- भोपाल में ट्विशा की मौत मामले में गिरफ्तार समर्थ सिंह CBI हिरासत में एक जापानी क्राइम थ्रिलर पढ़ रहा है
- समर्थ सिंह को पुलिस हिरासत में किताब पढ़ने की अनुमति मिली है, उसने उपन्यास आधे से ज्यादा हिस्सा पढ़ लिया है
- पढ़ी जा रही किताब ‘बटर’ एक जापानी क्राइम थ्रिलर है जो अपराध, मनोविज्ञान की उलझी हुई कहानी है
भोपाल में ट्विशा शर्मा डेथ केस में गिरफ्तार रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह का बेटा और आपराधिक मामलों का वकील समर्थ सिंह CBI हिरासत में एक खास किताब पढ़कर अपना वक्त गुजार रहा है. इस किताब में मनोविज्ञान और अपराध के बीच की उलझी एक मर्डर मिस्ट्री की कहानी है. यह एक जापानी क्राइम थ्रिलर उपन्यास है, जिसका नाम है ‘बटर'. समर्थ सिंह की इस क्राइम थ्रिलर में इतनी दिलचस्पी ने सभी का ध्यान खींचा है. बता दें कि समर्थ पत्नी ट्विशा की मौत मामले में दहेज हत्या के आरोपों का सामना कर रहा है.
मर्डर मिस्ट्री पढ़ रहा ट्विशा का पति समर्थ
पत्नी ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में गिरफ्तार समर्थ सिंह यह क्राइम थ्रिलर उपन्यास अपने पास 22 मई की गिरफ्तारी के बाद से ही रखे हुए है. भोपाल के कटारा हिल्स स्थित पुलिस हिरासत में रहते हुए समर्थ यह किताब करीब आधे से ज्यादा पढ़ भी चुका है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, समर्थ को हिरासत में किताब पढ़ने की अनुमति दी गई है. जानकारी के मुताबिक, समर्थ सालों से अपराध, मनोविज्ञान और न्याय व्यवस्था से जुड़ी किताबें पढ़ने का शौकीन रहा है.
‘कॉपीकैट किलर' घटना से प्रेरित है जापानी उपन्यास
जापानी लेखिका आसाको युजुकी का चर्चित उपन्यास 'बटर' साल 2017 में प्रकाशित हुआ था, से जापान की बहुचर्चित कॉपीकैट किलर घटना से प्रेरित माना जाता है. यह उपन्यास एक कुकिंग विशेषज्ञ महिला की कहानी पर आधारित है, जिस पर कई रईस व्यापारियों की हत्या का आरोप लगता है. महिला पर आरोप है कि वह लजीज खाना और इमोशनल तरीके से पुरुषों को अपने प्रभाव में लेती थी. उपन्यास एक महिला पत्रकार और जेल में बंद मनोविज्ञानिक के संपर्क को दिर्शाता है. धीरे-धीरे दोनों के बीच संवाद का सिलसिला शुरू होता है.
पत्नी की मौत का आरोपी समर्थ क्राइम थ्रिलर क्यों पढ़ रहा?
अब ट्विशा का पति समर्थ सीबीआई हिरासत में इसी 'बटर' उपन्यास को पढ़ रहा है. उपन्यास की कहानी अपराध, अकेलापन, समाज में महिलाओं की छवि और मनोविज्ञान की पेचीदगियों को दर्शाती है. दिलचस्प बात यह भी है कि कहानी का केंद्रीय पात्र अंत तक अदालत में निर्दोष साबित होता है. समर्थ सिंह ऐसे वक्त में इस किताब को पढ़ रहा है जब वह पत्नी की मौत मामले में आरोपों का सामना कर रहा है. ऐसे समय में अपराध और मनोवैज्ञानिक तनाव पर आधारित साहित्य की ओर उसका झुकाव हाल के हालात में कई तरह के सवाल जरूर पैदा कर रहा है.
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