विज्ञापन

'यह डर जीवनभर रहेगा साथ...' : HC ने पिता को बच्चे से मिलने का अधिकार देते हुए ऐसा क्यों कहा?

बंबई उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि बच्चे के जीवन में माता-पिता दोनों की उपस्थिति बहुत महत्वपूर्ण है.’’

'यह डर जीवनभर रहेगा साथ...' : HC ने पिता को बच्चे से मिलने का अधिकार देते हुए ऐसा क्यों कहा?
  • बंबई हाई कोर्ट ने महिला के बच्चे पर अत्यधिक अधिकार जताने और पिता को मिलने से रोकने पर चिंता जताई.
  • अदालत ने कहा कि बच्चे के जीवन में माता-पिता दोनों की मौजूदगी अत्यंत आवश्यक और लाभकारी होती है.
  • न्यायालय ने ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान पिता को बच्चे से मिलने पांच दिन का समय देने का आदेश दिया.

बंबई हाई कोर्ट ने कहा है कि वह एक महिला के अपने बच्चे पर अत्यधिक अधिकार जताने के रवैये से बेहद चिंतित है, जिसके तहत वह अलग रह रहे अपने पति को बच्चे से मिलने के अधिकार से वंचित कर रही है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे के जीवन में माता-पिता दोनों की उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है. न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की पीठ ने पिछले सप्ताह पारित एक आदेश में कहा कि दंपति के बीच चाहे जो भी मतभेद हो, बच्चे को माता-पिता दोनों का प्यार मिलना चाहिए.

अदालत एक व्यक्ति द्वारा दायर उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान अपने नाबालिग बेटे से मिलने की अनुमति का अनुरोध किया था. अदालत ने महिला को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान पांच दिन के लिए बच्चे को उसके पिता के हवाले करने का आदेश दिया.

व्यक्ति ने अपनी अर्जी में कहा कि उसकी अलग रह रही पत्नी ने पारिवारिक अदालत के समक्ष छुट्टियों के दौरान बच्चे से मिलने के अधिकार की अनुमति देने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में उसने इनकार कर दिया और साथ ही वह उसे सप्ताहांत के दौरान भी अपने बेटे से मिलने नहीं दे रही है, जैसा कि उनके बीच सहमति बनी थी.

अदालत ने कहा कि बच्चे के प्रति मां में ‘अत्यधिक अधिकार की भावना' दिखाई देती है और यह भी उल्लेख किया कि बच्चे को परामर्श (काउंसलिंग) के लिए एक मनोवैज्ञानिक के पास भेजा गया. पीठ ने इसे “चिंताजनक” बताया और कहा कि यदि बच्चे को माता-पिता दोनों के साथ रहने का अवसर मिला होता, तो संभवतः उसे मनोवैज्ञानिक के पास भेजने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती.

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि बच्चे के जीवन में माता-पिता दोनों की उपस्थिति बहुत महत्वपूर्ण है.'' अदालत ने कहा कि इस मामले में, आठ साल का बच्चा जीवन के प्रारंभिक वर्षों में है, और ऐसी स्थिति में, यदि उसकी मां उसे यह बताती है कि उसके लिए अपने पिता के साथ रहना ठीक नहीं है, तो बच्चा उस भय को जीवन भर अपने साथ रखेगा. अदालत ने कहा, ‘‘माता-पिता के बीच चाहे जो भी मतभेद हो, हमारी राय में, बच्चे को पिता और माता दोनों का प्यार मिलना चाहिए.''

ये भी पढ़ें : "NTA पर अब भरोसा नहीं", कोटा में NEET की तैयारी करने वाले छात्र बोले- क्‍या गारंटी अब पेपर लीक नहीं होगा

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Bombay High Court, Husband-wife Dispute, Right To Meet Child, Bombay High Court News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com