- हरियाणा के नूंह जिले में 27 साल के कलाकार की जमीन में बोरी में बंद होकर खतरनाक स्टंट करने से मौत हो गई
- कलाकार को एक बोरी में बंद कर गड्ढे में दफनाया गया था, तीन दिन बाद बाहर निकाला तो दम घुट चुका था
- इस तरह के स्टंट में सांस लेने में दिक्कत और ऑक्सीजन की कमी के कारण दम घुटने का खतरा रहता है
क्या आपने किसी जिंदा शख्स को अपनी ही कब्र में लेटते देखा है? ऐसा खौफनाक मामला हरियाणा के नूंह से सामने आया है. नूंह के एक गांव में पिछले हफ्ते एक 27 साल के शख्स ने ऐसा अजीब सर्कस स्टंट किया कि उसकी मौत हो गई. हुआ कुछ यूं कि जिंदा आदमी को एक बोरी में बंद कर जमीन में दफना दिया गया. इसके बाद स्टंट देखने वालों से कहा गया कि जमीन में बंद रहने के बाद भी वह शख्स जिंदा बाहर निकलेगा. लेकिन हुआ इसका उल्टा. दम घुटने ने उसकी मौत हो गई. लोगों के फन के लिए किया गया ये स्टंट देखते ही देखते मातम में बदल गया.
सर्कस का जानलेना स्टंट, शख्स को जमीन में किया दफन
हैरानी की बात यह है कि स्टंट करने वाले ग्रुप ने शख्स को जमीन में दफना कर वैसे ही छोड़ दिया. स्टंट ग्रुप के दूसरे सदस्यों ने जब जमीन खोदी तो देखा कि उसकी मौत हो चुकी है. कहा जा रहा है कि उसे दफनाने के तीन दिन बाद जमीन खोदी गई थी. हालांकि समय तो लेकर थोड़ा संशय है. मृतक का नाम दीपक है. वह फरीदाबाद के गौंची गाँव के रहने वाला था. वह एक ट्रैवलिंग बाइसिकल सर्कस के लिए काम करता था. यह सर्कस ताऊरू के खोरी गांव में एक खाली ज़मीन पर लगा था.
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दफन होने से पहले दीपक ने सर्कस देखने आई भीड़ का मनोरंजन करने के लिए कई तरह के खतरनाक साइकिल स्टंट भी किए थे. उसका आखिरी करतव लाइव समाधि था, जो कि गांवों के मेलों में काफी मशहूर है.

AI फोटो.
'लाइव समाधि' में कलाकार की मौत
दीपक को एक बोरी में बंद कर एक खास तौर पर खोदे गए गड्ढे में दफन कर मिट्टी के ढेर से ढक दिया गया. पुलिस कह रही है कि दीपक को गुरुवार को गड्ढे में दफन किया गया था. लेकिन कब बाहर निकाला गया, ये अब तक साफ नहीं है. पुलिस उनके साथी कलाकारों और ग्रामीणों के बयान दर्ज कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि जमीन में कितनी देक तक दफन रहे. क्या यह करतब प्लानिंग से ज्यादा समय तक तो नहीं चला.
करतब बना जानलेवा
जो लोग इस तरह के स्टंट से वाकिफ हैं, उनका कहना है कि जमीन के नीचे जिंदा रहने के लिए सालों की प्रैक्टिस, सांस पर जबरदस्त कंट्रोल और बहुत सावधानी की जरूरत होती है. हवा आती रहे इसके लिए बोरी में छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं. वहीं मिट्टी के अंदर हवा के लिए पतले रास्ते बनाए जाते हैं. फिर भी, परफॉर्मर आम तौर पर कुछ घंटों या या एक दिन तक ही जमीन में बंद रह पाते हैं. लेकिन जान का जोखिम बना रहता है. इतने खतरनाक परफॉर्मेंस के बाद भी इसे देखने आए लोगों से एक ग्रुप को ज्यादा से ज्यादा 1 500 से 2,000 रुपये ही मिलते हैं.

Photo Credit: AI फोटो.
डॉक्टर ने स्टंट को बताया जानलेना
गुड़गांव के एक डॉक्टर ने बताया कि इस तरह के कारनामे मेडिकल के लिहाज से खतरनाक होते हैं, चाहे कितनी भी सावधानी क्यों न बरती गई हो. ज़मीन के नीचे बंद जगह पर जिंदा रहना इस बात पर निर्भर करता है कि वहां ऑक्सीजन कितनी मिल रही है और वेंटिलेशन और टेंपरेचर कितना है. ऑक्सीजन लेवल कम होने और कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ते ही सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. लोग इससे कन्फ्यूज हो सकते हैं. ऑक्सीजन बहुत कम होने पर वह बेहोश हो सकते हैं. ऐसे स्टंट में दम घुटने से मौत का बड़ा खतरा होता है इसीलिए इनको कभी नहीं करना चाहिए.
10 साल से ये करतब कर रहा था मृतक
दीपक के बड़े भाई सुनेत डाव भी पहले ऐसे ही करतब किया करते थे, लेकिन कुछ साल पहले ही वह इसे छोड़ चुके हैं. उनका कहना है कि परिवार ने दीपक ने बार-बार यही कहा कि वे ऐसा न करें. उन्होंने मौत में गड़बड़ी की आशंका जताई है. उन्होंने तो खतरे की वजह से ऐसे स्टंट पहले ही छोड़ दिए. लेकिन दीपक पिछले 10 साल से ये करतब कर रहा था. जबकि वह इसे 15 साल तक कर चुके हैं. इसके लिए बहुत प्रैक्टिस की जरूरत होती है. उन्होंने बताया कि आम तौर पर, वे 24 घंटे से ज्याजा अंदर नहीं रह सकते थे. उसके बाद खतरा बढ़ जाता है. भाई की मौत से दुखी सुनेत ने कहा कि स्थानीय लोग ही बता सकते हैं कि दीपक कितनी देर तक जमीन के अंदर बंद रहा, उसे किसने ऐसा करने दिया. क्यों कि उन्होंने ही सबकुछ देखा है.
खतरनाक स्टंट की इजाजत किसने दी?
पुलिस ने बताया कि ये स्टंट करने वाला ग्रुप खानाबदोश 'नट' समुदाय का था. इसके कई सदस्य अपनी रोजी-रोटी के लिए गांवों और छोटे कस्बों में कलाबाजी और सर्कस के करतब करते हैं. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू की. सदर ताऊरू पुलिस स्टेशन के SHO राजेश कुमार ने बताया कि अभी तक कोई केस दर्ज नहीं किया गया है. इसे लेकर उनको कोई शिकायत नहीं मिली है.
इस तरह के स्टंट गैर-कानूनी
वहीं नूंह के डिप्टी कमिश्नर अखिल पिलानी के मुताबिक, इस तरह के स्टंट गैर-कानूनी होते हैं, इस बात की जांच की जाएगी कि आखिर किसने बिना इजाजत के ये जानलेवा इवेंट कैसे आयोजित किया. बता दें कि साल 2017 में भी पानीपत में एक 17 साल के लड़के की इस तरह के स्टंट से मौत हो गई थी.
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