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दिल्ली में कहां कितनी महंगी होगी बिजली? हरियाणा, UP से कितना ज्यादा देना होगा पैसा, जानें सबकुछ

दिल्ली में बिजली की कीमत बढ़ गई है. इससे दिल्ली के कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है. क्योंकि 400 यूनिट बिजली खपत तक इस बढ़ोतरी का असर नहीं पड़ेगा. लेकिन उससे अधिक बिजली खपत करने वाले ग्राहकों को जून से बढ़े हुए दर के हिसाब से पैसा देना होगा.

दिल्ली में कहां कितनी महंगी होगी बिजली? हरियाणा, UP से कितना ज्यादा देना होगा पैसा, जानें सबकुछ
दिल्ली में बिजली की कीमत बढ़ गई है.
ANI
  • दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने बिजली के फ्यूल सरचार्ज को बढ़ाने की इजाजत दे दी है.
  • इससे दिल्ली में बिजली महंगी हो गई है. हालांकि 400 यूनिट तक मासिक खपत करने वालों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
  • लेकिन 400 यूनिट से अधिक बिजली यूज करने वालों पर अतिरिक्त बोझ बढे़गा, इसका पूरा गणित क्या है? समझें.
नई दिल्ली:

Delhi Electricity Price Hike: दिल्ली में बिजली महंगी हो गई है. दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने बिजली के फ्यूल सरचार्ज को बढ़ाने की इजाजत दे दी है. इससे दिल्ली में बिजली की दरों में बढोत्तरी हो जाएगी. बिजली कंपनियों को FPPAS यानी Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge वसूलने की लिमिट पहले 10 फीसदी तय थी. लेकिन अब बिजली कंपनियों को 16-17 फीसदी फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की इजाजत मिल गई है. इससे 400 यूनिट से ज्यादा बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोत्तरी होगी. हालांकि दिल्ली में बिजली की कीमत में बढ़ोतरी अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग होगी. क्योंकि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बिजली आपूर्ति करने वाली 3 अलग कंपनियां हैं.  तीनों के इलाके में अलग-अलग कीमत बढ़ेगी.

दिल्ली में बिजली आपूर्ति करने वाली 3 कंपनियां कौन?

  1. टाटा पावर (TPDDL): टाटा पावर उत्तरी और उत्तर पश्चिमी दिल्ली के इलाकों में बिजली आपूर्ति करती है. इसके ग्राहकों को अब 1 फीसदी कीमत देनी होगी
  2. बीएसईएस राजधानी (BPRL): ये दक्षिण और पश्चिम दिल्ली में बिजली बांटती है. BSES वाले इलाके में रहने वालों को अब 2.5 से 3.5 % अधिक बिल देना पड़ेगा.
  3. बीएसईएस यमुना (BYPL): ये मध्य और पूर्वी दिल्ली के इलाकों में बिजली की सप्लाई है. इस इलाके में भी 2.5 से 3.5% अधिक बिल देना पड़ेगा.

दिल्ली में क्यों महंगी हुई बिजली?

बिजली सरचार्ज बढ़ाने जाने को लेकर दिल्ली की बिजली कंपनियों, बीआरपीएल, बीवाईपीएल और टाटा पावर (TPDDL) ने आयोग से गुहार लगाई थी. कंपनियों ने कहा था कि बिजली की वास्तविक खरीद लागत ज्यादा लग रही है, इसलिए सरचार्ज वसूलने की 10 प्रतिशत की अधिकतम सीमा में ढील दी जाए. जिसके बाद DERC ने सरचार्ज बढ़ाने की इजाजत दी. 

  • DERC के आदेश के तहत टाटा पावर (TPDDL) को पूरा 16 प्रतिशत FPPAS वसूलने की मंजूरी मिली है. 
  • बीएसईएस राजधानी (BRPL) को कुल 17.94 प्रतिशत और बीएसईएस यमुना (BYPL) को कुल 17.43 प्रतिशत सरचार्ज वसूलने की हरी झंडी दी गई है.
  • आयोग की ओर से नया आदेश जारी होने तक सरचार्ज में हुई इस बढ़ोतरी के तहत लोगों को कीमत चुकानी पड़ेगी.

200 यूनिट बिजली फ्री और सब्सिडी वालों पर क्या असर?

दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली फ्री है. 201 से 400 यूनिट तक 50 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाती है. ऐसे में इन दोनों कैटगरी में आने वाले कंज्यूमर्स पर इस बढ़ोतरी का असर नहीं पड़ेगा. लेकिन 400 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले ग्राहकों को अब ज्यादा पैसे देने होंगे. लोगों को जून में बढ़ा हुआ बिजली का बिल भरना होगा.

