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भगवान गौतम बुद्ध का सामान, दिल्ली में प्रदर्शनी और अंग्रेज वाला कनेक्शन जान लीजिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दिल्ली में 'द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन' नाम की एक प्रदर्शनी की शुरूआत करेंगे. इस प्रदर्शनी में गौतम बुद्ध के वो अवशेष प्रदर्शित किए जाएंगे, जिन्हें 2025 में भारत वापस लाया गया था.

भगवान गौतम बुद्ध का सामान, दिल्ली में प्रदर्शनी और अंग्रेज वाला कनेक्शन जान लीजिए
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे.संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी का नाम रखा गया है, 'द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन' नाम की यह प्रदर्शनी है. यह जानकारी खुद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दी. उन्होंने लिखा, "यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के नेक विचारों को और ज्यादा लोकप्रिय बनाने की हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप है. यह हमारे युवाओं और हमारी समृद्ध संस्कृति के बीच बंधन को और गहरा करने का भी एक प्रयास है.मैं उन सभी लोगों की भी सराहना करना चाहूंगा जिन्होंने इन अवशेषों को वापस लाने के लिए काम किया. आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर 'पिपरहवा रेलिक्स' आखिर है क्या. 

गौतम बुद्ध के पवित्र अवशेष

दरअसल इस प्रदर्शनी में गौतम बुद्ध से जिन अवशेषों को प्रदर्शित किया जाएगा, उनमें कुछ अवशेष 127 साल बाद भारत लाए गए हैं. ये अवशेष उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा नामक जगह पर एक स्तूप की खुदाई के दौरान 1898 में मिले थे.यह स्थान प्राचीन कपिलवस्तु का हिस्सा माना जाता है, जो भगवान गौतम बुद्ध की जन्मभूमि थी. इन अवशेषों को विलियम क्लॉक्सटन पेप्पे नाम का एक अंग्रेज अधिकार अपने साथ ब्रिटेन लेकर चला गया था. गौतम बुद्ध के ये अवशेष उसके निजी संग्रह में शामिल थे.

भारत सरकार के 2025 में सूचना मिली कि इन अवशेषों की हांगकांग में नीलामी होने वाली है. इस सूचना पर भारत सरकार सक्रिय हुई. सरकार नीलामी रुकवा कर उन्हें भारत लाई है.ये पवित्र अवशेष दुनिया भर के बौद्ध समुदायों के लिए श्रद्धा का विषय हैं.

ये अवशेष यूपी के सिद्धार्थनगर के पिपरहवा नामक जगह पर 1898 में एक स्तूप की खुदाई के दौरान में मिले थे.

ये अवशेष यूपी के सिद्धार्थनगर के पिपरहवा नामक जगह पर 1898 में एक स्तूप की खुदाई के दौरान में मिले थे.

किसने करवाई थी पिपरहवा में स्तूप की खुदाई 

अंग्रेज अधिकारी विलियम क्लॉक्सटन पेपे ने 1898 में उत्तर प्रदेश में आज के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा में स्थित स्तूप की खुदाई करवाई थी. वहां हड्डियों के टुकड़े, क्रिस्टल के पात्र, सोने के आभूषण और अन्य सामान मिला था. ये सामान बौद्ध परंपरा के मुताबिक स्तूप में रखे गए थे. पिपरहवा में मिले अवशेष में अस्थि-अवशेष, स्फटिक से बने पात्र, सोने के आभूषण और पूजा सामग्री शामिल थे. इसी खुदाई में ब्राह्मी लिपि का एक  शिलालेख भी मिला था, इससे पता चला कि ये अवशेष शाक्य वंश की ओर से भगवान बुद्ध को समर्पित किए गए थे. गौतम बुद्ध भी शाक्य परिवार से ही आते हैं.

पेपे ने 1899 में पिपरहवा में मिले अधिकांश अवशेष को कोलकाता के इंडियन म्यूजियम को सौंप दिया था.लेकिन उसका कुछ हिस्सा पेप्पे परिवार के पास ही रह गया था. ये सामान उसके निजी संग्रह का हिस्सा थे. लेकिन 2025 में गौतम बुद्ध को समर्पित सामान के अवशेष हांगकांग में नीलामी करने वाली संस्था सूदबी के पास नीलामी के लिए आए.इस सूचना पर भारत सरकार ने सक्रियता दिखाई. ये सामान भारतीय कानून के मुताबिक 'एए' श्रेणी की प्राचीन धरोहर हैं. उन्हें बेचना या भारत से बाहर ले जाना गैरकानूनी है. संस्कृति मंत्रालय ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कूटनीतिक और कानूनी प्रयासों से नीलामी को रुकवाया और अवशेषों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया.

प्रदर्शनी में और क्या रखा जाएगा

ऐसे में गौतम बुद्ध के इन अवशेषों का वापस भारत आना और उनको सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना शांति, करुणा और ज्ञान जैसे बौद्ध मूल्यों को आगे बढ़ाने की भारत की सोच का प्रदर्शन है. इस प्रदर्शनी में इस वापस लाए गए गौतम बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों के साथ-साथ नई दिल्ली के नेशनल म्यूजियम और कोलकाता के इंडियन म्यूजियम में सुरक्षित प्रामाणिक पुरातात्विक सामग्री भी प्रदर्शित की जाएगी. 

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