अगर आप सोच रहे थे कि विवादों और राजनीतिक खींचतान के बीच सरकार UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले नए चार्जेस के फैसले को वापस ले लेगी, तो ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है. उच्च पदस्थ सूत्रों ने साफ कर दिया है कि UPI से जुड़े नए नियमों को किसी भी कीमत पर वापस नहीं किया जाएगा. सरकार का रुख पूरी तरह से स्पष्ट है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि डिजिटल पेमेंट का ढांचा तैयार करने के लिए 5 साल पहले ही इसकी पूरी रूपरेखा तय कर ली गई थी.
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वित्त मंत्रालय ने साफ शब्दों में आश्वासन दिया है कि इस फैसले से आम जनता यानी ग्राहकों की जेब पर एक पैसे का भी बोझ नहीं पड़ेगा. इसके बावजूद, इस मुद्दे को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है और पक्ष-विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं.
जानिए किस पर लगेगा चार्ज और किसके लिए बिल्कुल फ्री रहेगा UPI?
नए नियमों को लेकर लोगों के मन में कई तरह के भ्रम पैदा हो गए हैं. इस पूरे ढांचे को आसान भाषा में समझना बेहद जरूरी है.
अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी भी व्यक्ति को पैसे भेजते हैं (P2P), तो यह सेवा पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त रहेगी. चाहे आप 100 रुपये भेजें या 50,000 रुपये आपसे कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लिया जाएगा.
इसके अलावा ऐसे छोटे दुकानदार या मर्चेंट, जो महीने में UPI QR कोड के जरिए 1 लाख रुपये तक का डिजिटल भुगतान हासिल करते हैं, उन्हें भी किसी भी तरह का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं देना होगा.
वहीं अगर आप किसी भी दुकान या मर्चेंट को 2,000 रुपये या उससे कम की पेमेंट करते हैं, तो उस पर 0% MDR लागू होगा. देश में होने वाले लगभग 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन इसी दायरे में आते हैं, यानी 96% मामलों में कोई चार्ज नहीं लगेगा.
लेकिन 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान 0.4% का MDR लगेगा (उदाहरण के लिए ₹2,001 के पेमेंट पर लगभग ₹8 का चार्ज लगेगा).
विशेष क्षेत्र जैसे रेलवे, टेलीकॉम सेवाएं, इंश्योरेंस और फ्यूल (पेट्रोल पंप) जैसे विशेष सेक्टरों में 2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये की फ्लैट फीस तय की गई है.
MDR क्या है और सरकार ने इसे क्यों जरूरी बताया?
वित्त मंत्रालय ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) न तो कोई टैक्स है और न ही यह पैसा सरकार या NPCI की जेब में जा रहा है. पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 के तहत लागू किया गया यह शुल्क पूरी तरह से डिजिटल पेमेंट सिस्टम को संभालने वाले बैंकों और पेमेंट ऐप्स (जैसे PhonePe, Paytm, Google Pay) के बीच बांटा जाएगा.
इसका मुख्य उद्देश्य UPI नेटवर्क की सुरक्षा, सर्वर की मजबूती और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक बिना किसी रुकावट के चालू रखना है. सूत्रों के मुताबिक, जब 5 साल पहले देश में डिजिटल पेमेंट का आधार तैयार किया जा रहा था, तभी यह तय कर लिया गया था कि नेटवर्क पूरी तरह स्थापित होने के बाद बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन से इसका मेंटेनेंस खर्च निकाला जाएगा.
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