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This Article is From Dec 27, 2025

दिग्विजय के पोस्ट पर BJP का सवाल - क्या राहुल गांधी हिम्मत दिखाएंगे

बयान पर विवाद खड़ा होने के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा, "मैंने संगठन की तारीफ की है. मैं RSS का और पीएम मोदी की नीतियों का घोर विरोधी था, हूं और रहूंगा. जो मुझे कहना था मैंने CWC बैठक में कह दिया. संगठन को मजबूत करना या उसकी तारीफ करना क्या बुरी बात है?"

दिग्विजय के पोस्ट पर BJP का सवाल - क्या राहुल गांधी हिम्मत दिखाएंगे
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भाजपा और आरएसएस की संगठन शक्ति की खुले तौर पर प्रशंसा की है
  • दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस में विकेंद्रीकरण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है
  • भाजपा नेताओं ने दिग्विजय सिंह के बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ आंतरिक असहमतियों का नतीजा बताया
नई दिल्ली:

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पार्टी कार्य समिति (CWC) की बैठक से पहले शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेक संघ (RSS) की 'संगठन शक्ति' की तारीफ कर अपने दल के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी. हालांकि, बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि वह आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों के धुर विरोधी हैं, और उन्होंने सिर्फ संगठन की तारीफ की है. लेकिन बीजेपी ने दिग्विजय सिंह के इस बयान को लपक लिया और कांग्रेस व राहुल गांधी को आइना दिखाया.

राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की निष्पक्षता पर सवाल- सुधांशु त्रिवेदी

दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "यह कांग्रेस पार्टी का आंतरिक मामला है. इसमें कुछ खास महत्वपूर्ण नहीं है. दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी की समझ पर सवाल उठाया है. अपनी किताब 'द प्रॉमिस्ड लैंड' के चैप्टर 24 में बराक ओबामा ने भी लिखा है कि राहुल गांधी एक ऐसे छात्र की तरह हैं जो अपने शिक्षक को इंप्रेस करने की उत्सुकता में कई हाव-भाव दिखाता है, लेकिन उसमें वास्तविक ज्ञान और गंभीरता की कमी होती है. जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति किसी के बारे में कोई राय बनाता है, तो वह बहुत लंबे समय तक अमेरिका के आर्काइव में दर्ज रहती है. उसके बाद, राहुल गांधी को अमेरिका के प्रमुख विश्वविद्यालयों द्वारा आमंत्रित किया जाता है. क्या यह आश्चर्यजनक नहीं लगता? यह राहुल गांधी की सभी विदेश यात्राओं की निष्पक्षता और तटस्थता पर सवाल उठाता है."

दिग्विजय सिंह के ट्वीट को लेकर बीजेपी ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा. पार्टी प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा कि सिंह की टिप्पणी ने "निरंकुश और अलोकतांत्रिक" कांग्रेस नेतृत्व को उजागर कर दिया है अब ऐसे में सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी हिम्मत दिखाएंगे और दिग्विजय सिंह के ट्वीट द्वारा छोड़े गए चौंकाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देंगे. जिस बयान ने पूरी तरह से उजागर कर दिया है कि कैसे कांग्रेस का पहला परिवार बेरहमी से तानाशाही तरीके से पार्टी चलाता है और यह भी कि यह कांग्रेस नेतृत्व कितना निरंकुश और अलोकतांत्रिक है?

वहीं भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर कहा, "...अब पार्टी और परिवार के लोग भी राहुल गांधी के खिलाफ अविश्वास जाहिर कर रहे हैं. शशि थरूर ने विषय के स्तर पर अपने आप को अलग किया, इमरान मसूद ने कहा 'प्रियंका लाओ राहुल हटाओ' और अब दिग्विजय सिंह का बयान... संगठन कमजोर हुआ है उसके बारे में बताया, संगठन में लोकतंत्र नहीं है, ये केंद्रित है ये बताया. प्रियंका कैंप जिस प्रकार से राहुल कैंप पर हमले कर रहा है, यह भी उसी दिशा में अन्य हमला है. मुझे लगता है कि राहुल गांधी को कोई गंभीरता से नहीं लेता है, क्योंकि वे सच का सामना नहीं करना चाहते हैं."

साथ ही भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा, "दिग्विजय सिंह कह रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी आज 'परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी' बन चुकी है जहां पर वही व्यक्ति सारे निर्णय ले सकता है जो उस परिवार में जन्म ले रहा है. अन्य कोई व्यक्ति कांग्रेस पार्टी में आगे नहीं बढ़ सकता है. कोई व्यक्ति केवल इसलिए जनप्रतिनिधि नहीं बन सकता कि उसके दादाजी या नानाजी कई पदों पर रहे. दिग्विजय सिंह कह रहे हैं कि कांग्रेस के सारे निर्णय गांधी परिवार के लोग लेते हैं. मैंने भी कांग्रेस पार्टी से त्यागपत्र देते हुए यही बात कही थी."

दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में की विक्रेंद्रीकरण की पैरवी

सूत्रों के अनुसार, दिग्विजय सिंह ने कार्य समिति की बैठक के दौरान भी पार्टी संगठन में विक्रेंद्रीकरण की पैरवी की है. कार्य समिति की बैठक शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने ‘एक्स' पर एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं और उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं.

दिग्विजय सिंह ने पोस्ट किया, ‘‘कोरा वेबसाइट पर मुझे यह चित्र मिला. बहुत ही प्रभावशाली है. किस प्रकार आरएसएस का ज़मीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना. यह संगठन की शक्ति है. जय सियाराम.''
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विवाद खड़ा होने पर सिंह ने कहा, "मैंने संगठन की तारीफ की है. मैं RSS का और पीएम मोदी की नीतियों का घोर विरोधी था, हूं और रहूंगा. जो मुझे कहना था मैंने CWC बैठक में कह दिया. संगठन को मजबूत करना या उसकी तारीफ करना क्या बुरी बात है?"

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अगर आप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर मेरे कार्यकाल को देखेंगे तो पाएंगे कि मैंने विकेंद्रीकृत तरीके से काम किया. यह मेरा विचार है.''

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