विज्ञापन

दहेज मृत्यु केस में पति बरी: कोर्ट ने कहा ‘हर ताना क्रूरता नहीं; संदेह सबूत की जगह नहीं ले सकता’

दहेज मृत्यु और क्रूरता के एक मामले में अदालत ने आरोपी पति को बरी करते हुए महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि केवल सामान्य ताने या वैवाहिक जीवन के उतार-चढ़ाव को धारा 498ए के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता.

दहेज मृत्यु केस में पति बरी: कोर्ट ने कहा ‘हर ताना क्रूरता नहीं; संदेह सबूत की जगह नहीं ले सकता’
Dowry Death Case Verdict: ‘सिर्फ ताने क्रूरता नहीं’, अदालत ने पति को किया बरी
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली:

दहेज मृत्यु और क्रूरता के एक मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए आरोपी पति को बरी कर दिया है. अदालत ने कहा कि वैवाहिक जीवन के सामान्य विवाद, ताने या आपसी तनाव को तब तक कानूनी रूप से ‘क्रूरता' नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि ऐसे व्यवहार ने महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर किया या उसे गंभीर मानसिक या शारीरिक नुकसान पहुंचाया. मामले में महिला की मां और भाई सहित प्रमुख गवाहों ने पीड़ित पक्ष के आरोपों का समर्थन नहीं किया और महिला की मौत का कारण अवसाद बताया. इसके बाद अदालत ने सबूतों के अभाव में पति को दहेज मृत्यु और क्रूरता के आरोपों से बरी कर दिया.

2021 में हुई थी महिला की मौत

TOI की रिपोर्ट के अनुसार ये मामला जून 2021 का है, जब अंजलि नामक महिला की अपने ससुराल में मौत हो गई थी. अंजलि की शादी वर्ष 2018 में अनिल कुमार से हुई थी. पीड़ित पक्ष का आरोप था कि शादी के बाद से अंजलि को कम दहेज लाने के कारण पति और ससुराल पक्ष द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जाता था. आरोपों के अनुसार भाई की शादी से लौटने के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था. उसी रात पति ने अंजलि के परिजनों को सूचना दी कि उसने आत्महत्या कर ली है.

मां और भाई के बयान से कमजोर हुआ मामला

सुनवाई के दौरान मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता और मृतका की मां तथा उसके एक भाई ने पीड़िता के आरोपों का समर्थन नहीं किया. दोनों ने अदालत को बताया कि अंजलि को दहेज के लिए कभी प्रताड़ित नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि करीब एक वर्ष पहले नवजात बेटे की मौत के बाद वह गहरे अवसाद में रहने लगी थी. अदालत ने माना कि मुख्य गवाहों के बयान अभियोजन पक्ष की कहानी को कमजोर करते हैं.

अन्य रिश्तेदारों ने लगाए थे तानों के आरोप

मृतका के एक अन्य भाई और भाभी ने अदालत में दावा किया कि अंजलि को दहेज को लेकर ताने दिए जाते थे. उन्होंने आरोप लगाया कि ससुर ने कभी कहा था कि 'इतना दहेज तो सबसे गरीब व्यक्ति भी दे सकता है.' हालांकि जिरह के दौरान दोनों गवाह किसी विशेष दहेज मांग, रकम या सामान की मांग के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके.

ताने और क्रूरता को लेकर अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल ने कहा कि आरोप सामान्य और व्यापक प्रकृति के थे तथा दहेज मांग से जुड़ी किसी विशेष घटना का पर्याप्त प्रमाण नहीं दिया गया. अदालत ने अपने आदेश में कहा, 'महज सामान्य ताने या वैवाहिक जीवन के सामान्य उतार-चढ़ाव को धारा 498ए के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि ऐसा व्यवहार महिला को आत्महत्या करने या गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त था.'

‘संदेह सबूत की जगह नहीं ले सकता'

अदालत ने यह भी कहा कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. फैसले में कहा गया, 'संदेह चाहे कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह सबूत का स्थान नहीं ले सकता. अभियोजन पक्ष को ‘हो सकता है' से आगे बढ़कर ‘निश्चित रूप से हुआ है' तक का पूरा सफर तय करना होता है.'

सबूतों के अभाव में पति बरी

आखिरकार अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष महिला की मौत से ठीक पहले दहेज उत्पीड़न या क्रूरता की कोई ठोस घटना साबित नहीं कर सका. इसी आधार पर आरोपी पति अनिल कुमार को दहेज मृत्यु और क्रूरता के आरोपों से बरी कर दिया गया.

यह भी पढ़ें : 'लड़के फिर शादी ही क्यों करते हैं?', दहेज उत्पीड़न को लेकर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Dowry Death Case, Court Verdict, Dowry Harassment Case, Delhi Court, Husband
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com