दिल्ली में बिजली की कीमत बढ़ने पर कारोबारियों ने सीएम रेखा गुप्ता को पत्र लिखा है.

कारोबारियों के संगठन ने सीएम को लिखा पत्र

बिजली की कीमत बढ़ने के इस फैसले से कारोबारी परेशान हैं. क्योंकि सबसे ज्यादा असर कारोबारियों पर ही पड़ेगा. इस बिजली बढ़ोत्तरी के खिलाफ चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानि CTI ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर कहा कि इससे करोलबाग जैसी दुकानों के बिल में उत्तर प्रदेश और गुरुग्राम जैसे इलाकों के मुकाबले 4 से 5 हजार रुपए की अतिरिक्त बढोत्तरी होगी. कारखानों में उत्पाद मंहगे होंगे. दिल्ली में कमर्शियल और इंडस्ट्रीज के लिए बिजली दरें पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होगी 15-20%  महंगी हो जाएगी.

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली में कमर्शियल और इंडस्ट्रीज के लिए बिजली की दरें पहले से ही पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत ज्यादा हैं, अब बिजली की दरें और बढ़ने से दिल्ली की इंडस्ट्रीज पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश में शिफ्ट हो सकती हैं क्योंकि वहां बिजली की दरें और न्यूनतम मजदूरी दिल्ली की तुलना में सस्ती होने से लागत कम पड़ेगी.

बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली में रेजिडेंशियल में बिजली दरों में सब्सिडी मिलती हैं, लेकिन कमर्शियल और इंडस्ट्रीज में सब्सिडी नहीं मिलने से यहां बिजली की दरें हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत ज्यादा हो जाएंगी. जिससे व्यापारियों और फैक्ट्री मालिकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और वस्तुओं के दाम बढने की संभावना बढ़ेगी.

दिल्ली, यूपी, हरियाणा... कहां कितनी महंगी बिजली?

दिल्ली: 3 kVA+: Rs 8.50/kVAh  Rs 250/kVA/माह  Rs 47,500/माह
UP:  2-5 kW: Rs 8.50/यूनिट 
5kW+: Rs 10.00/यूनिट 
11kV: Rs 8.12/kVAh 
430/kVA/माहRs 44,000/माह

हरियाणा: 11 kV: Rs 6.95/kVAh
सामान्य: Rs 6.50-7.50/यूनिट Rs 290/kVA/माह Rs 38,000/माह

दिल्ली, यूपी, हरियाणा की बिजली में कहां कितना अंतर?

दिल्ली vs हरियाणा: 
दिल्ली में 20-25% महंगी. हरियाणा में Rs 6.95 vs दिल्ली में Rs 8.50

दिल्ली vs उत्तर प्रदेश: 
दिल्ली में 5-8% महंगी. UP का फिक्स्ड चार्ज ज्यादा है पर यूनिट रेट कम

इंडस्ट्रीज/HT रेट: बड़ी फैक्ट्री के लिए

दिल्ली- Rs 7.75/kVAh  Rs 250/kVA/माह, 18 लाख/माह
UP- 6 साल से टैरिफ नहीं बढ़ा अनुमानित: Rs 6.50-7.30/यूनिट पुराना: Rs 300/kVA Rs 17-18 लाख/माह

हरियाणा 11 kV: Rs 6.95/kVAh, MSME को Rs 2/यूनिट सब्सिडी, Rs 290/kVA/माह ~Rs 16.8 लाख/माह

  • दिल्ली vs हरियाणा: दिल्ली 7-10% महंगी. हरियाणा में Rs 6.95 vs दिल्ली में Rs 7.75
  • दिल्ली vs UP: दिल्ली थोड़ी महंगी या बराबर. UP ने 6 साल से रेट नहीं बढ़ाया, पर फ्यूल सरचार्ज अलग लगता है.
  • दुकान: करोल बाग की दुकान का बिल गुड़गांव से 9,500 तो नोएडा से 3,500 रुपए मासिक तक ज्यादा हो सकता है. 
  • फैक्ट्री: बवाना की फैक्ट्री का बिल मानेसर से 1.2 लाख रुपए प्रतिमाह तक ज्यादा हो सकता है. 

नोट- आंकड़े CIT द्वारा दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता को लिखे पत्र से लिए गए हैं. 

यह भी पढ़ें - दिल्ली में महंगी होगी बिजली, DERC ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की इजाजत दी, छोटे ग्राहकों पर असर नहीं

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