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असम, केरल और पुडुचेरी में थमा चुनाव प्रचार, 296 सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग

पुडुचेरी में 30 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जिनमें 5 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. सरकार बनाने के लिए 16 सीटों का बहुमत जरूरी है. यहां कुल 9.44 लाख मतदाता हैं, जिनमें लगभग 4.43 लाख पुरुष, 5 लाख महिलाएं और 139 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं.

असम, केरल और पुडुचेरी में थमा चुनाव प्रचार,  296 सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग
  • असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान आज शाम तक समाप्त हो गया है.
  • गुरुवार को असम की 126, केरल की 140 और पुडुचेरी की 30 सीटों पर एक ही चरण में मतदान होगा.
  • असम में 2.5 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें लगभग 5.75 लाख युवा पहली बार वोट डालेंगे.
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नई दिल्ली:

असम, केरलम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए जारी तूफानी प्रचार अभियान आज शाम थम गया. असम की 126, केरलम की 140 और पुद्दुचेरी की 30 सीटों पर किस्मत आजमा रहे उम्मीदवारों का भविष्य अब ईवीएम (EVM) में कैद होगा. इन सभी सीटों पर गुरुवार को एक ही चरण में मतदान प्रक्रिया संपन्न की जाएगी.

पुडुचेरी की 30 सीटों के लिए मतदान

असम की 126 सीटों, केरल की 140 सीटों और पुडुचेरी की 30 सीटों के लिए मतदान गुरुवार को एक ही चरण में होगा. असम में कुल 2.5 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.25 करोड़ पुरुष, 1.25 करोड़ महिलाएं और 343 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं. 18-19 वर्ष आयु वर्ग के 5.75 लाख युवा पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए 722 उम्मीदवार मैदान में हैं. यहां बहुमत का आंकड़ा 64 है. राज्य की 15वीं विधानसभा का कार्यकाल 20 मई 2026 को समाप्त हो रहा है.

140 सीटों के लिए 890 उम्मीदवार चुनाव मैदान

केरल विधानसभा की 140 सीटों के लिए 890 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. यहां प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला त्रिकोणीय है. सरकार बनाने के लिए 71 सीटों का बहुमत आवश्यक है. राज्य में कुल 2.71 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.32 करोड़ पुरुष, 1.39 करोड़ महिलाएं और 273 थर्ड जेंडर वोटर्स शामिल हैं.

जबकि, पुडुचेरी में 30 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जिनमें 5 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. सरकार बनाने के लिए 16 सीटों का बहुमत जरूरी है. यहां कुल 9.44 लाख मतदाता हैं, जिनमें लगभग 4.43 लाख पुरुष, 5 लाख महिलाएं और 139 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं.

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत लागू प्रतिबंध, उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और समर्थकों को मतदान समाप्त होने से पहले के अंतिम 48 घंटों के दौरान सार्वजनिक सभाओं, रैलियों या जुलूसों का आयोजन करने या उनमें भाग लेने से रोकते हैं.

इस अवधि के दौरान संगीत शो, नाट्य प्रदर्शन, या मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी सख्त प्रतिबंध है. अधिकारियों ने टेलीविजन, सिनेमा या इसी तरह के इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए चुनाव से संबंधित सामग्री के प्रदर्शन पर भी रोक लगा दी है. इसके अलावा, मतदान से एक दिन पहले और मतदान के दिन समाचार पत्रों में राजनीतिक विज्ञापनों के लिए मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति (एमसीएमसी) से पहले से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा. इससे पहले चुनाव आयोग ने तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए, जिससे मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक जाकर अपने अधिकारों का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जा सके.

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