कार्डियेक इमरजेंसी में जिंदगियां बचाने में जुटा देश का सबसे बड़ा वर्चुअल हॉस्पिटल

कश्मीर के डॉक्टरों का समूह Saveheart initiative व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म के जरिए ह्रदय रोगियों के इमरजेंसी में तुरंत इलाज के लिए मदद कर रहा

खास बातें

  • इमरजेंसी में मरीज का सबसे पहले घर पर इलाज
  • ईसीजी रिपोर्ट के आधार पर कॉर्डियालॉजिस्ट देते हैं मार्गदर्शन
  • दूरस्थ गांवों के डॉक्टरों को वीडियो कॉल पर दिया जाता है गाइडेंस
नई दिल्ली:

श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में अपनी रुटीन ड्यूटी के दौरान कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ इरफान भट (Dr Irfan Bhat) को कश्मीर (Kashmir) के एक दूरस्थ गांव में काम कर रहे एक डॉक्टर का वीडियो कॉल आता है. वह एक रोगी की संदिग्ध हृदय संबंधी इमरजेंसी (Cardiac Emergency) के बारे में बताता है और ईसीजी रिपोर्ट के आधार पर रोगी की देखभाल के तरीके के बारे में गाइडेंस मांगता है.

ईसीजी का ऑनलाइन एनालिसिस करने के बाद डॉ इरफान इस बात की पुष्टि कर देते हैं कि रोगी को हार्ट अटैक हुआ है. वे वीडियो कॉल पर ही तुरंत उपचार संबंधी सलाह देते हैं.

यह कार्डियोलॉजिस्ट कश्मीर में देश के सबसे बड़े वर्चुअल हॉस्पिटल का हिस्सा हैं. यह अस्पताल- #Saveheart initiative - व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम कर रहा है.

श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ इरफान भट ने कहा कि "हम ईसीजी को एनालाइज करते हैं, हम सुनिश्चित करते हैं कि रोगी का उसके घर पर ही सही इलाज हो, थ्रोम्बोसिस के बाद उसे फर्स्ट एड मिले और उसके बाद उसे आगे की देखभाल के लिए अस्पताल में भेजा जाए. इससे मरीज के भाग्य का फैसला करने में फर्क पड़ता है.”

डॉ इरफ़ान ने पिछले सात वर्षों में सैकड़ों कार्डियेक केसों को ऑनलाइन संभाला है. उन्होंने दूरदराज के इलाकों के हार्ट से संबंधित मरीजों को विशेष चिकित्सा सुविधाओं के लिए श्रीनगर पहुंचाए जाने से पहले इन इलाकों के डॉक्टरों का इमरजेंसी की स्थिति में मार्गदर्शन किया है.

यह इस तरह काम करता है: जैसे ही किसी इलाके में हार्ट संबंधी इमरजेंसी सामने आती और डॉक्टर को इसका पता चलता है तो डॉक्टर मरीज की ईसीजी सेव हार्ट व्हाट्सऐप ग्रुप पर अपलोड करता है. इसके तुरंत बाद ग्रुप के एक कॉर्डियोलॉजिस्ट ईसीजी का मुआयना करता है और फिर स्वास्थ्य अधिकारी को शुरुआती घंटों में रोगी को संभालने के बारे में मार्गदर्शन देता है.

कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के दौरान कार्डियेक इमरजेंसी के मामले देखे जाने पर साल 2015 में इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू करने का विचार सामने आया. बालटाल कैंप के एक डॉक्टर ने श्रीनगर के एक कार्डियोलॉजिस्ट को व्हाट्सऐप कॉल किया था जिससे उस यात्री को बचाने में मदद मिली थी. वह यात्री उत्तर प्रदेश के आगरा से आया था.

डॉ इरफान ने कहा,  “यह स्थान श्रीनगर में तीसरे चरण की देखभाल करने वाले अस्पताल से 130 किलोमीटर दूर था. बालटाल शिविर में बिना किसी उपचार के रोगी को भेजना बुद्धिमानी नहीं थी. वहां तैनात डॉक्टर शमास ने हमसे बात की. हमने ईसीजी पर चर्चा की और बताया कि सही उपचार क्या दिया जाना है. दवा वहां उपलब्ध थी. रोगी का उपचार हुआ और उसकी जान बच गई.”

इसके बाद से पूरे कश्मीर के 1200 डॉक्टर और दुनिया भर के अनिवासी कश्मीरी डॉक्टर #SaveHeart ग्रुप का हिस्सा बन गए हैं..प्लेटफार्म अब तक एक लाख से अधिक ईसीजी का एनालिसिस करके सैकड़ों लोगों की जान बचा चुका है.

अपनी रुटीन ड्यूटी के अलावा डॉ इरफ़ान कभी-कभार दूरदराज के गांवों में जाते हैं और मरीजों को ऑनलाइन मोड के जरिए देखते हैं. उनका कहना है कि उनके लिए उनके चेहरे पर मुस्कान देखने से ज्यादा संतुष्टि की कोई बात नहीं हो सकती.

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डॉ इरफान कश्मीर में डॉक्टरों के एक ग्रुप से जुड़े हैं और उन्होंने अपनी तय ड्यूटी से आगे बढ़कर भारत का सबसे बड़ा वर्चुअल अस्पताल बनाया है. वे एक रुपया खर्च किए बिना कार्डियेक इमरजेंसी के मामलों में मरीजों को उनके घर पर ही संभाल रहे हैं और हर साल सैकड़ों लोगों की जान बचा रहे हैं.