया। यही इंसानियत है, जो सबसे ऊपर है और सबसे बड़ा धर्म है.'

लोगों को बचाने के लिए पुलिसकर्मियों ने भी लगा दी जान की बाजी

लोगों को बचाने के लिए पुलिसकर्मियों ने भी लगा दी जान की बाजी
Photo Credit: सोशल मीडिया

कई पुलिसकर्मियों ने भी लगा दी जान की बाजी

रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय लोगों के अलावा पुलिस और प्रशासन के लोगों ने भी जान की बाजी लगा दी. इस दौरान 10 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. बीजेपी विधायक सतीश उपाध्याय ने कहा कि वह पांच बहादुर पुलिस कर्मियों हेड कांस्टेबल दिनेश, करतार सिंह, देशराज, अजय और मीणा की भी सराहना करना चाहेंगे, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना कई लोगों की जान बचाई. उन्होंने कहा, 'घायल होने के बाद भी उन्होंने इंसानियत और साहस की मिसाल पेश की. इन लोगों ने होटल के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला.'

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