- उत्तराखंड में चारधाम के लिए हेलीकॉप्टर सेवा के दौरान सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हुई थी.
- वर्ष 2025 में पांच हेलीकॉप्टर हादसों में तेरह लोगों की मौत और तीन क्रैश लैंडिंग की घटनाएं हुईं थीं.
- DGCA ने अप्रैल 2026 से हेलीकॉप्टर उड़ानों पर नई SOP लागू करते हुए उड़ानों की संख्या में 30% कटौती की है.
उत्तराखंड में चारधाम और हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं. जहां अधिकांश यात्री सड़क मार्ग से यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब पहुंचते हैं. वहीं, बड़ी संख्या में लोग हेलीकॉप्टर सेवा का भी लाभ उठाते हैं. हालांकि, पिछले साल यात्रा के दौरान हुए सिलसिलेवार हेलीकॉप्टर हादसों ने इन सेवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. लेकिन अब अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली आगामी चारधाम यात्रा के लिए DGCA ने नया निर्देश दिया है.
वर्ष 2025 में कुल पांच हादसे हुए, जिनमें केदारनाथ घाटी और उत्तरकाशी की दो बड़ी दुर्घटनाओं में 13 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. इसके अतिरिक्त, तीन अन्य हेलीकॉप्टरों की क्रैश लैंडिंग भी हुई थी. इन लापरवाहियों और हादसों को संज्ञान में लेते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने हेली सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी थी और भविष्य के लिए सख्त दिशा-निर्देश एवं नई SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करने के आदेश दिए थे.
अनुभवी पायलटों की तैनाती अनिवार्य
अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली आगामी चारधाम यात्रा के लिए DGCA ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद किसी भी हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. केदारनाथ घाटी की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अनिश्चित मौसम को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं. नई SOP के तहत केदारनाथ घाटी में उड़ानों की संख्या में 30 प्रतिशत की कटौती की गई है. साथ ही, अब केवल उन्हीं अनुभवी पायलटों की तैनाती अनिवार्य होगी जिन्हें उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उड़ान का लंबा अनुभव हो. सुरक्षा निगरानी को पुख्ता करने के लिए देहरादून के सहस्रधारा और सिरसी हेलीपैड पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) एवं मौसम विभाग की विशेष इकाइयां स्थापित की गई हैं.
शटल और चार्टर सेवाओं में भी 30 प्रतिशत की कमी
निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए केदारनाथ घाटी के लिनचोली, भीमबली और गौरीकुंड में ग्राउंड मॉनिटरिंग स्टाफ तैनात किया जाएगा. इसके अलावा सहस्रधारा, गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा जैसे प्रमुख हेलीपैड्स पर 30 से अधिक उच्च क्षमता वाले PTZ (Pan-Tilt-Zoom) कैमरे लगाए गए हैं. केदारघाटी में संचालित होने वाली शटल और चार्टर सेवाओं में भी 30 प्रतिशत की कमी की गई है ताकि हवाई यातायात को सुरक्षित रखा जा सके. उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) अब DGCA के इन निर्देशों के आधार पर आगामी सीजन के लिए टेंडर आवंटित कर रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाना है.
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