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This Article is From Aug 19, 2025

स्थिर और विश्वसनीय रिश्‍ते शांति के लिए जरूरी... वांग यी के हाथों पीएम मोदी पे जिनपिंग को भिजवाया संदेश 

प्रधानमंत्री ने पिछले साल अक्‍टूबर में कजान में राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई अपनी मुलाकात के बाद से भारत-चीन संबंधों में स्थिर और सकारात्मक प्रगति का स्वागत किया.

स्थिर और विश्वसनीय रिश्‍ते शांति के लिए जरूरी... वांग यी के हाथों पीएम मोदी पे जिनपिंग को भिजवाया संदेश 
  • पीएम मोदी ने चीन के विदेश मंत्री यी से मुलाकात में भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने का महत्व बताया.
  • मोदी ने सीमा विवाद के निष्पक्ष और दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई.
  • पीएम ने पिछले साल कजान में शी जिनपिंग से हुई मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंधों में प्रगति का स्वागत किया.
नई दिल्‍ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर बल दिया. साथ ही उन्होंने सीमा विवाद के निष्पक्ष, तर्कसंगत और दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई. अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की टैरिफ नीति के बाद से ही भारत और चीन के रिश्‍तों ने नई राह पकड़ी है. 

जिनपिंग से मुलाकात का इंतजार 

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की तस्वीरें शेयर कीं. उन्होंने लिखा, 'विदेश मंत्री वांग यी से मिलकर खुशी हुई. पिछले साल कजान में राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मेरी मुलाकात के बाद से भारत-चीन संबंधों में एक-दूसरे के हितों और संवेदनाओं का सम्मान करते हुए लगातार प्रगति हुई है. मैं एससीओ शिखर सम्मेलन के मौके पर तियानजिन में हमारी अगली मुलाकात का इंतजार कर रहा हूं. भारत और चीन के बीच स्थिर, विश्वसनीय और रचनात्मक संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देंगे.' 

अक्‍टूबर में मिले थे दोनों नेता 

प्रधानमंत्री ने पिछले साल अक्‍टूबर में कजान में राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई अपनी मुलाकात के बाद से भारत-चीन संबंधों में स्थिर और सकारात्मक प्रगति का स्वागत किया. उन्होंने कहा, 'आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार हुआ है, जिसमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली भी शामिल है.' पीएम मोदी ने राष्‍ट्रपति शी के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए तियानजिन में होने वाले  शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने की सहमति जताई है. उन्होंने चीन की एससीओ अध्यक्षता का समर्थन किया और कहा कि वह तियानजिन में राष्‍ट्रपति जिनपिंग से मुलाकात के लिए उत्सुक हैं. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच स्थिर, विश्वसनीय और रचनात्मक संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देंगे.  

यी बोले पीएम की यात्रा का इंतजार 

वांग यी ने मंगलवार को कहा कि चीन एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित यात्रा को बहुत महत्व देता है और इसकी सफलता में भारत के सक्रिय योगदान की आशा करता है. वांग ने दिल्ली में एनएसए डोभाल के साथ सीमा वार्ता के 24वें दौर में अपने उद्घाटन वक्तव्य में यह बात कही. डोभाल और वांग दोनों ही भारत-चीन सीमा विवाद के लिए विशेष प्रतिनिधि (एसआर) हैं. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, वांग ने इस बात पर जोर दिया कि इतिहास और वास्तविकता ने बार-बार यह साबित किया है कि चीन-भारत संबंधों का स्वस्थ और स्थिर विकास दोनों देशों के लोगों के मौलिक हितों को पूरा करता है और यह विकासशील देशों की आम अपेक्षा भी है. 
 


 

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