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This Article is From Jul 01, 2025

दिल्ली कोर्ट ने बंद किया 9 साल से लापता नजीब का केस; मां बोलीं, कैसे बेटे की उम्मीद छोड़ दूं?

सीबीआई ने अक्तूबर 2018 में जांच बंद कर दी थी, क्योंकि जेएनयू के प्रथम वर्ष के मास्टर्स छात्र नजीब अहमद का पता लगाने के उनके प्रयास असफल रहे थे

दिल्ली कोर्ट ने बंद किया 9 साल से लापता नजीब का केस; मां बोलीं, कैसे बेटे की उम्मीद छोड़ दूं?
  • जेएनयू छात्र नजीब के मामले में क्लोजर रिपोर्ट को कोर्ट ने किया स्वीकार
  • नजीब की गुमशुदगी को 9 साल से अधिक का समय हुआ
  • कोर्ट ने भविष्य में सबूत मिलने पर केस को फिर से खोलने की दी अनुमति
  • नजीब की मां बोलींं; 'कैसे उम्मीद छोड़ दूं.. आखिर वो मेरा बेटा है'

JNU Student Najeeb Case: जेएनयू छात्र नजीब को लेकर पेश सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. नजीब को गायब हुए 9 साल से भी ज्यादा समय हो गया है. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली, लेकिन भविष्य में कोई सबूत मिलने पर मामले को फिर से खोलने की छूट दी है.

कोर्ट के फैसले पर नजीब की मां फातिमा नफीस ने कहा,

'मेरे नजीब को गायब हुए 9 साल से भी ज़्यादा हो गए हैं. लेकिन जिस लापरवाही के साथ पहले दिन से दिल्ली पुलिस और CBI ने काम किया, उसका ही नतीजा है कि आज कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया. आज तक ना दिल्ली पुलिस, ना CBI, उन ABVP से जुड़े छात्रों को गिरफ़्तार कर पाई, न ही कोई कार्रवाई कर सकी, जिन गुंडों ने मेरे बेटे के साथ मारपीट की और उस के बाद उसे गायब कर दिया.'

कोई सबूत नहीं मिलने पर कहती हैं कि,

'सालों तक मेरे बेटे के बारे में अफवाहें फैलाई गईं, झूठ फैलाया गया. इतनी बड़ी जांच एजेंसियां और पूरी न्याय व्यवस्था आज तक यह नहीं बता सकी कि मेरा नजीब कहां है.

कई विश्वविद्यालयों में नजीब को लेकर प्रदर्शन पर फातिमा कहती हैं,

'इस पूरे वक्त में, जब सिस्टम ने हमें चुप कराने की कोशिश की, तब JNU के छात्रों और देशभर के छात्रों ने अलग अलग कॉलेज और यूनिवर्सिटीज जैसे AMU, JAMIA से मेरा साथ दिया. उन्हीं बच्चों ने सड़कों पर लाठियां खाईं, हमारे लिए आवाज उठाई - यही साथ और यही लड़ाई मुझे हौसला देती है.

अपने बेटे के मिल जाने की उम्मीद लगाए फातिमा कहती है,


'कई बार लगता है कि कैसे उम्मीद छोड़ दूं? कैसे ये हौसला टूटने दूं? आख़िर वो मेरा बेटा है. मुझे मेरा बेटा चाहिए. अगर इसके लिए मुझे देश की हर अदालत तक जाना पड़े - मैं जाऊंगी. आखिरी सांस तक लड़ूंगी.'

सीबीआई केस बंद होने पर वो कहती है कि,

'ये लड़ाई सिर्फ मेरे बेटे की नहीं, हर उस मां की है जो अपने बच्चे के लिए न्याय चाहती है. इसके लिए मुझे देश की सर्वोच्च अदालत जाना पड़ा तो वहा भी जाऊंगी.'

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि, सीबीआई ने अक्तूबर 2018 में जांच बंद कर दी थी, क्योंकि जेएनयू के प्रथम वर्ष के मास्टर्स छात्र नजीब अहमद का पता लगाने के उनके प्रयास असफल रहे थे. दिल्ली उच्च न्यायालय की अनुमति के बाद सीबीआई ने अदालत में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी. 15 अक्तूबर, 2016 को जेएनयू के माही-मांडवी छात्रावास में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से कथित रूप से जुड़े कुछ छात्रों के साथ झड़प के बाद नजीब लापता हो गया था.

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