बिहार पुलिस ने सिवान के सिपाही अभिषेक कुमार को उनके पद से निलंबित कर दिया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों के बीच AK-47 का इस्तेमाल किया. उनकी तरफ से हवा में चार राउंड फायरिंग की गई. लेकिन इस घटना के बाद एक सवाल सभी के मन में है-क्या पुलिस प्रदर्शन के दौरान AK-47 जैसे आधुनिक हथियार का इस्तेमाल कर सकती है या नहीं?
कानून व्यवस्था राज्य का विषय
समझने वाली बात यह है कि भारत में इस विषय को लेकर कोई एक समान केंद्रीय कानून नहीं है क्योंकि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है. हालांकि, भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और राज्य पुलिस मैनुअल की कुछ गाइडलाइंस इस मामले में दिशा-निर्देश जरूर देती हैं.
बिहार पुलिस की मैनुअल क्या कहती?
सबसे पहले अगर बिहार पुलिस मैनुअल की बात करें, तो AK-47, INSAS और SLR जैसे ऑटोमैटिक हथियारों का इस्तेमाल सामान्य तौर पर कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान नहीं होता. बड़ी बात यह है कि ये हथियार किसी एक पुलिसकर्मी को नहीं, बल्कि विशेष पुलिस यूनिट के साथ ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
बिहार पुलिस मैनुअल के मुताबिक, इन हथियारों का इस्तेमाल सिर्फ मुख्यमंत्री और राज्यपाल की सुरक्षा, एंटी-नक्सल ऑपरेशन, स्पेशल टास्क फोर्स (STF),आतंकवाद विरोधी अभियानों में किया जा सकता है. बड़ी बात यह भी है कि किसी राजनेता, जज या वरिष्ठ IAS-IPS अधिकारियों के सामान्य बॉडीगार्ड के पास भी AK-47 जैसा हथियार नहीं होता. उनकी सुरक्षा के लिए आमतौर पर कार्बाइन या पिस्तौल दी जाती है.
एक्सपर्ट क्या बता रहे हैं?
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बिहार के पूर्व DGP ने बताया कि आतंकवाद विरोधी और नक्सल विरोधी अभियानों में पुलिस आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर सकती है. लेकिन किसी प्रदर्शन के दौरान भीड़ के खिलाफ ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं, इसे लेकर कोई स्पष्ट नियम मौजूद नहीं है. पूर्व DGP ने यह भी बताया कि बिहार पुलिस साल 2000 के बाद से AK-47 का इस्तेमाल कर रही है. इससे पहले उसके पास SLR राइफल हुआ करती थी.
सामान्य परिस्थिति में इस्तेमाल होगी AK-47?
वैसे, पुलिस सामान्य परिस्थितियों में AK-47 का इस्तेमाल नहीं कर सकती. किसी भी विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस सबसे पहले लोगों को चेतावनी देती है, फिर बातचीत की कोशिश करती है. इसके बाद बैरिकेडिंग, वॉटर कैनन और आंसू गैस जैसे साधनों का इस्तेमाल किया जाता है. गोली चलाने की अनुमति हमेशा आखिरी विकल्प के तौर पर देखी जाती है. अगर किसी की जान बचानी हो, पुलिस को अपनी आत्मरक्षा करनी हो या फिर यह आशंका हो कि प्रदर्शनकारी पुलिस के हथियार लूट सकते हैं, तभी फायरिंग की अनुमति दी जा सकती है.
पुलिस नियम यह भी कहते हैं कि किसी अधिकृत वरिष्ठ अधिकारी या मौके पर मौजूद मजिस्ट्रेट के स्पष्ट आदेश के बिना कोई भी पुलिसकर्मी ऑटोमैटिक हथियार का इस्तेमाल नहीं कर सकता. यहां तक कि हवा में चेतावनी के लिए फायरिंग करने की अनुमति भी बिना आदेश के नहीं होती.
बड़ी बात यह है कि BNS 2023 और BNSS 2023 में भी कहीं स्पष्ट तौर पर AK-47 का अलग से कोई उल्लेख नहीं मिलता है.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की गाइडलाइन्स
इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की गाइडलाइंस को समझना भी जरूरी हो जाता है. NHRC के नियमों के मुताबिक, अगर पुलिस फायरिंग में किसी व्यक्ति की मौत होती है, चाहे वह AK-47 से हुई हो या किसी अन्य हथियार से तो ऐसे मामलों में तुरंत FIR दर्ज करना अनिवार्य है.
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