- भारत में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में चीनी रोबोटिक डॉग को इनोवेशन बताने का विवाद हुआ
- केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि गलती पर तुरंत कार्रवाई की गई
- गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने विवाद पर अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने सरकार के मिशन के अनुसार काम किया है
भारत में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में एक चीनी रोबोटिक डॉग को अपनी इनोवेशन बताने के विवाद ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है. इस मामले को तूल पकड़ता देख केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को सफाई देते हुए कहा कि एक्सपो में हुई किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की गई है. हालांकि, उन्होंने अपील की कि इस घटना के बीच कई सकारात्मक AI समाधानों को नजरअंदाज हरगिजन नहीं करना चाहिए.
#WATCH | Delhi | Galgotias University staff and officials vacate their stall at India AI Impact Summit expo, following row over display of Chinese-made robodog.
— ANI (@ANI) February 18, 2026
As per sources, the govt had asked Galgotias University to vacate the stall at the expo. pic.twitter.com/cqN5vBcgcN
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मंत्री का बयान, “गलत काम पर तुरंत कार्रवाई”
ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा चीनी रोबोडॉग को अपनी इनोवेशन बताने के विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए वैष्णव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रदर्शनी में कई अच्छे सॉल्यूशन पेश किए गए हैं. अगर किसी ने गलत किया है, तो गलत काम के खिलाफ तुरंत एक्शन हुआ है. हालांकि, दूसरे अच्छे AI सॉल्यूशन पर भी ध्यान देना चाहिए. केंद्रीय मंत्री यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘ओरियन' नाम के इस रोबोटिक डॉग को लेकर राजनीति तेज हो गई है.

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यूनिवर्सिटी ने विवाद को बताया “बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया”
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि विवाद को गलत अर्थों में समझा गया है और उन्होंने सरकार के मिशन और विजन के मुताबिक ही काम किया है. लेकिन यह मामला विपक्ष के लिए भी बड़ा मुद्दा बन चुका है, इसलिए इस मुद्दे पर सरकार भी जमकर घेरा जा रहा है.
विपक्ष का हमला: “भारत का मजाक बन गया”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने भारत को AI का ग्लोबल हब बनाने का मौका गंवा दिया. पार्टी ने कहा कि मोदी सरकार ने देश को दुनिया के सामने मज़ाक का पात्र बना दिया. राहुल गांधी ने इसे और आगे बढ़ाते हुए AI समिट को “बिना सोचे-समझे पीआर तमाशा” बताया. उनका कहना था कि भारत के टैलेंट और डेटा का फायदा उठाने के बजाय, AI समिट एक बेतरतीब पीआर तमाशा है. भारतीय डेटा बिक्री के लिए, चीनी प्रोडक्ट दिखाए जा रहे हैं.

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एक्सपो में कार्रवाई: स्टॉल हटाने का आदेश
मंत्री के बयान के बाद यह साफ हुआ कि एक्सपो में कार्रवाई हो चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI एक्सपो से अपना सामान समेटकर जाने को कहा गया. यहां तक कि उनके पवेलियन की बिजली काट दी गई और उन्हें तुरंत समिट छोड़ने का आदेश दिया गया. हालांकि यूनिवर्सिटी स्टॉल के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें “जाने को कहे जाने” की कोई जानकारी नहीं है और वे वहीं रुके हुए हैं. लेकिन थोड़ी देर बाद न्यूज एजेंसी एएनआई ने फुटेज जारी की, जिसमें यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि स्टॉल छोड़ते दिखे.
“हम देश की छवि खराब नहीं कर रहे”—प्रोफेसर नेहा सिंह
इस मामले में जमकर फजीहत होने के बाद भी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने कहा कि हम यहां अपने स्टूडेंट्स का काम दिखाने आए हैं, और हम किसी भी तरह से भारत की इमेज खराब करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. हमारी यूनिवर्सिटी प्रधानमंत्री के विजन और मिशन के साथ है. हम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में काम कर रहे हैं.

आखिर विवाद कैसे शुरू हुआ?
यह विवाद मंगलवार को तब भड़का, जब यूनिवर्सिटी के एक प्रतिनिधि ने रोबोटिक डॉग को यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की इनोवेशन बता दिया और मीडिया को इसके फीचर्स व तकनीकी इनोवेशन के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
इसके बाद सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी की जमकर किरकिरी शुरू हो गई. लोगों ने इसे शर्मनाक और गलत हरकत बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधि से देश की छवि को नुकसान पहुंचता है.
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