नई दिल्ली में राम जेठमलानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका में सुधार, कॉलेजियम सिस्टम, पारदर्शिता और शिकायत निवारण तंत्र को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे. उन्होंने कहा कि सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है और किसी भी संस्था को जड़ नहीं होना चाहिए. कॉलेजियम सिस्टम को लेकर उठते सवालों के बीच उन्होंने कहा कि कॉलेजियम और कार्यपालिका के बीच मुश्किल से कोई बाधा है तथा दोनों के बीच विचार-विमर्श की व्यवस्थित प्रक्रिया मौजूद है. साथ ही उन्होंने सार्वजनिक भरोसे को न्यायपालिका की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि निष्पक्ष और रचनात्मक आलोचना संस्थागत सुधार के लिए आवश्यक है.
सुधार ही नियम: CJI सूर्यकांत
राम जेठमलानी मेमोरियल लेक्चर में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका में सुधार, कॉलेजियम सिस्टम और जजों के खिलाफ शिकायतों से जुड़े सवालों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि 'Reform Must be the Rule' यानी सुधार ही नियम होना चाहिए. उन्होंने कहा कि संस्थाएं 'Stagnant' यानी जड़ नहीं हो सकतीं. हालांकि उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन पर सार्वजनिक मंच से जवाब देना शायद उचित नहीं होगा.

राम जेठमलानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान मंच पर मौजूद CJI सूर्यकांत और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल
कॉलेजियम सिस्टम पर CJI की टिप्पणी
कॉलेजियम सिस्टम को लेकर उठ रहे सवालों पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि उनके पास इन सवालों के कानूनी जवाब हैं. उन्होंने कॉलेजियम सिस्टम के ऐतिहासिक विकास और उसके काम करने के तरीके का उल्लेख किया. CJI ने कहा कि कॉलेजियम और एग्जीक्यूटिव के बीच मुश्किल से कोई बाधा है. उन्होंने बताया कि कॉलेजियम में किस तरह काम होते हैं और कार्यपालिका के साथ किस प्रकार विचार-विमर्श होता है.
जजों के खिलाफ शिकायतों पर ये बोले CJI
न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने की व्यवस्था में सुधार के सवाल पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकते हैं कि मौजूदा मैकेनिज्म समयबद्ध और मजबूत है. उन्होंने कहा कि जजों को उनके करियर के हर स्तर पर शिकायतों का सामना करना पड़ता है. CJI ने सवाल किया क्या हमें हर शिकायत को वेबसाइट पर डाल देना चाहिए? उन्होंने कहा कि शिकायतों से निपटने का मैकेनिज्म अच्छी तरह स्थापित है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि हर चीज सुधार के अधीन है.
पारदर्शिता को बताया जनता के भरोसे की कुंजी
CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका में पारदर्शिता केवल अदालत के दरवाजे खुले रखने तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि पब्लिक ट्रस्ट का मतलब पब्लिक एप्रूवल नहीं है. अदालत का भरोसा तब कायम होता है जब कोई व्यक्ति मुकदमा हारने के बावजूद यह महसूस करे कि उसके खिलाफ फैसला देने वाली प्रक्रिया निष्पक्ष थी. CJI ने न्यायपालिका की आलोचना को भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का जरूरी हिस्सा बताया और कहा कि 'Fair, Informed and Constructive Critique of Judicial Functioning' संस्थागत जवाबदेही और सेल्फ करेक्शन के लिए जरूरी है. उन्होंने कहा कि पब्लिक ट्रस्ट ही न्यायपालिका की असली करेंसी है और इसे लगातार अर्जित करना पड़ता है.
महेश जेठमलानी ने ‘फिक्सर वकीलों' पर उठाए सवाल
इस कार्यक्रम में राम जेठमलानी के बेटे, सासंद और वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने न्यायपालिका और ट्रिब्यूनल में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि ‘फिक्सर वकीलों' के बिना जजों को रिश्वत दिलाकर न्यायिक व्यवस्था को प्रभावित करना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि बार में हर कोई ऐसे वकीलों को जानता है और संभव है कि उनकी जानकारी खुफिया एजेंसियों के पास भी हो. महेश जेठमलानी ने कहा कि ऐसे वकीलों के नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को बताए जाने चाहिए, यदि पहले से नहीं बताए गए हैं. उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के कामकाज पर भी सवाल उठाए और चेयरमैन का कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाने की कथित कोशिश को “crying shame” करार दिया.
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