राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शन किया. सुबह ही दिल्ली पुलिस ने सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके, प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरभ दास को हिरासत में ले लिया. इसके बीच सीजेपी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक रोजाना जंतर-मंतर तक मार्च किया जाएगा. यह ऐलान सीजेपी नेता अंजिक्य शिंदे ने किया. अभिजीत दीपके ने वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा था कि अगर वो अरेस्ट होते हैं, तो प्रदर्शन को लीड अंजिक्य करेंगे.
'दीपके के साथ अमानवीय व्यवहार'
सीजेपी ने यह भी कहा कि पिछले 10 घंटे से अभिजीत दीपके समेत कई नेता पुलिस हिरासत में हैं और उनके संपर्क नहीं हो पा रहा है. अंजिक्य शिंदे ने कहा कि पुलिस ने बेगुनाह प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की. उन्होंने यह भी कहा कि दीपके के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और उन्हें अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत नहीं दी जा रही है, जिनका उसी दिन महाराष्ट्र में उनके गृहनगर में निधन हो गया था.
कौन हैं अजिंक्य शिंदे?
बता दें कि अभिजीत दीपके के हिरासत में लिए जाने के बाद महाराष्ट्र के लातूर जिले के निवासी अजिंक्य शिंदे चर्चा में आ गए हैं और उन्हें जंतर-मंतर पर कॉजपा के आंदोलन के अगले चरण का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. शिंदे ने शनिवार को ‘जंतर-मंतर 2.0' प्रदर्शन की कमान संभाली. दीपके ने उन्हें और दो अन्य नेताओं के हिरासत में रहने तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए शिंदे को चुना है.
शिंदे महाराष्ट्र के लातूर जिले की औसा तहसील के उजनी गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में अपना करियर छोड़कर सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता का रास्ता चुना. शिंदे के मित्र सूरज धवन ने बताया कि अब उनसे संगठन के आंदोलन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है.
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के लिए सुरक्षा के बंदोबस्त किए गए और अभिजीत दीपके, चार पूर्व मुख्यमंत्रियों और यूट्यूबर ध्रुव राठी समेत 7000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल जंतर-मंतर पूरे दिन सुनसान नजर आया. प्रदर्शनकारियों को इलाके से दूर रखने के लिए लुटियन दिल्ली में 30 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई और कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए.
विपक्षी दलों ने स्थिति की तुलना आपातकाल से भी बदतर हालात से की. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवाओं से ‘प्रदर्शन जारी रखने' की अपील की और कहा कि ‘हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस शासन और संविधान पर हमला करने वाले लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़े.'
आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पिनराई विजयन और माणिक सरकार सहित विपक्ष के कई नेताओं को राजधानी में अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया. ये नेता सीजेपी द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे.
ममता बनर्जी ने कहा,‘यह आपातकाल से भी आगे निकल गया है. यह महा-आपातकाल बन गया है.' हिरासत में लिए गए कई नेताओं ने दावा किया कि पुलिस उन्हें घंटों तक वाहनों में इधर-उधर घुमाती रही.
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