सोचिए, किसी जेल में जब कैदियों को फांसी दी जाएगी तो आगे लोग लाइव देखेंग, उनके लिए खास दर्शक दीर्घा बनाई जाएगी. इजरायल में कुछ ऐसा ही करने की तैयारी है. देश के कट्टर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने एक वीडियो शेयर किया है. इसमें वह बन रहे एक ऐसे फांसीघर के सामने जश्न मना रहे हैं, जहां आतंक से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए फिलिस्तीनियों को फांसी देने की बात कही गई है. यहां पीड़ितों के परिवारों के लिए वहां बैठकर फांसी देखने की व्यवस्था भी होगी.
फिलिस्तीनियों के लिए बन रहा फांसीघर
बेन-गिवर इजरायल के वहीं कट्टर मंत्री हैं जिनपर पहले भी अपनी हरकतों के कारण दुनिया के कई देशों में प्रतिबंध लगे हैं, वह आलोचना का सामना कर चुके हैं. अब उन्होंने इस फांसीघर के निर्माण की जानकारी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें वे एक अज्ञात जगह का दौरा करते हुए दिख रहे हैं. वीडियो में वे बन रही नींव की ओर इशारा करते हुए और यह दावा करते हुए नजर आ रहे हैं कि "यहीं पर आतंकवादियों को फांसी दी जाएगी". उन्होंने ने कहा कि फांसी देने की नई जगह पर पीड़ितों के परिवारों के लिए फांसी देखने के लिए खास बूथ बनाए जाएंगे.
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार इजरायली मीडिया में आई तस्वीरों में एक घेरे हुए इलाके में बुलडोजर और भारी निर्माण कार्य होता दिख रहा है. बताया जा रहा है कि यह इलाका एक जेल के पास है.
फिलिस्तीनियों को फांसी, यहूदियों को सजा-ए-मौत से छूट
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार फांसी घर बनाने की इन खबरों से बहले इजरालय में इस साल की शुरुआत में एक नया कानून पास हुआ था. इस कानून के तहत, मिलिट्री कोर्ट के पास सिर्फ मौत की सजा देना ही एकमात्र विकल्प है, सिवाय उन मामलों के जहां कोर्ट को उम्रकैद देने के लिए कोई खास वजह नजर आए. हालांकि यहूदी इजरायलियों को मौत की सजा से एक प्रावधान के जरिए बचाया गया है- इस कानून में कहा गया है कि यह कानून सिर्फ उन हत्याओं पर लागू होता है जो इजरायल राज्य के अस्तित्व को नकारने की मंशा से की गई हों.
नफरत की राजनीति का आरोप
इजरायल में मौत की सजा वाले इस नए कानून को लाने वालों में से एक बेन-गवीर भी हैं. उनका चरमपंथी बयान देने और हिंसा के लिए उकसाने का लंबा इतिहास रहा है. उन्होंने मई में अपना 50वां जन्मदिन एक ऐसे केक के साथ मनाया, जिस पर फांसी के फंदे की तस्वीर बनी हुई थी. मौत की सजा वाला यह कानून अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर आलोचना का शिकार हुआ है. नेसेट (इजरायली संसद) में 48 के मुकाबले 62 वोटों से पास होने के बाद से ही इसकी आलोचना हो रही है, क्योंकि आरोप है कि यह कानून मूल रूप से भेदभावपूर्ण है.
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