अगर किसी युवक की बस से हादसे में मौत हो जाती है तो उसके परिवार को कितना मुआवजा मिलना चाहिए? आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का एक फैसला इस सवाल के जवाब के लिए नजीर बन गया है. हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि मुआवजा तय करते समय उस युवक की काबिलियत, उसकी मौजूदा सैलरी और वह भविष्य में कितना कमा सकता था, सबका ध्यान देना होगा. यह फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने CA छात्र दाऊद हुसैन के परिवार को मिलने वाले मुआवजे की रकम को 8.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 25.38 लाख रुपये कर दिया है.
दाऊद हुसैन की मौत तब हुई थी जब आंध्र प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन यानी APSRTC की एक बस ने पीछे से उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी. जस्टिस तुहिन कुमार गेडेला ने APSRTC की अपील खारिज कर दी और मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के फैसले में बदलाव किया.
CA भविष्य में कितनी कमाई कर सकता था, HC ने इसका ख्याल रखा
होई कोर्ट ने यह पाया कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने CA युवक की आय का जो आकलन किया था, वह कम था. मृतक दाऊद हुसैन 'कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट' पास करने के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंसी यानी CA की पढ़ाई कर रहा था. इसलिए उसकी अनुमानित सैलरी 15 हजार रुपये तय की गई.
कोर्ट ने ऑब्जर्ब किया कि मृतक युवक का भविष्य उज्ज्वल था.
एक नजर में पूरा केस
नवंबर 2009 में दाऊद हुसैन की मौत हो गई थी जब APSRTC की सरकारी बस ने पीछे से उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी. इसके बाद उनके माता-पिता और भाइयों ने सरकार मुआवजे की मांग की. दाऊद ने 'कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट' पास कर रखा था और CA कोर्स के अगले चरण की तैयारी कर रहे था. तब ट्रिब्यूनल ने उसकी महीने की सैलरी 8,000 रुपये मानी और 8,80,000 रुपये का मुआवजा तय किया. लेकिन APSRTC ने इस फैसले के ख़िलाफ़ अपील की जबकि दाऊद के परिवार ने मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की.
अब हाई कोर्ट ने APSRTC को झटका दिया है. दाऊद पर आश्रित परिजनों को होने वाले नुकसान की रकम 22.68 लाख रुपये तय हुई. कोर्ट ने छह दावेदारों में से हर एक के लिए 'लॉस ऑफ कंसोर्टियम' (साथ छूटने का नुकसान) के तौर पर 40 हजार रुपये और 'लॉस ऑफ एस्टेट' (संपत्ति का नुकसान) व अंतिम संस्कार के खर्च के लिए हर एक को 15,000 रुपये जोड़े. कुल रकम 25.38 लाख रुपये तय की गई है.
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