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GST में बड़े बदलाव की तैयारी, छोटे ऑनलाइन कारोबारियों को मिलेगी बड़ी राहत

जीएसटी परिषद टैक्स मांग उठाने और उस पर फैसला लेने के लिए साझा मानकों पर भी विचार कर सकती है. इसमें नोटिस तैयार करने और भेजने, सामान्य कम भुगतान और धोखाधड़ी में अंतर करने, सुनवाई करने और स्पष्ट आदेश जारी करने के विस्तृत दिशा-निर्देश शामिल हैं.

GST में बड़े बदलाव की तैयारी, छोटे ऑनलाइन कारोबारियों को मिलेगी बड़ी राहत
सांकेतिक तस्वीर
NDTV

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद बुधवार को कारोबारियों के लिए टैक्स नियमों का पालन आसान बनाने के लिए बड़े प्रक्रियागत सुधारों पर विचार कर सकती है. इनमें छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को जीएसटी पंजीकरण के लिए मंच के गोदामों का इस्तेमाल करने की अनुमति देना, वास्तविक खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की सुरक्षा करना और कम राशि वाले मामलों में कानूनी विवाद घटाना शामिल है.

जीएसटी 2.0 प्रक्रिया सुधारों के तहत ये प्रस्ताव पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने, माल की आवाजाही को आसान बनाने और टैक्स पेयर्स और टैक्स डिपोर्टमेंट के बीच विवाद कम करने पर केंद्रित हैं.

छोटे विक्रेताओं को गोदाम के पते पर रजिस्ट्रेशन की सुविधा

प्रस्तावों में एक सुझाव छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को उन राज्यों में मंच के गोदाम को अपने पंजीकृत कारोबार स्थल के रूप में दिखाने की अनुमति देने का है, जहां उनका अपना कोई दफ्तर नहीं है. इसके तहत विक्रेता की किसी एक राज्य में वास्तविक मौजूदगी जरूरी होगी, जहां भौतिक सत्यापन और आधार प्रमाणीकरण किया जाएगा. 

इसके बाद दूसरे राज्यों में पंजीकरण ई-कॉमर्स मंच की सहमति से बिना किसी अतिरिक्त सरकारी दखल के मिल सकेगा.

सूत्रों ने कहा कि इस कदम से करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को हर राज्य में अलग कार्यालय खोले बिना देशभर के बाजार तक पहुंच मिलेगी, जहां उनका माल रखा जाता है. इसके साथ ही, इससे ई-कॉमर्स क्षेत्र में टैक्स के मामले में अधिक समानता आएगी.

खरीदारों के आईटीसी की सुरक्षा पर भी विचार

परिषद वास्तविक खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की रक्षा करने के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है. इसके तहत जिन खरीदारों के पास वैध बिल हैं, उन्हें राहत मिलेगी, भले ही आपूर्ति श्रृंखला में किसी पिछले विक्रेता ने टैक्स जमा नहीं किया हो.

ऐसे मामलों में वसूली की कार्रवाई खरीदार की जगह टैक्स जमा न करने वाले विक्रेता के खिलाफ की जाएगी. यह प्रस्ताव जीएसटी से जुड़े विवादों और कारोबारी अनिश्चितता के एक बड़े कारण को दूर कर सकता है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो छोटे और नए विक्रेताओं से खरीदारी करती हैं.

10,000 रुपये से कम के मामलों में नोटिस नहीं

विवादों और प्रशासनिक बोझ को कम करने के लिए परिषद 10,000 रुपये से कम की टैक्स मांग वाले मामलों में जीएसटी नोटिस जारी नहीं करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है.

प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे मामले कुल मामलों का करीब 20 प्रतिशत हैं, लेकिन इनमें टैक्स की राशि बहुत कम होती है. यह सीमा लंबित मामलों पर भी लागू की जा सकती है, चाहे वे जांच के स्तर पर हों या अपील के चरण में.

इसी तरह 10,000 रुपये से अधिक की मांग वाले मामलों में औपचारिक नोटिस जारी करने से पहले अधिकारियों को करदाता को सूचना देकर जवाब देने का मौका देना होगा.

टैक्स विवाद के लिए साझा मानकों की तैयारी

परिषद टैक्स मांग उठाने और उस पर फैसला लेने के लिए साझा मानकों पर भी विचार कर सकती है. इसमें नोटिस तैयार करने और भेजने, सामान्य कम भुगतान और धोखाधड़ी में अंतर करने, सुनवाई करने और स्पष्ट आदेश जारी करने के विस्तृत दिशा-निर्देश शामिल हैं.

प्रस्ताव के तहत जब कोई करदाता मुकदमा लड़ने के बजाय विवाद निपटाने का विकल्प चुनता है, तो भुगतान की गई राशि को जुर्माने के बजाय प्रभार कहा जाएगा.

जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया होगी आसान

जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को भी नए तरीके से तैयार किया जा रहा है ताकि आवेदन पहली बार में ही सही तरीके से पूरे हो सकें. प्रस्तावित प्रणाली हर चरण में मार्गदर्शन देगी, आवेदकों को केवल वही खंड दिखाएगी जो उनके लिए जरूरी हैं और अपलोड करने के लिए जरूरी दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराएगी. कई राज्यों में पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले कारोबारी उन्हें एक साथ पूरा कर सकेंगे.

यह प्रणाली कारोबार के स्थान के आधार पर संबंधित कर कार्यालय का भी निर्धारण करेगी.

माल ढुलाई में कम होगी रुकावट

एक अन्य प्रस्ताव में खुफिया सूचना के आधार पर लॉजिस्टिक और रास्ते में होने वाली जांच शुरू करने की बात कही गई है. इसके तहत मालवाहक वाहनों को किसी वरिष्ठ अधिकारी की पूर्व अनुमति से ही रोका जा सकेगा और आमतौर पर जांच वही राज्य करेगा जहां से माल रवाना हुआ है.

दस्तावेज गायब होने या खरीदार पर टैक्स देनदारी बनने जैसी स्थितियों में इसके अपवाद लागू होंगे. प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद राज्यों की सीमाओं पर वाहनों को बार-बार रोके जाने की समस्या कम करना, पारगमन समय और ढुलाई लागत घटाना तथा घरेलू और निर्यात माल की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित बनाना है.

एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध भागीदार रजत मोहन ने कहा कि ये प्रस्ताव उन कई बुनियादी चिंताओं का समाधान करते हैं जिन्हें जीएसटी लागू होने के बाद से कारोबारियों और टैक्स पेशेवरों ने लगातार उठाया है.

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