भारत में अब नदी के नीचे रेल और गाड़ियां दौड़ने का रास्ता साफ हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट ने असम में ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है. इसके तहत ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली रोड और रेल सुरंग का निर्माण किया जाएगा. ये भारत की पहली और दुनिया की दूसरी ऐसी टनल होगी, जहां सड़क और रेल मार्ग एक साथ पानी के नीचे से गुजरेंगे.
अंडरवॉटर रेल-रोड टनल
- कहां बनेगी - असम के गोहपुर-नुमालीगढ़ के बीच
- लंबाई- 15.8 किलोमीटर
- लेन- 4 लेन की टनल
- प्रोजेक्ट लागत- 18,662 करोड़
- समय- करीब 5 साल

6 घंटे की दूरी मिनटों में होगी पूरी
नेशनल हाइवे-715 पर स्थित नुमालीगढ़ और एनएच-15 पर गोहपुर के बीच की दूरी अभी लगभग 240 किलोमीटर है. इस दूरी को तय करने में सिलीघाट के पास कालियाभंभोरा सड़क पुल के रास्ते से करीब 6 घंटे लगते हैं. इस रास्ते से वाहनों को काजीरंगा नेशनल पार्क और विश्वनाथ शहर से होकर गुजरना पड़ता है. नए प्रोजेक्ट के तहत बनने वाली 15.79 किमी लंबी सुरंग से ये सफर न सिर्फ छोटा हो जाएगा बल्कि समय की भी बचत होगी.
Cabinet approves India's first Underwater twin-tube road rail tunnel under River Brahmaputra
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 14, 2026
🚇 4-lane tunnel | Gohpur - Numaligarh, Assam (34 km | ₹18,662 Cr)
➡️ Strengthens the North-East as a gateway to the Act East policy
➡️ Distance reduced from 240 km to 34 km; travel… pic.twitter.com/u8Cmj1bOmk
पूर्वोत्तर राज्यों को सीधा फायदा
यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर तैयार किया जाएगा. इस सुरंग के बनने से असम के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को सीधा फायदा मिलेगा. रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ इससे माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी और परिवहन लागत कम हो सकेगी, जिससे तेजी से क्षेत्र का विकास होगा.
पर्यटन स्थल, आर्थिक केंद्र भी जुड़ेंगे
यह प्रोजेक्ट असम के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक केंद्रों को आपस में जोड़ेगा. इसके जरिए 11 आर्थिक केंद्रों, 3 सामाजिक केंद्रों, 2 पर्यटन स्थलों और 8 लॉजिस्टिक नोड्स को जोड़ने की योजना है. साथ ही यह 4 प्रमुख रेलवे स्टेशनों, 2 हवाई अड्डों और 2 अंतर्देशीय जलमार्गों के साथ बेहतर मल्टी मॉडल एकीकरण सुनिश्चित करेगा, जिससे यात्रियों और सामानों की आवाजाही कहीं ज्यादा आसान और तेजी से हो सकेगी.
सामरिक नजरिए से भी अहम
यह प्रोजेक्ट रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ी सौगात साबित होगा. सरकार का अनुमान है कि इसके निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से लगभग 80 लाख रोजगार दिवस पैदा होंगे. यह सुरंग न केवल व्यापार और औद्योगिक विकास के नए रास्ते खोलेगी बल्कि सामरिक दृष्टि से भी उत्तर-पूर्वी भारत की सुरक्षा और पहुंच को मजबूत बनाएगी.
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