विज्ञापन

'आप गलत जगह आए हैं, धरना-प्रदर्शन करें' CJI की टिप्पणी पर वकील ने कहा-'गला खराब है'; क्या है पूरा मामला?

यूपी विधानसभा में आरक्षित सीटों के रोटेशन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आप गलत जगह आ गए हैं, धरना-प्रदर्शन करें.

'आप गलत जगह आए हैं, धरना-प्रदर्शन करें' CJI की टिप्पणी पर वकील ने कहा-'गला खराब है'; क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट.
NDTV
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश की उन विधानसभा सीटों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई हुई, जो दशकों से SC-ST के लिए आरक्षित हैं. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि राहत के लिए आप गलत जगह आए हैं, यह धरना प्रदर्शन का दौर है, आपको भी ऐसा करना चाहिए. 

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि विधानसभा सीटों में आरक्षण में रोटेशन का फैसला विधायिका को कहना है.

क्या है पूरा मामला?

मामला सुल्तानपुर जिले की कादीपुर विधानसभा सीट से जुड़ा है, जो 1952 से ही SC उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है.

कादीपुर सीट को लगातार SC जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. 

याचिका में दलील दी गई थी कि पिछले 75 सालों में लगभग तीन-चार परिवारों को ही इसका फायदा मिलता रहा है. इससे दूसरे समुदायों के लोगों के चुनाव लड़ने के विकल्प सीमित हो गए हैं.

इस याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने बुधवार को सुनवाई की.

'जाति के आधार पर वोट देने की धारणा नहीं बनाई जा सकती'

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि यह मानकर नहीं चला जा सकता कि बहुसंख्यक समुदाय के मतदाता जाति या समुदाय के आधार पर ही वोट करते हैं.

उन्होंने कहा, 'यह दलील इस धारणा पर आधारित है कि बहुसंख्यक समुदाय जाति या समुदाय के आधार पर वोट करेगा. ऐसा जरूरी नहीं है. हाई कोर्ट लोकतांत्रिक पसंद पर न्यायिक घोषणा नहीं कर सकता.  यह फैसला मतदाताओं को करना है.' 

जस्टिस बागची ने कहा कि किसी सीट के आरक्षित होने से किसी व्यक्ति का मतदान का अधिकार प्रभावित नहीं होता.

उन्होंने कहा, 'आपका वोट देने का अधिकार खत्म नहीं होता. आप किसी भी समुदाय के उम्मीदवार को वोट दे सकते हैं. लेकिन अगर आप यह कहते हैं कि आप अपने समुदाय के उम्मीदवार को वोट नहीं दे सकते, तो इसे वैध दलील नहीं माना जा सकता. आपका चुनाव लड़ने का अधिकार भी सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं है. आप दूसरी गैर-आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं.'

यह भी पढ़ें | 27 साल पुराना टैक्स विवाद खत्म; सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा राज्यों को अतिरिक्त बिक्री कर लगाने का अधिकार

'वोटर उम्मीदवार का धर्म नहीं, विचारधारा देखते हैं'

जस्टिस बागची ने कहा कि बहुदलीय लोकतंत्र में मतदाताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे राजनीतिक दलों और उनकी विचारधाराओं के आधार पर मतदान करें, न कि उम्मीदवार के धर्म या जाति के आधार पर. 

उन्होंने कहा, 'राजनीतिक लोकतंत्र में अलग-अलग विचारधाराओं वाले कई राजनीतिक दल होते हैं. मतदाताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे पार्टी और उसकी विचारधारा के लिए वोट करें, धर्म के लिए नहीं. आप किसी विचारधारा को पसंद या नापसंद कर सकते हैं. उस विचारधारा का प्रतिनिधित्व कौन कर रहा है, यह अप्रासंगिक हो जाता है.'

आरक्षण में रोटेशन की मांग खारिज

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि कम से कम अधिकारियों को विधानसभा सीटों के आरक्षण में रोटेशन लागू करने पर विचार करने का निर्देश दिया जाना चाहिए, जैसा कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में होता है.

इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 332 में विधानसभा में SC/ST के लिए सीटों के आरक्षण और उनकी संख्या का प्रावधान है, लेकिन किन सीटों को आरक्षित किया जाएगा, यह अलग सवाल है.

उन्होंने कहा कि किसी सीट के चयन के मानदंड से असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि वह असंवैधानिक हो जाता है. अदालत को केवल यह देखना है कि क्या इसमें स्पष्ट मनमानी है.

जस्टिस बागची ने कहा कि लंबे समय तक आरक्षण से समाज में जातिगत विभाजन की भावना पैदा होती है या नहीं, यह विधायिका को देखना है. केवल इस आधार पर मौजूदा कानून को असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता.

यह भी पढ़ें | सुप्रीम कोर्ट ने देश की सबसे अमीर महापालिका की कमिश्नर अश्विनी भिड़े का वेतन रोका; फटकार और 5 लाख का जुर्माना

'हम संविधान या कानून को दोबारा नहीं लिख सकते'

याचिकाकर्ता के वकील ने संविधान के अनुच्छेद 243D और 243T का हवाला दिया, जिनमें पंचायतों और नगरपालिकाओं में आरक्षण और रोटेशन का प्रावधान है.

इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए संविधान में अलग व्यवस्था है. अदालत संविधान या कानून को दोबारा नहीं लिख सकती.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी कहा, हम संसद के तीसरे सदन की भूमिका नहीं निभा सकते.

जब वकील ने अदालत से कानून की व्याख्या इस तरह करने का आग्रह किया कि विधानसभा सीटों पर भी रोटेशन लागू हो सके, तो जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत आरक्षण में रोटेशन शुरू करने का निर्देश देकर कानून को दोबारा नहीं लिख सकती.

आप गलत जगह आए हैं: CJI सूर्यकांत

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा- 'आप गलत नंबर मिला रहे हैं. यह धरना-प्रदर्शन का दौर है. आपको भी ऐसा ही करना चाहिए.'

वकील ने माफी मांगते हुए कहा कि उनका धरना देने का कोई इरादा नहीं है और उनका गला भी खराब है. 

इस पर CJI ने कहा- आप अपनी आवाज उठा सकते हैं और कह सकते हैं कि अब संसद के लिए इस मुद्दे पर दोबारा विचार करने का समय आ गया है लेकिन यह काम केवल विधायिका ही कर सकती है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Supreme Court, CJI Surya KAnt, Legal News, UP Assembly, Reserved Seats
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com