- महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट ने बीएमसी में 118 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है.
- शिंदे गुट ने मेयर चुनाव से पहले पार्षदों को टूट से बचाने के लिए पांच सितारा होटल में ठहराया है.
- महायुति गठबंधन के पास बहुमत है लेकिन विपक्ष के एकजुट होने पर बहुमत से आठ पार्षद कम रह जाता है.
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट ने जबरदस्त जीत हासिल की है. इसमें सबसे अहम मुंबई बीएमसी का चुनाव था, जहां 25 साल से काबिज ठाकरे परिवार को सत्ता से बेदखल कर टीम बीजेपी ने 227 वार्डों वाली बीएमसी में 118 सीटें हासिल की हैं, जो बहुमत से सिर्फ 4 ज्यादा हैं. लेकिन मेयर चुनाव के पहले कोई खेला न हो, इसलिए शिवसेना शिंदे के 29 पार्षदों को पांच सितारा होटल में ठहराया गया है.
क्या शिंदे टूट के डर में पार्षदों को होटल में शिफ्ट कर रहे हैं?
सांसद-विधायकों की जगह पार्षदों को एकजुट रखने के लिए ये होटल-रिसॉर्ट पॉलिटिक्स चौंकाने वाली है. दरअसल महायुति गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला है, लेकिन अगर विपक्ष एकजुट होता है तो वह बहुमत से 8 पार्षद कम रह जाता है.क्या एकनाथ शिंदे की शिवसेना से 8 पार्षद टूटकर अलग हो सकते हैं? इसी आशंका को देखते हुए क्या एकनाथ शिंदे ने अपने सभी निर्वाचित पार्षदों को होटल में शिफ्ट करने की योजना बनाई है?
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नंबर गेम: असली लड़ाई कहां अटकी है?
बहुमत का आंकड़ा: 114
बीजेपी + शिवसेना (शिंदे): 118
संयुक्त विपक्ष:
शिवसेना (UBT) + कांग्रेस + मनसे + एनसीपी (SP) + सपा + AIMIM = 106
यानी बहुमत से सिर्फ 8 कम
यही '8' अब महाराष्ट्र की राजनीति की सबसे बड़ी कहानी बन गया है.
क्या शिंदे की शिवसेना से 8 पार्षद टूट सकते हैं?
इसी संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चा गरम है. अगर विपक्ष एकजुट होकर दावा पेश करता है और शिंदे गुट में सेंध लगती है, तो तस्वीर बदल सकती है. यही वजह बताई जा रही है कि शिंदे अपने पार्षदों को होटल में सुरक्षित रखने के मूड में दिख रहे हैं.
AIMIM भी सक्रिय- होटल ट्राइडेंट में रणनीति बैठक
बीएमसी में इस बार AIMIM के 8 नगरसेवक चुने गए हैं. यह पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. पार्टी ने मुंबई के होटल ट्राइडेंट में अपनी पहली रणनीति बैठक बुलाई है जिसमें AIMIM के नवनिर्वाचित पार्षद, हैदराबाद के वरिष्ठ विधायक अहमद बिन अब्दुल्ला बलाला और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी शामिल होंगे. बैठक में आगे की रणनीति और सदन में AIMIM की भूमिका तय की जाएगी.
क्या संकेत दे रहा है यह पूरा घटनाक्रम?
महायुति की जीत के बावजूद शिंदे गुट असुरक्षा महसूस कर रहा है. विपक्ष एकजुट होकर खेल बिगाड़ने की कोशिश कर सकता है. AIMIM अपने 8 पार्षदों के साथ समीकरण बदलने लायक प्रभाव रखती है और मुंबई में एक बार फिर रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की वापसी दिखाई दे रही है.
बीएमसी की सत्ता सिर्फ अन्यतम बहुमत की कहानी नहीं है. यह भरोसे, टूट‑फूट, रणनीति और होटल पॉलिटिक्स का नया अध्याय भी है. आने वाले दिन तय करेंगे कि यह बहुमत वास्तव में स्थिर है या 8 पार्षदों का आंकड़ा मुंबई की राजनीति को फिर करवट दिला देगा.
क्या मेयर पद पर दावा ठोकने की एकनाथ शिंदे की रणनीति?
अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को होटल में शिफ्ट कर एकनाथ शिंदे बीजेपी के साथ बातचीत की ताकत बढ़ाना चाहते हैं. इसमें कोई शक नहीं कि शिंदे इस समय किंगमेकर की भूमिका में हैं, लेकिन अब वह सिर्फ किंगमेकर नहीं बल्कि किंग बनना चाहते हैं. यानी वह चाहते हैं कि मेयर शिवसेना का ही बने. पार्टी के भीतर एकनाथ शिंदे पर दबाव है और गुट बन चुके हैं, जो मेयर पद को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करने के पक्ष में हैं. परंपरागत रूप से मेयर पद हमेशा शिवसेना के पास रहा है और पार्टी का मानना है कि यह परंपरा बनी रहनी चाहिए मेयर पद शिवसेना को ही मिलना चाहिए.
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