- संभल के नेजा मेले का आयोजन सेनापति सैयद सालार मसूद गाजी की स्मृति में होली पर तीन दिन चलता है.
- प्रशासन ने पिछले साल स्पष्ट कर दिया था कि किसी आक्रांता के नाम पर मेले की अनुमति नहीं दी जाएगी.
- नवंबर 2024 में संभल में हुई हिंसा और सांप्रदायिक तनाव के कारण सुरक्षा कारणों से मेले पर रोक लगाई गई थी.
संभल के ऐतिहासिक नेजा मेले के आयोजन को लेकर एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक विवाद गहरा गया है. होली के उपलक्ष्य में हर साल आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय मेला महमूद गजनवी के भांजे और सेनापति सैयद सालार मसूद गाजी की स्मृति में मनाया जाता है. विवाद की मुख्य जड़ इसका ऐतिहासिक कनेक्शन है. पिछले साल 2025 में प्रशासन ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा था कि किसी भी 'आक्रांता' के नाम पर आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी. साथ ही, नवंबर 2024 में संभल में हुई हिंसा के बाद उपजे सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए सुरक्षा कारणों से भी इस पर रोक लगा दी गई थी.
इस साल नेजा मेला कमेटी ने दोबारा तैयारी शुरू की है और अनुमति के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. कमेटी की ओर से अधिवक्ता शबीह जमाल और आदिल जमाल ने दलील दी है कि यह मेला पिछले 1000 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है और पिछले वर्ष इस पर लगी रोक के कारण स्थानीय व्यापारियों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया था.
याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार, संभल के जिलाधिकारी और नगर पालिका परिषद को प्रतिवादी बनाया गया है. अब संभल की इस पुरानी परंपरा और प्रशासनिक पाबंदियों के बीच का अंतिम फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिका है.
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