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This Article is From Jun 01, 2023

चीतों की मौत: भूपेंद्र यादव ने कहा- "जो भी हुआ हम उसकी जिम्मेदारी लेते हैं, लेकिन परियोजना सफल होगी"

भूपेंद्र यादव ने कहा, ‘‘यह एक अंतरराष्ट्रीय परियोजना है और हमें मृत्यु होने का पूर्वानुमान था. यह हमारी रिपोर्ट (चीता परियोजना) में भी उल्लेख किया गया है. एक चीता भारत आने से पहले ही अस्वस्थ था. हमने दो अन्य (वयस्क) चीतों की मौत के कारण बताए हैं.’’

चीतों की मौत: भूपेंद्र यादव ने कहा- "जो भी हुआ हम उसकी जिम्मेदारी लेते हैं, लेकिन परियोजना सफल होगी"

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में तीन महीने में तीन चीतों और इतने ही शावकों की मौत होने के बाद, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘जो कुछ भी हुआ उसकी हम जिम्मेदारी लेते हैं'' लेकिन इस बात पर जोर दिया कि चीतों के स्थानांतरण की परियोजना सफल साबित होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाये गए आठ चीतों को पिछले साल 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के कूनो स्थित एक बाड़े में छोड़ा था. इस तरह के दूसरे स्थानान्तरण में, 12 चीतों को दक्षिण अफ्रीका से लाया गया और 18 फरवरी को कूनो में छोड़ा गया.

मार्च और अप्रैल में तीन चीतों की मौत हो गई. बाकी 17 वयस्क चीतों में से सात को पहले ही जंगल में छोड़ दिया गया है. तीन चीतों और नामीबिया की मादा चीता, सिसाया से पैदा हुए चार शावकों में से तीन की मौत होने के बाद कई विशेषज्ञों ने प्राकृतिक वास और वन्यजीव प्रबंधन की उपयुक्तता पर सवाल उठाए हैं.

भूपेंद्र यादव ने ‘टाइम्स नेटवर्क' के एक कार्यक्रम में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘यह एक अंतरराष्ट्रीय परियोजना है और हमें मृत्यु होने का पूर्वानुमान था. यह हमारी रिपोर्ट (चीता परियोजना) में भी उल्लेख किया गया है. एक चीता भारत आने से पहले ही अस्वस्थ था. हमने दो अन्य (वयस्क) चीतों की मौत के कारण बताए हैं.''

उन्होंने कहा, ‘‘तीनों शावकों की मौत अत्यधिक गर्मी के कारण हुई. तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया, जो भी हुआ उसकी हम जिम्मेदारी लेते हैं. हालांकि, परियोजना एक बड़ी सफलता साबित होगी और पूरे देश को इस पर गर्व होगा.'' पिछले हफ्ते दो चीता शावकों की मौत के बारे में खबर सामने आने के बाद, केंद्र ने चीता परियोजना की प्रगति की समीक्षा और निगरानी के लिए 11 सदस्यों वाली उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था.

सरकार और परियोजना में शामिल विशेषज्ञों ने कहा है कि मृत्यु दर सामान्य सीमा के भीतर है। समिति ने बुधवार को पहली बार बैठक की और जून के तीसरे सप्ताह तक दो मादा सहित सात और चीतों को जंगल में छोड़ने का फैसला किया.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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