- कर्नाटक में सिद्धारमैया मुख्यमंत्री पद छोड़कर डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा
- राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को राज्यसभा आने और उनके बेटे यतींद्र को मंत्री बनाने की सलाह दी है
- यतींद्र, जो पहले विधायक रह चुके हैं और डॉक्टर हैं, को स्वास्थ्य मंत्रालय मिलने की संभावना है
कनार्टक में यह तय हो गया है कि सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी और उसके बदले डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. डीके शिवकुमार अभी कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री हैं और उनके पास दो अहम मंत्रालय भी है. कांग्रेस आलाकमान ने मंगलवार को सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के साथ मैराथन बैठक की.
राहुल गांधी फिर सलाह मशविरा करने के लिए सोनिया गांधी से भी मिलने गए और उनसे मिलने के बाद उन्होंने सिद्धारमैया से अकेले में बातचीत की. उसके बाद राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद छोड़ने और राज्यसभा में आने की सलाह दी. सिद्धारमैया को यह भी कहा गया कि उनके बेटे यतींद्र को मंत्री बना दिया जाएगा. यतींद्र अभी विधानपरिषद यानि एमएलसी है मगर इसके पहले 2018 से 2023 तक विधायक रह चुके हैं. यतींद्र एमबीबीएस और एमडी है और पेशे से डॉक्टर हैं.
बिहार जैसा ही कुछ कर्नाटक में होगा?
यतींद्र के बारे में मैं इतनी जानकारी आपको इसलिए दे रहा हूं कि कनार्टक में जो कुछ हो रहा है वो सब बिहार में हो चुका है. बिहार में जो राजनीतिक घटनाक्रम हो चुका है वहीं कनार्टक में दोहराया जा रहा है. बिहार में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना पद छोड़ना पड़ा और राज्यसभा आना पड़ा और उनके बेटे को मंत्री बनाया गया.
निशांत कुमार अभी बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं और सबसे दिलचस्प बात है कि यदि डीके कल को मुख्यमंत्री बनते हैं तो क्या पता यतींद्र को स्वास्थ्य मंत्री बनाया जा सकता है क्योंकि वो एमबीबीएस और एमडी हैं और स्वास्थ्य मंत्री बनने के योग्य हैं. यदि ऐसा होता है तो उसे राजनीति का गजब का संयोग ही कहा जाएगा.
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कर्नाटक में सियासत में एक और पुत्र उदय
यदि यतींद्र को डीके शिवकुमार के कैबिनेट में जगह दी जाती है तो कनार्टक की राजनीति में एक और पुत्र का उदय होगा ठीक वैसा ही जैसे बीजेपी में बीएस येदियुरप्पा के बेटे विजेन्द्र की तरह जिन्हें कनार्टक बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है. उधर पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा का पूरा परिवार राजनीति में है ही. कुमारस्वामी तो केंद्र में मंत्री हैं.
वैसे सिद्धारमैया अपने बेटे यतींद्र और अपने पोते धवन राकेश को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बता चुके हैं. सिद्धारमैया के पोते धवल राकेश के पिता राकेश सिद्धारमैया का निधन हो चुका है. 2023 के विधानसभा चुनाव में ही सिद्धारमैया ने घोषणा की थी ये चुनाव उनका आखिरी विधानसभा चुनाव है. लगता है इन्हीं सब वजहों से सिद्धारमैया ने राहुल गांधी की बात मान ली है और मुख्यमंत्री पद छोड़ने का भी मन बना लिया है.

सिद्धारमैया और उनके बेटे यतींद्र.
लेकिन पोते का क्या होगा?
यहां पर केवल एक दिक्कत है सिद्धारमैया के पोते अभी महज 20 साल के हैं और उसे चुनाव लड़ने के लिए पांच साल तक इंतजार करना पड़ सकता है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि क्या सिद्धारमैया राज्यसभा में आना भी चाहते हैं या नहीं? उनसे कहा जरूर गया है मगर उन्होंने इसे स्वीकार किया है या नहीं इसकी कोई पुष्टि अभी तक नहीं हुई है. यदि सिद्धारमैया राज्यसभा नहीं जाते हैं तो उनका इस्तीफा जल्दी हो जाएगा.
अब सबको इंतजार है कि सिद्धारमैया मुख्यमंत्री पद से कब इस्तीफा देते हैं और डीके शिवकुमार की कब ताजपोशी होती है?
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