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बंगाल बीजेपी का घोषणा पत्र पिछली बार से कितना अलग- नारे, वादे क्या-क्या बदले?

बीजेपी के 2021 के संकल्प पत्र और 2026 के भरोसा पत्र, दोनों में कमोबेश एक ही तरह की बात है. अंतर बस ये है कि 2021 के संकल्प पत्र में तब के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की तस्वीर थी, जो इस बार प्रेस कांफ्रेंस तक से गायब रहे.

बंगाल बीजेपी का घोषणा पत्र पिछली बार से कितना अलग- नारे, वादे क्या-क्या बदले?
  • BJP ने बंगाल चुनाव के लिए भरोसा पत्र जारी किया है, जिसमें महिलाओं-बेरोजगारों को आर्थिक सहायता देने का वादा है
  • बीजेपी ने घुसपैठियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनके डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करने का एजेंडा रखा है
  • तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी के घोषणाओं को हवा हवाई बताया और पीएम की पहले की घोषणाओं पर सवाल उठाए हैं
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कोलकाता:

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने जो अपना संकल्प पत्र जारी किया है. उसके कवर पर बंग्ला में लिखा है- 'भरोशार शपथ' यानि भरोसे का शपथ. फिर नीचे लिखा है 'पलटानो दोरकार चाहिए बीजेपी सरकार' यानी इस बार सरकार पलटकर बीजेपी सरकार बनानी चाहिए. साथ ही इस बार शपथ पत्र पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और शुभेन्दु अधिकारी की फोटो लगी है.

बीजेपी के पश्चिम बंगाल के शपथ पत्र की तीन बड़ी बातों की बात करें तो वो है - महिलाओं को 3000 रुपये की हर महीने आर्थिक सहायता और सभी नौकरियों में 33 फीसदी का आरक्षण. साथ ही फ्री ट्रांसपोर्ट, हर एक बेरोजगार युवक को 3000 रुपये की आर्थिक सहायता, पूर्वी बंगाल के लिए आईआईटी, आईआईएम, एम्स और फैशन डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट, चाय बगान के लिए विशेष पैकेज.

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यदि आप बीजेपी के भरोसा पत्र को देखें तो ऐसा लगता है कि वो बंगाल के लिए खजाना खेलने के लिए तैयार हैं. मगर यदि आप बीजेपी के 2021 के संकल्प पत्र की बात करें तो लगभग दोनों में कमोबेश एक ही तरह की बात लिखी है. अंतर बस ये है कि 2021 के संकल्प पत्र में तब के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की तस्वीर थी, जो इस बार प्रेस कांफ्रेंस तक से गायब रहे. पिछली बार और इस बार के संकल्प पत्र में महिलाओं और बेरोजगारों को 3000 रुपये महीना देने के अलावा थोड़ा बहुत फेरबदल किया गया है. हां इतना जरूर है कि इस बार बीजेपी ने महिलाओं को फोकस में रखकर भरोसा पत्र बनाया है.

यदि बीजेपी के 2021 के संकल्प पत्र को देखें तो सब कुछ सोनार बांग्ला को केन्द्र में रखकर बनाया गया था. सोनार बांग्ला के तहत कई घोषणाएं की गईं थी, जो इस बार गायब है. बीजेपी सोनार बांग्ला शब्द से ही बच रही है. इस बार बीजेपी घुसपैठ के मुद्दे पर बहुत सख्त दिख रही है, घुसपैठियों के लिए डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट शब्द का इस्तेमाल किया है.
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बीजेपी नेता लॉकेट चटर्जी ने एनडीटीवी से कहा कि हम घुसपैठियों की पहचान करेंगे और उन्हें वापस भेजेंगे. उनका कहना है कि इस बार भरोसा पत्र बनाने से पहले हमने बंगाल के हर जगह से लोगों की राय मंगवाई फिर मैनिफेस्टो तैयार किया.

बीजेपी के इस भरोसा पत्र का जवाब देने तृणमूल कांग्रेस के नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी सामने आए, जिन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले कहा था कि हर एक महिला को 2500 रुपये मिलेंगे, लेकिन अभी तक मिला ही नहीं, जबकि साल भर से ज्यादा हो गया हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी की सारी घोषणाएं हवा हवाई हैं.

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हालांकि जब अभिषेक बनर्जी से एसआईआर के तहत 90 लाख नामों के काटे जाने पर सवाल पूछा गया तो उनका जवाब था कि एसआईआर में 63 फीसदी नाम हिंदू मतदाताओं के कटे हैं और तृणमूल बाकी नाम कटे मतदाताओं की लड़ाई लड़ेगी.

कुल मिलाकर इस बार बंगाल के चुनाव में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस दोनों आत्मविश्वास से भरी दिख रही है. बीजेपी इस चुनाव को घुसपैठ, महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार और कुशासन पर ले जाना चाहती है तो तृणमूल कांग्रेस इसे बांग्ला बनाम बाहरी, मछली खाने की आजादी और महिलाओं पर सीमित रखना चाहती है और इस सबके बीच बंगाल का मतदाता चुप है, अभी वो पार्टियों के बयानबाजी के मजे ले रहा है.

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