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This Article is From Nov 28, 2025

पाकिस्तान को लगेगी मिर्ची.. दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश भारत से ब्रह्मोस खरीदने की तैयारी में

भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल सौदे को लेकर अधिकांश शर्तों पर सहमति बन चुकी है. संभावना है कि इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर साल के आखिर तक दोनो देशों के बीच आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर हो जाएंगे.

पाकिस्तान को लगेगी मिर्ची.. दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश भारत से ब्रह्मोस खरीदने की तैयारी में
  • भारत और इंडोनेशिया ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के बड़े रक्षा समझौते को अंतिम चरण में हैं
  • इंडोनेशियाई प्रतिनिधिमंडल ने ब्रह्मोस मिसाइल की क्षमताओं और ऑपरेशन सिन्दूर की विशेष जानकारी प्राप्त की है
  • यह सौदा इंडोनेशिया की दक्षिण चीन सागर में रणनीतिक ताकत बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा मजबूत करने में सहायक होगा

जिस ब्रह्मोस ने पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर में घुटनों पर ला दिया. जिसकी धमक से दुश्मनों में सिहरन हो पैदा हो जाती. उस ब्रह्मोस को दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश मलेशिया खरीदने की तैयारी में है. इस खबर से पड़ोसी पाकिस्तान को मिर्ची लगनी तय है. दरअसल, भारत और इंडोनेशिया के बीच एक ऐतिहासिक रक्षा समझौता अपने अंतिम चरण में है. संकेत है कि इंडोनेशिया जल्द ही भारत की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल 'ब्रह्मोस' खरीदने वाला है. 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने  इंडेनेशिया के रक्षा मंत्री स्याफरी स्यामसुद्दीन को ब्रह्मोस मिसाइल की एक प्रतिकृति दी है. माना जा रहा है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर अंतिम मुहर लग चुकी है. बस ऐलान होने की देर है. सूत्रों के मुताबिक इंडोनेशिया की टीम ने ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल के इस्तेमाल को लेकर एक विशेष ब्रीफिंग भी ली है. ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश का भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का फैसला करना न केवल विदेश के देशों के बल्कि पड़ोसी देशों की नींद उड़ा देने के लिये काफी है .  

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सुखोई 30 में होगा ब्रह्मोस

जानकारी के मुताबिक इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री स्याफरी स्यामसूद्दीन के नेतृत्व में एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली स्थित ब्रह्मोस उत्पादन ईकाई का दौरा किया. प्रतिनिधिमंडल को मिसाइल प्रणाली की क्षमताओं का विस्तृत विवरण दिया गया. सूत्रों के मुतबिक वैसे तो इंडोनेशियाई ब्रह्मोस का थल, नौसेना और वायुसेना का वर्जन लेना चाहता है लेकिन फिलहाल इंडोनेशियाई टीम ने नौसेना संस्करण में विशेष रुचि दिखाई है. संभावना है कि इंडोनेशिया को सबसे पहले नौसेना संस्करण ही प्राप्त किए जाने की संभावना है. इसके साथ ही वह अपने लड़ाकू विमान सुखोई 30 के लिये भी ब्रह्मोस खरीदने पर गंभीरता से विचार कर रहे है .

भारत और इंडोनेशिया ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लिए एक बड़े रक्षा समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच गए हैं. सूत्रों के मुताबिक दोनों देश वित्तीय शर्तों को अंतिम रूप देने और इंडोनेशिया के लिए चरणबद्ध खरीद योजना सुनिश्चित करने की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं. यह प्रस्तावित सौदा हाल ही में आयोजित तीसरे भारत–इंडोनेशिया रक्षा मंत्रिस्तरीय संवाद का प्रमुख मसला रहा. इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके इंडोनेशियाई समकक्ष ने विस्तारपूर्वक चर्चा की. यह सौदा पूरा होने के बाद फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया दूसरा एशियाई देश बन जायेगा जिसने ब्रह्मोस मिसाइल खरीदा है .

इंडोनेशिया चीन के खिलाफ  रणनीतिक ताकत बढ़ा रहा

सूत्रों के मुताबिक फिलीपींस की तरह इंडोनेशिया भी चीन के खिलाफ अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ने में जुटा है. इसी के तहत दक्षिण चीन सागर में जब उसके युद्धपोत पर  ब्रह्मोस मिसाइल तैनात हो जाएगा तो चीन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से पहले हजार बार सोचेगा. यह भी सच है कि चीन यह जानता है कि ब्रह्मोस का वॉर कभी खाली नही जाता है ऐसे में अगर कई युद्धपोत पर ब्रह्मोस से हमला हो तो उसकी तबाही निश्चित है. इससे इंडोनेशिया का समुद्री सुरक्षा के साथ हवाई प्रतिरोधक क्षंमता भी मजबूत होगा . 

क्या है ब्रह्मोस की खासियत

ब्रह्मोस की खासियत की बात करें तो इसे भारत और रुस ने मिलकर विकसित किया है. यह विश्व की सबसे तेज और अत्याधुनिक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. इसकी रफ्तार 2.8 मैक यानी 3,450 किमी प्रति घंटा है. इसकी रेंज 290 किलोमीटर है. यह जमीन ,समुद्र और आसमान से अत्यधिक सटीक प्रहार करने में सक्षम है. बड़ी बात यह भी इसे ट्रैक करना बहुत मुश्किल है. जब तक दुश्मन को इस मिसाइल के बारे में पता चलता है तब तक यह तबाही मचा देती है. इसका निशाना कभी चूकता नही है.   

सूत्रों से यह भी पता चला है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल सौदे को लेकर अधिकांश शर्तों पर सहमति बन चुकी है. संभावना है कि इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर साल के आखिर तक दोनो देशों के बीच आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर हो जाएंगे. यह भारत के बढ़ते रक्षा निर्यात विशेषकर अन्य एशियाई देशों के साथ साझेदारी में एक अहम उपलब्धि होगी.

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