- संसद के नियमों के अनुसार सांसदों को भाषण देने और गिरफ्तारी से बचाव जैसे विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं
- राहुल गांधी ने अपने भाषण में एपस्टीन फाइल से संबंधित जानकारी दी, जिसे सत्ता पक्ष सत्यापित करने को कह रहा है
- इस सत्र में विपक्ष और सरकार के बीच तनाव है, लेकिन बजट सत्र के सुचारू संचालन के लिए सहमति की संभावना बनी हुई है
राहुल गांधी के खिलाफ यदि विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव आता है तो क्या हो सकता है, ये एक बड़ा सवाल है. बात अगर संसद के नियमों की करें तो उसके अनुसार हर सांसद के पास कुछ विशेषाधिकार होते हैं जिसमें भाषण देने का अधिकार,सिविल मामलों में गिरफ्तारी से बचाव जैसे अधिकार हैं. मगर सदन के अंदर कुछ ऐसे मामले भी हैं जैसे कि आपने किसी पर कोई आरोप लगाया तो आपको उसे सत्यापित करना होगा,उसके लिए आपको कुछ सबूत देने होंगे. आपको बताना होगा कि मैंने ये बातें यहां से कोट की हैं और संबंधित दस्तावेज की कॉपी आपको सदन में पेश करना होगा. हम ये बातें इसलिए कर रहे हैं क्योंकि ताजा मामला राहुल गांधी से संबंधित है. जिसमें राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल से संबंधित कुछ जानकारी सदन में अपने भाषण के दौरान कही हैं.अब सत्ता पक्ष का कहना है कि राहुल गांधी इसे सत्यापित करें वरना उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है.राहुल गांधी क्या करेंगे यह बाद की बात है मगर नियम क्या कहता है ये जानना भी जरूरी है.
विशेषाधिकार हनन का मामला बनने पर यह विषय विशेषाधिकार समिति को भेजा जाता है. मगर 18वीं लोकसभा में अभी तक इस कमिटी का गठन नहीं किया गया है.लोकसभा अध्यक्ष चाहें तो सदस्यों की एक समिति को यह मामला भेज सकते हैं,वो समिति इस मामले को देखेगी. इसके बाद राहुल गांधी से जवाब तलब करेगी और अपना निर्णय देगी. लोकसभा में यह समिति 15 सांसदों की होती है और राज्यसभा में 10 सांसदों की.एक बार जब ये मामला समिति के पास आया और उसने छानबीन कर कोई रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी तब वो सदन में लाया जाएगा. फिर सदन तय करेगा कि उस सदस्य के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए.यदि सदन को बहुमत से लगता है कि सदस्य ने बड़ी गलती की है तो उसे सदन से निष्कासित भी किया जा सकता है.
यदि राहुल गांधी के खिलाफ यदि विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव मंजूर हो जाता है और सदन चाहे तो राहुल गांधी को सदन से निष्कासित किया जा सकता है. फिर ऐसे हालात में उनकी सदस्यता भी जा सकती है. इतिहास गवाह है कि 1978 में इंदिरा गांधी को इमरजेंसी के दौरान अधिकारियों के काम में बाधा डालने पर संसद में तब के गृह मंत्री चरण सिंह के प्रस्ताव पर इंदिरा गांधी को सदन से निष्कासित किया गया था और उन्हें थोड़े दिनों के लिए जेल भी जाना पड़ा था.इसी तरह का एक मामला राज्यसभा में भी हुआ था जब सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ 1976 में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव आया था. उन्हें सदन से निष्कासित कर दिया गया था और उनकी सदस्यता चली गई थी.अब सबसे बड़ा सवाल है कि इतिहास एक बार फिर एक बार दोहराया,क्या सरकार राहुल गांधी को निष्कासित करने का जोखिम ले सकती हैं.
इस सत्र में अभी दो ही दिन बचे हैं विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर आमादा है. ऐसे में सरकार की तरफ से राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाना.हो सकता है कि कोई बीच का रास्ता निकल जाए और सरकार और विपक्ष में कोई सहमति बन जाए जिससे बजट सत्र का अगला भाग जो 9 मार्च से शुरू हो कर 2 अप्रैल तक चलेगा, वो सुचारू रूप से चल सके.
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